France Protest: फ्रांस में पिछले कई दिनों से छात्रों का प्रदर्शन जारी है. इस दौरान कई जगहों पर हिंसा और आगजनी की घटनाएं सामने आई हैं. प्रदर्शनकारियों पर ऐतिहासिक इमारतों को आग के हवाले करने और सुरक्षाकर्मियों पर हमला करने के आरोप भी लगे हैं. देश में जारी तनाव के बीच फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा है कि सरकार सोमवार को ठोस कदम उठाने की घोषणा करेगी. सरकार की ओर से ये कदम छात्रों की मांगों को ध्यान में रखते हुए उठाए जा सकते हैं. प्रदर्शनकारी शिक्षा व्यवस्था में बेहतर संसाधन उपलब्ध कराने और पढ़ाई के लिए अनुकूल माहौल बनाने की मांग कर रहे हैं. बता दें कि पिछले कई हफ्तों से छात्र कक्षाओं का बहिष्कार कर रहे हैं और सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं.
जायज मांगों पर ध्यान दिया जाए : मैक्रों
दक्षिणी बंदरगाह शहर में पहुंचे मैक्रों ने कहा कि मैंने सरकार से कह दिया है कि इस विरोध प्रदर्शन की जड़ में मौजूद जायज मांगों पर ध्यान दिया जाए. मालूम हो कि 17 अक्टूबर को इसी शहर में प्रदर्शनकारियों ने सिटी हॉल में घुसकर तोड़फोड़ और लूटपाट की थी. मैक्रों ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री और सरकार में मंत्री ठोस कदमों की घोषणा करेंगे. प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू और सरकार के अन्य अधिकारियों की सोमवार की सुबह हाई स्कूल और यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट के साथ बैठक होनी थी. सितंबर के मध्य से हाई स्कूलों में शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद से छात्रों की शिकायतों को दूर नहीं कर पाने को लेकर मैक्रों सरकार की काफी आलोचना हो रही है.
बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारियां
बताया जा रहा है कि इन विरोध प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारियां हुई हैं. साथ ही पुलिस द्वारा दंगों को नियंत्रित करने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले हथियारों पर भी सवाल खड़े किए गए हैं. इन हथियारों की वजह से युवाओं को गंभीर चोटें भी आई हैं और उनमें से कई अस्पताल में भी भर्ती हैं. 17 अक्टूबर को बढ़ती महंगाई और स्कूलों की खराब हालत के खिलाफ शुरू हुई हिंसक प्रदर्शन अभी भी जारी हैं. इस बीच प्रदर्शनकारियों ने कई जगहों पर आगजनी की और सरकारी इमारतों को आग के हवाले कर दिया. इसके अलावा, कई दुकानों में लूटपाट और पुलिस के साथ भिड़ंत भी हो गई. फ्रांस में पिछले कई सालों में यह सबसे बड़ा अशांति का दौर है.
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4 लाख से ज्यादा प्रदर्शनकारी हुए शामिल
अधिकारियों का कहना है कि इस प्रदर्शन में 400,000 से ज्यादा लोग शामिल हुए, जबकि आयोजकों का दावा है कि यह संख्या 800,000 के आसपास थी. सरकार ‘पारकोर्सअप’ में बदलाव की घोषणा कर सकती है. वहीं, फ्रांस के राष्ट्रीय ऑनलाइन यूनिवर्सिटी एडमिशन प्लेटफॉर्म का भी छात्र विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. उनका कहना है कि इस प्लेटफॉर्म पर सेलेक्शन की प्रक्रिया स्पष्ट नहीं है और यहां पर सभी को समान अवसर नहीं मिलते हैं.
भारी कर्ज से डूब रहा है फ्रांस
छात्रों की स्पष्ट मांग है कि स्कूलों में शिक्षकों की कमी को पूरा करने के लिए और शिक्षकों की भर्ती की जाए. साथ ही स्कूलों की मरम्मत हो, पढ़ाने के घंटों में बदलाव किया जाए और क्लास में छात्रों की संख्या कम की जाए. बता दें कि 8 अक्टूबर को सरकार ने कहा था कि वह संघर्ष कर रहे हाई स्कूलों में 3 हजार अतिरिक्त शिक्षक तैनात करेगी. छात्रों की ओर से यह मांग ऐसे वक्त में उठी है जब फ्रांस रिकॉर्ड गरीबी और भारी सरकारी कर्ज से डूब रहा है.
News Source: ANI
