Home Top News SIR और फॉर्म 6 पर ECI की सुप्रीम कोर्ट में सफाई, कहा- तीनों आदेश सर्वसम्मति से लिए गए

SIR और फॉर्म 6 पर ECI की सुप्रीम कोर्ट में सफाई, कहा- तीनों आदेश सर्वसम्मति से लिए गए

by Sachin Kumar 26 October 2026, 9:48 PM IST (Updated 26 October 2026, 9:49 PM IST)
26 October 2026, 9:48 PM IST (Updated 26 October 2026, 9:49 PM IST)
Election Commission filed affidavit Supreme Court

SIR Row: विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर उठ रहे सवालों के बीच चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में अपना हलफनामा दाखिल किया है. आयोग ने हलफनामे में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर SIR को लेकर अकेले फैसले लेने के आरोपों को सिरे से खारिज किया है. आयोग का कहना है कि SIR से जुड़े सभी फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों ने सर्वसम्मति से लिए हैं. इसके साथ ही चुनाव आयोग ने फॉर्म-6 में किए गए बदलावों को लेकर भी अपनी सफाई दी है. हलफनामे में यह भी कहा गया है कि किसी फाइल पर अधिकारी की टिप्पणी को अंतिम सत्य नहीं माना जा सकता.

सर्वसम्मति से दी थी मंजूरी

ECI ने कोर्ट को बताया कि फॉर्म 6 में कोई संशोधन नहीं किया गया है. 3 SIR आदेशों के जरिए फॉर्म 6 में कोई बदलाव नहीं किया गया है, जैसा कि आरोप लगाया जा रहा है. यह हलफनामा मुख्य निर्वाचन आयुक्त के कामकाज पर सवाल उठाने वाली याचिकाओं के जवाब में दायर किया गया है. निर्वाचन आयोग ने बताया कि उसके द्वारा दायर किए गए जवाबी हलफनामे को मुख्य निर्वाचन आयुक्त और दोनों निर्वाचन आयुक्तों ने सर्वसम्मति से मंजूरी दी थी.

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ECI ने अपने हलफनामे में कही ये बात

  • चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर दावा किया है कि SIR से जुड़े सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे.
  • चुनाव आयोग ने बताया कि ‘विशेष सघन पुनरीक्षण’ (SIR) प्रक्रिया के तहत मतदाता पंजीकरण के लिए ‘फॉर्म 6’ में कोई बदलाव नहीं किया गया है.
  • चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि CEC ज्ञानेश कुमार को काम करने से रोकने की कोई भी याचिका विचार योग्य नहीं है.
  • चुनाव आयोग ने कहा कि हलफनामे को CEC ज्ञानेंद्र कुमार और दो चुनाव आयुक्तों ने सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी है.
  • चुनाव आयोग ने यह भी कहा है कि कानून की नजर में अखबार की रिपोर्ट को सबूत नहीं माना जाता.

ये याचिका सुनवाई योग्य नहीं

चुनाव आयोग ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) के कामकाज पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका सुनवाई योग्य नहीं है. आयोग के अनुसार संविधान के आर्टिकल 324(5) के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त को उसी प्रक्रिया से हटाया जा सकता है, जिससे सुप्रीम कोर्ट के जजों को हटाया जाता है. चुनाव आयोग में तीन सदस्य इसलिए हैं, ताकि मतभेद होने पर बहुमत से फैसला लिया जा सके. आयोग सर्वसम्मति या बहुमत के आधार पर ही फैसला ले सकता है. यही वजह है कि मुख्य चुनाव आयुक्त के कामकाज पर रोक लगाने से आयोग की निर्णय लेने की प्रक्रिया बाधित होगी और यह कानून की व्यवस्था के विपरीत होगा.

आयोग की फाइल में दर्ज किया जाता

किसी भी निर्णय को लेने से पहले अधिकारियों और निर्वाचन आयुक्तों के सुझावों, विचारों और सवालों पर विचार किया जाता है. सभी संबंधित विचारों को ध्यान में रखने के बाद आयोग के सक्षम सदस्य निर्णय लेते हैं और उसके अनुसार आदेश जारी किए जाते हैं. आयोग के फाइल पहले एक निर्वाचन आयुक्त, फिर दूसरे निर्वाचन आयुक्त और अंत में मुख्य निर्वाचन आयुक्त के पास भेजी जाती है. मंजूरी मिलने के बाद निर्णय को आयोग की फाइल में दर्ज किया जाता है और संबंधित आयुक्तों के हस्ताक्षर लिए जाते हैं. इसके बाद निर्वाचन आयोग का सचिवालय उस निर्णय की सूचना जारी करता है और उसे लागू करता है.

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News Source: ANI

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