Home Top News भारत ने स्लोवाकिया संग मिलकर बनाई ये रणनीति, जानिए क्या है दोनों देशों का ‘ज्वाइंट वर्किंग ग्रुप’

भारत ने स्लोवाकिया संग मिलकर बनाई ये रणनीति, जानिए क्या है दोनों देशों का ‘ज्वाइंट वर्किंग ग्रुप’

by Sanjay Kumar Srivastava 16 June 2026, 8:43 PM IST (Updated 17 June 2026, 12:04 PM IST)
16 June 2026, 8:43 PM IST (Updated 17 June 2026, 12:04 PM IST)
आतंकवाद पर भारत ने स्लोवाकिया के साथ मिलकर बनाई ये रणनीति, जानिए क्या है दोनों देशों का 'ज्वाइंट वर्किंग ग्रुप'

India-Slovakia Relations: भारत और मध्य यूरोपीय देश स्लोवाकिया के बीच द्विपक्षीय संबंधों में एक नए और ऐतिहासिक युग की शुरुआत हो चुकी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 जून को स्लोवाकिया की राजधानी ब्रातिस्लावा का राजकीय दौरा किया. वर्ष 1993 में चेकोस्लोवाकिया के विभाजन के बाद स्लोवाकिया की स्वतंत्रता के इतिहास में यह किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली आधिकारिक द्विपक्षीय यात्रा है.

इस यात्रा के दौरान दोनों देशों ने पारस्परिक विश्वास को बढ़ाते हुए अपने द्विपक्षीय संबंधों को व्यापक साझेदारी के स्तर तक उन्नत (Elevate) कर दिया है. इस यात्रा को यादगार बनाते हुए स्लोवाकिया के राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रिनी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश के सर्वोच्च राजकीय सम्मान ‘ऑर्डर ऑफ द व्हाइट डबल क्रॉस, फर्स्ट क्लास’ से नवाजा. यह सम्मान विशेष रूप से केवल विदेशी नागरिकों को ही दिया जाता है. पीएम मोदी ने इस वैश्विक सम्मान को भारत के 140 करोड़ लोगों और नई दिल्ली तथा ब्रातिस्लावा की गहरी होती दोस्ती को समर्पित किया.

भारत की स्थायी सदस्यता का खुला समर्थन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे के दौरान स्लोवाकिया ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत की स्थायी सदस्यता के दावे का जोरदार और खुला समर्थन किया. स्लोवाकिया के प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको ने ब्रातिस्लावा कैसल में आयोजित एक संयुक्त प्रेस वार्ता में स्पष्ट शब्दों में कहा कि स्लोवाकिया का यह दृढ़ विश्वास है कि भारत जैसे महान और प्रभावशाली राष्ट्र को एक संशोधित एवं विस्तारित संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्य होना ही चाहिए. अंतरराष्ट्रीय मंचों पर स्लोवाकिया के इस कदम को वैश्विक कूटनीति में भारत के बढ़ते प्रभाव की बड़ी जीत मानी जा रही है.

स्लोवाकिया ने इसके साथ ही परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (NSG) में भी भारत की सदस्यता को लेकर एक रचनात्मक दृष्टिकोण अपनाने की बात को दोहराया है. सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता के इस समर्थन ने सिद्ध किया है कि यूरोपीय संघ (EU) के भीतर स्लोवाकिया भारत के एक सबसे अच्छे और भरोसेमंद मित्र के रूप में उभर रहा है.

‘मोदी युग’ की मजबूती

ऐतिहासिक दृष्टिकोण से देखें तो 1993 में स्लोवाकिया के स्वतंत्र होने के बाद से भारत और स्लोवाकिया के बीच रिश्ते मैत्रीपूर्ण तो रहे, लेकिन उनमें कोई बड़ा रणनीतिक या ऐतिहासिक उच्च स्तरीय दौरा शामिल नहीं था. पिछले तीन दशकों में दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंध मुख्यतः विदेश मंत्रियों के दौरों और संयुक्त आर्थिक समितियों तक ही सीमित थे. हालांकि, हाल के वर्षों में गति बदली और अप्रैल 2025 में भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने स्लोवाकिया का दौरा किया था, जिसने राजनीतिक प्रतिबद्धता को नया बल दिया.

प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा के बाद दोनों देशों के संबंध महज औपचारिक राजनयिक संवाद से आगे बढ़कर रणनीतिक और आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में मुड़ गए हैं. जहां पहले स्लोवाकिया को मध्य यूरोप के एक छोटे से बाजार के रूप में देखा जाता था, वहीं अब भारत उसे यूरोपीय संघ, विसेग्राद 4 (V4) और थ्री सीज इनिशिएटिव जैसे प्रभावशाली क्षेत्रीय समूहों तक अपनी रणनीतिक पहुंच बनाने के एक बड़े द्वार के रूप में देख रहा है. इस यात्रा ने दोनों देशों के संबंधों को एक आधुनिक, बहुआयामी और व्यापक रणनीतिक ढांचा प्रदान किया है.

आर्थिक, तकनीकी और सुरक्षा क्षेत्रों में बड़े समझौते

ब्रातिस्लावा में हुई प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता के बाद भारत और स्लोवाकिया ने अपनी रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी को विस्तार देने के लिए कुल 11 महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए. इनमें रणनीतिक, तकनीकी और सुरक्षा स्तर पर सहयोग बढ़ाने के लिए नए संस्थागत तंत्र स्थापित करने की घोषणा की गई.

  • रक्षा क्षेत्र में सहयोग: दोनों देशों ने रक्षा क्षेत्र में तकनीकी सहयोग, संयुक्त विनिर्माण और अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए एक ‘आशय पत्र’ (Letter of Intent) पर सहमति जताई है. स्लोवाकिया का रक्षा ढांचा काफी मजबूत है और भारत मेक इन इंडिया के तहत रक्षा सप्लाई चेन को मजबूत करना चाहता है.
  • डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर और AI: उन्नत डिजिटल प्रौद्योगिकियों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और भारत के सफल डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर को लेकर एक व्यापक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं.
  • साइबर सुरक्षा और क्वांटम संचार: क्रिटिकल इन्फ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा और साइबर खतरों से निपटने के लिए क्वांटम संचार और साइबर सुरक्षा सहयोग को लेकर एक विशेष एमओयू फाइनल किया गया.
  • भारत-EU मुक्त व्यापार समझौता (FTA): स्लोवाकिया के प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको ने भारत और यूरोपीय संघ के बीच चल रहे महत्वाकांक्षी मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के वार्ता निष्कर्षों का स्वागत किया और इसके जल्द से जल्द क्रियान्वयन पर जोर दिया, जिससे द्विपक्षीय व्यापार कई गुना बढ़ जाएगा.

अमेरिका- ईरान डील का भारत ने किया स्वागत, पीएम मोदी बोले- कई देशों में जानें गईं…

आतंकवाद के खिलाफ भारत को मिला मजबूत साथ

वैश्विक सुरक्षा के मोर्चे पर दोनों देशों ने आतंकवाद के खिलाफ बेहद कड़ा रुख अपनाया है. भारत और स्लोवाकिया ने आतंकवाद से सामूहिक रूप से निपटने के लिए एक समर्पित ‘काउंटर-टेररिज्म ज्वाइंट वर्किंग ग्रुप’ का गठन करने का बड़ा फैसला लिया है. दोनों नेताओं द्वारा जारी किए गए संयुक्त बयान में कहा गया कि भारत और स्लोवाकिया हर प्रकार के आतंकवाद और उसके सीमा पार विस्तार की कड़ी निंदा करते हैं.

स्लोवाकिया ने भारत के इस रुख का पुरजोर समर्थन किया है कि आतंकवादी नेटवर्क, उनके प्रायोजकों, समर्थकों और उन्हें सुरक्षित पनाहगाह मुहैया कराने वाले देशों या प्रॉक्सी संस्थाओं के खिलाफ दुनिया को एकजुट होकर निर्णायक कार्रवाई करनी होगी. इसके अलावा, दोनों पक्षों ने आतंकी गतिविधियों के वित्तपोषण को रोकने और आतंकवादियों को कानून के दायरे में लाकर जवाबदेह बनाने की प्रतिबद्धता भी व्यक्त की.

10 प्रमुख सेक्टर्स में सहयोग बढ़ाने पर बनी ऐतिहासिक सहमति

स्लोवाकिया औद्योगिक रूप से एक बेहद समृद्ध देश है, विशेष रूप से ऑटोमोबाइल और भारी इंजीनियरिंग के क्षेत्र में उसकी क्षमताएं वैश्विक स्तर की हैं. दोनों देश कुल 10 प्रमुख बुनियादी और उन्नत क्षेत्रों में व्यापक सहयोग और आपसी ज्ञान-साझाकरण बढ़ाने पर सहमत हुए हैं.

  • श्रम आवाजाही (Labour Mobility): दोनों देशों ने कुशल भारतीय पेशेवरों, इंजीनियरों और तकनीकी विशेषज्ञों के स्लोवाकिया में सुचारु प्रवास के लिए एक ‘माइग्रेशन और मोबिलिटी पार्टनरशिप’ समझौते पर हस्ताक्षर किए. इससे स्लोवाकिया की कंपनियों को कुशल जनशक्ति मिलेगी.
  • ऑटोमोटिव मैन्युफैक्चरिंग: स्लोवाकिया प्रति व्यक्ति कार उत्पादन के मामले में दुनिया में शीर्ष पर है. भारतीय और स्लोवाक कंपनियां ईवी (EV) और ऑटो पार्ट्स की सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए सहयोग करेंगी.
  • इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर्स: उन्नत विनिर्माण क्षेत्र के तहत दोनों देशों ने सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम और इलेक्ट्रॉनिक्स कलपुर्जों के विकास में साझा निवेश करने पर सहमति जताई है.
  • रेलवे और बुनियादी ढांचा: स्लोवाकिया की उन्नत रेलवे और इंजीनियरिंग तकनीकों का लाभ भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण में लिया जाएगा.

स्लोवाकिया ने पीएम मोदी को सर्वोच्च अवॉर्ड से सम्मानित किया, जानें किन 33 देशों ने अब तक दिए ग्लोबल पुरस्कार

  • स्वच्छ और हरित ऊर्जा (Clean Energy): जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों को देखते हुए दोनों देश रिन्यूएबल एनर्जी, ग्रीन हाइड्रोजन और पर्यावरण के अनुकूल तकनीकों के विकास में निवेश बढ़ाएंगे.
  • मौसम विज्ञान और जल विज्ञान: दोनों देशों के मौसम विभागों के बीच उन्नत पूर्वानुमान और बाढ़ प्रबंधन जैसी जल विज्ञान प्रणालियों पर तकनीकी डेटा साझा किया जाएगा.
  • स्वास्थ्य सेवा (Healthcare): चिकित्सा अनुसंधान, फार्मास्यूटिकल्स और सस्ती जेनेरिक दवाओं की आपूर्ति में सहयोग को बढ़ावा दिया जाएगा.
  • उच्च शिक्षा और अनुसंधान: शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग के तहत भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली (IIT-Delhi) और ‘स्लोवाक टेक्निकल यूनिवर्सिटी’ के बीच छात्रों की स्कॉलरशिप और अनुसंधान साझेदारी को लेकर एक विशेष समझौता किया गया.
  • अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी (Space Technology): अंतरिक्ष क्षेत्र में उपग्रह डेटा अनुप्रयोगों और शांतिपूर्ण अंतरिक्ष अन्वेषणों में दोनों देशों की स्पेस एजेंसियां मिलकर काम करेंगी.
  • पर्यटन और सीधी हवाई कनेक्टिविटी: दोनों देशों ने बढ़ते आर्थिक और लोगों के बीच आपसी संपर्क को आसान बनाने के लिए भारत और स्लोवाकिया के बीच ‘डायरेक्ट एयर कनेक्टिविटी’ (सीधी उड़ानों) की संभावनाओं को तलाशने को प्रोत्साहित किया है.

मध्य यूरोप के लिए कूटनीतिक सेतु बना स्लोवाकिया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस ऐतिहासिक यात्रा के दूरगामी प्रभाव केवल भारत और स्लोवाकिया तक ही सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि यह पूरे मध्य और पूर्वी यूरोप के साथ भारत की रणनीतिक साझेदारी को एक नया आयाम प्रदान करेगी. सप्लाई चेन की सुरक्षा और एक बहुध्रुवीय नियम आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के निर्माण में स्लोवाकिया ने भारत का हाथ थामकर वैश्विक स्तर पर एक मजबूत संदेश दिया है.

रक्षा सहयोग के मामले में, दोनों नेता रक्षा टेक्नोलॉजी, रिसर्च और डेवलपमेंट, क्षमता निर्माण और रक्षा औद्योगिक सहयोग में आपसी सहयोग को मज़बूत करने पर सहमत हुए. उन्होंने रक्षा सहयोग पर ‘लेटर ऑफ़ इंटेंट’ (इरादे का पत्र) पर हस्ताक्षर किए जाने का स्वागत किया. दोनों पक्ष महत्वपूर्ण सूचना बुनियादी ढांचे की सुरक्षा और साइबर अपराध को रोकने व उसका मुकाबला करने में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमत हुए, साथ ही एक सुरक्षित, सुलभ, स्थिर, इंटरऑपरेबल और मज़बूत डिजिटल स्पेस को बढ़ावा देने पर भी सहमति बनी. नेताओं ने क्रिप्टोग्राफ़ी के लिए उभरते क्वांटम खतरों से सूचना प्रौद्योगिकी प्रणालियों की सुरक्षा में एक-दूसरे का समर्थन करने की अपनी प्रतिबद्धता भी जताई.

पहले टर्म में 49, दूसरे में 27 और तीसरे में इटली से शुरुआत, 12 वर्षों में PM Modi की 100 विदेश यात्राएं

You may also like

LT logo

Feature Posts

Newsletter

@2026 Live Time. All Rights Reserved.

Are you sure want to unlock this post?
Unlock left : 0
Are you sure want to cancel subscription?