Iran US Peace Deal: बीते 15 जून को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐलान किया था कि ईरान के साथ शांति समझौता पर सहमति बन गई है. उन्होंने यह भी बताया था कि 19 जून को दोनों देश स्विट्जरलैंड में इस शांति समझौते पर साइन करेंगे. डील होते ही भारत समेत दुनिया के तमाम देशों के लिए अहम स्ट्रे़ट ऑफ होर्मुज भी खुल जाएगा. इससे तेल, गैस की आवाजाही बिना किसी रोक-टोक के हो सकेगी.
हालांकि, ईरान-अमेरिका शांति समझौते से इजरायल ने खुद को बाहर बताया था. बता दें कि बीते 28 फरवरी को अमेरिका ने इजरायल के साथ मिलकर ही ईरान पर हमला किया था, उसके बाद पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू हुआ था. अब ईरान ने कहा है कि अमेरिका के साथ युद्ध समाप्त करने के समझौते के लिए इजरायल को लेबनान से पीछे हटना होगा. आइए जानते हैं पूरी खबर.
इजरायल को लेबनान से पीछे हटना होगा- ईरान
न्यूज एजेंसी पीटीआई की एक रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के शीर्ष राजनयिक ने मंगलवार को कहा कि अमेरिका के साथ युद्ध समाप्त करने के लिए प्रस्तावित अस्थायी समझौते के तहत इजरायल को लेबनान से पीछे हटना होगा. जानकारी के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच हुए इस समझौते को सार्वजनिक नहीं किया गया है और अधिकारियों ने कभी-कभी इसके अर्थों की विरोधाभासी व्याख्याएं की हैं. हालांकि, इजरायल इस समझौते का पक्षकार नहीं है, लेकिन वह युद्ध का हिस्सा है.
उसने 28 फरवरी को ईरान पर हमले शुरू करने में अमेरिका का साथ दिया था और तब से लेबनान में ईरान समर्थित हिज्बुल्लाह आतंकवादी समूह से लड़ रहा है और उस देश के बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया है.
युद्ध पूरी तरह से समाप्त नहीं हुआ है- अब्बास अराघची
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि दक्षिणी लेबनान पर इजरायल का निरंतर कब्जा समझौते का उल्लंघन होगा. उन्होंने कहा, “इस युद्ध के दौरान इजरायली सेनाओं द्वारा कब्जा किए गए क्षेत्रों से उनकी वापसी के बिना, युद्ध पूरी तरह से समाप्त नहीं हुआ है.”
पीटीआई के मुताबिक, नाम न छापने की शर्त पर समझौते की रूपरेखा पर चर्चा करने वाले एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि इस समझौते में इजरायल की वापसी की कोई बात नहीं कही गई है. वहीं, इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सोमवार को कहा कि इजरायल लेबनान में “जब तक आवश्यक होगा” तब तक रहेगा.
इजरायल कोई कमजोर या अस्थिर देश नहीं- इतामार बेन-ग्विर
सोमवार को इजरायल के नेशनल सिक्योरिटी मिनिस्टर इतामार बेन-ग्विर ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर लिखा, “ट्रंप का समझौता हम पर लागू नहीं होता. इजरायल अमेरिका के अधीन नहीं है और हम एक आजाद और संप्रभु देश हैं!” उन्होंने आगे कहा, “हमारा फर्ज इजरायल के नागरिकों, IDF के सैनिकों और यहूदी लोगों के प्रति है. साथ ही, हजारों सालों के निर्वासन के दौरान सताए गए और मारे गए यहूदियों के प्रति हमारा ऐतिहासिक फर्ज है कि हम इजरायल की धरती पर यहूदियों को सुरक्षा दें.”
नेशनल सिक्योरिटी मिनिस्टर ने बताया, “जब भी हमने इजरायल की सुरक्षा से समझौता करके अंतरराष्ट्रीय दबाव के आगे घुटने टेके, हमें भारी कीमत चुकानी पड़ी.” उन्होंने आगे बताया, “ओस्लो समझौते के समय भी ऐसा ही हुआ, 2006 के लेबनान समझौते में भी यही हुआ और गाजा में हालात को काबू में रखने की हर कोशिश के दौरान भी यही हुआ, जिसका नतीजा बाद में हमारे लिए बहुत बुरा साबित हुआ. हम जोर देकर कहते हैं: हम अमेरिका से प्यार करते हैं और राष्ट्रपति ट्रंप के आभारी हैं. फिर भी, इजरायल कोई कमजोर या अस्थिर देश नहीं है.”
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News Source: PTI
