Gaza War: गाजा में तीन साल से जारी युद्ध पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है. युद्धविराम समझौते के बावजूद वहां से हिंसा की घटनाएं लगातार सामने आती रहती हैं. इजरायली सेना समय-समय पर लोगों को निशाना बनाती है और दावा करती है कि वे हमास से जुड़े थे. वहीं, इजरायल ने स्पष्ट किया है कि जब तक हमास पूरी तरह हथियार नहीं डाल देता है, तब तक उसके खिलाफ सैन्य कार्रवाई जारी रहेगी. इसी बीच वेस्ट बैंक में फिलिस्तीनी परिवारों के घरों की कथित घेराबंदी को लेकर भी तनाव बढ़ गया है. वेस्ट बैंक के एक शहर के बाहरी इलाके में इजरायली बसने वालों ने कथित तौर पर पांच रातों तक तीन फिलिस्तीनी घरों को घेरे रखा. इस दौरान परिवारों को सुरक्षित बाहर निकलने नहीं दिया गया और उनके खाने-पीने का सामान भी खत्म होने लगा. एक परिवार के मुताबिक, घर का पानी और बिजली की आपूर्ति को रोक दिया गया है. इस घटना को लेकर अमेरिका ने भी चिंता जताई है.
अमेरिकी राजदूत माइक हकाबी ने कथित तौर पर इन बसने वालों को ‘आतंकवादी’ बताया. यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि अमेरिकी अधिकारी आमतौर पर इस शब्द का इस्तेमाल फिलिस्तीनी उग्रवादी समूहों के लिए करते रहे हैं. ऐसे में अमेरिकी प्रशासन की ओर से बसने वालों इजरायलियों की आलोचना को असामान्य माना जा रहा है. साथ ही अमेरिका की इस आलोचना से प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के लिए राजनीतिक चुनौती बन सकती है. नेतन्याहू एक ओर देश के अति-राष्ट्रवादी मतदाताओं को अपने साथ बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं. वहीं, दूसरी ओर इजरायल के सबसे करीबी सहयोगी अमेरिका के साथ संबंधों को भी मजबूत बनाए रखना उनके लिए महत्वपूर्ण है.

घरों के बंद कर दिए गए दरवाजे
वहीं, रविवार को दर्जनों इजरायली सेटलर कुसरा गांव में घरों के पास पहुंचे और कथित तौर पर उनके दरवाजे बंद कर दिए. घर के मालिक लुई रिडी ने बताया कि इजरायली सेना ने कई बार हस्तक्षेप किया है, लेकिन सेटलर बार-बार वापस आ जाते हैं. मानवाधिकार संगठनों ने लंबे समय से इजरायली सेना पर सेटलर हिंसा की अनदेखी करने या उन्हें सुरक्षा मुहैया कराने के लिए हस्तक्षेप करने के आरोप लगाए हैं. रिडी ने कहा कि यह एक चक्र है. उन्हें पूरे इलाके से दूर रखना जरूरी है, न कि सिर्फ हटाकर 100 फीट दूर करना. इजरायली सेना ने इस घेराबंदी की निंदा करते हुए इसे गैरकानूनी, निंदनीय और अस्वीकार्य बताया. सेना ने कुसरा को ‘बंद सैन्य क्षेत्र’ भी घोषित कर दिया. गांव के निवासियों द्वारा बनाए गए वीडियो के मुताबिक, अगले दिन दर्जनों सेटलर फिर इलाके में लौट आए. उन्होंने पत्थरों से सड़क को अवरुद्ध करने की कोशिश की और इजरायली सैनिकों के साथ उनका टकराव भी हुआ. गुरुवार को इजरायली सेना ने कहा कि उसके सैनिकों ने कुसरा और पास के एक गांव में बनाई गई दो गैरकानूनी चौकियों को हटा दिया और एक इजरायली व्यक्ति को हिरासत में लिया. सेना के मुताबिक, इलाके में सुरक्षा और गश्त के लिए अतिरिक्त सैनिकों को तैनात किया गया था. कुसरा के मेयर अब्देल अजीम वादी ने दावा किया कि इजरायली सेना ने गांव में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए एक दर्जन से अधिक घरों को खाली करवाया. उन्होंने कहा कि सेटलरों को उनकी चौकियों से तो हटा दिया गया, लेकिन वे अभी भी गांव के अन्य हिस्सों में मौजूद हैं.

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किसी एक जाने के लिए 30 मिनट का समय दिया
अबू रिडा ने बताया कि सैनिकों ने सभी घरों में रहने वालों को घर खाली करने और घेरे गए घरों में से किसी एक में जाने के लिए 30 मिनट का समय दिया गया. उन्होंने बताया कि सेना ने कहा है कि सैनिकों को निर्देश दिया गया है कि वे परिवारों को उनके घरों में रहने दें और घरों के अंदर कोई कार्रवाई न करें, लेकिन परिवार अभी तक वापस नहीं लौटे हैं. अभी यह साफ नहीं है कि घेरे गए इलाके में रहने वाले परिवारों को जरूरी सामान कब मिल पाएगा इसके बारे में खुलकर नहीं बताया गया है. इजरायली सेना ने कहा है कि बुधवार को जब उन्होंने परिवारों का हाल जाना, तो उनके पास खाना और पानी जैसी बुनियादी चीजें मौजूद थीं. लेकिन रिडी ने गुरुवार को बताया कि पानी और बिजली की लाइनें दोबारा जोड़ने के बाद सेटलर ने उन्हें फिर से काट दिया. इजरायल के इतिहास की सबसे ज़्यादा कट्टर राष्ट्रवादी और धार्मिक सरकार, नेतन्याहू सरकार के कार्यकाल में वेस्ट बैंक में बस्तियां बसाने का काम तेजी से बढ़ा है. यह सरकार वेस्ट बैंक को यहूदी लोगों की बाइबिल और ऐतिहासिक मातृभूमि मानती है और फिलिस्तीनी राज्य बनाने के खिलाफ खुलकर अपनी आवाज बुलंद करती है.
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निर्माण और जायोनीवाद का दौर शुरू हुआ
नेतन्याहू की कैबिनेट के सदस्य वेस्ट बैंक में एक ऐसी बस्ती को फिर से बसाने के जश्न में शामिल हुए जिसे 2005 में हटा दिया गया था. रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने कहा कि पीछे हटने और लोगों को बेदखल करने का दौर खत्म हो गया है. अब निर्माण और जायोनीवाद का दौर शुरू हो रहा है. ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान उन्होंने इन बस्तियों को बड़े पैमाने पर स्वीकार करने का संकेत दिया था, जिन्हें ज्यादातर अंतरराष्ट्रीय समुदाय अवैध और शांति में बाधा मानता है. अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में हिंसा के आरोपी बसने वालों पर बाइडेन प्रशासन द्वारा लगाए गए प्रतिबंध हटा दिए. वहीं, हकाबी लंबे समय से इन बस्तियों के समर्थक रहे हैं और उन्होंने बढ़ती हुई हिंसा की निंदा की है. कुसरा की घटनाओं के बारे में अपनी पोस्ट में हकाबी ने कहा कि जिन लोगों ने इस परिवार को डराने और परेशान करने के लिए आतंक का यह भयानक काम किया, उनकी हरकतें घिनौनी हैं. उन्होंने कहा कि दूतावास इजरायली सेना और पुलिस के साथ मिलकर काम कर रहा है. संयुक्त राष्ट्र के मानवीय मामलों के कार्यालय ने अप्रैल में कहा था कि उसने वेस्ट बैंक के किसी भी दूसरे इलाके की तुलना में कुसरा में बसने वालों पर ज्यादा हमले दर्ज किए हैं.

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गोली मारकर कर दी गई हत्या
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, मार्च में ड्यूटी पर न होने वाले एक इजरायली रिजर्व सैनिक ने 25 साल के एक स्थानीय निवासी की गोली मारकर हत्या कर दी थी और इन हमलों में आठ अन्य लोग घायल हुए थे. पिछले महीने उत्तरी वेस्ट बैंक के पास के एक गांव में बसने वालों लोगों और फिलिस्तीनियों के बीच हुई हिंसा में दो इजरायली और चार फिलिस्तीनी मारे गए थे. इसके बाद कुसरा में एक मस्जिद में आग लगा दी गई और उसकी दीवार पर हिब्रू भाषा में बदला शब्द लिखा गया. फिलिस्तीनी अथॉरिटी के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इस साल इजरायली बसने वालों और सैनिकों के हाथों कुल 87 फिलिस्तीनी मारे गए हैं. इजरायल का कहना है कि उनमें से कुछ लोग आतंकवादी थे. वह आतंकवाद को व्यापक रूप से परिभाषित करता है, जिसमें चरमपंथी हमले और पत्थर फेंकना भी शामिल है. साथ ही संघर्ष में मौतों का रिकॉर्ड रखते समय फिलिस्तीनी अधिकारी चरमपंथियों और आम नागरिकों के बीच कोई फर्क नहीं करते हैं. फिलिस्तीनी अधिकारियों ने 2026 में बसने वालों इजरायली द्वारा 1,476 हमले किए जाने की रिपोर्ट दी है. इनमें कई ऐसे मामले शामिल हैं, जिनमें बसने वालों ने फिलिस्तीनियों के घरों और संपत्तियों पर कब्जा कर लिया.

वेस्ट बैंक में रहते हैं 28 लाख फिलिस्तीनी
सेना का कहना है कि वह इलाके में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए काम करती है. हमले करने को लेकर इजरायली कैबिनेट मंत्रियों ने इन हमलों के लिए कानून के दायरे से बाहर काम करने वाले युवा चरमपंथियों के एक छोटे समूह को जिम्मेदार ठहराया है. वेस्ट बैंक में इज़राइली सैन्य शासन के तहत लगभग 28 लाख फ़िलिस्तीनी रहते हैं और आबादी वाले इलाकों में फिलिस्तीनी अथॉरिटी को सीमित स्वायत्तता मिली हुई है. अब वेस्ट बैंक में बसने वाले इजरालियों की संख्या 5,60,000 के पार हो गई है. एक दशक से भी ज्यादा समय से इजरायल और फिलिस्तीन के बीच कोई शांति वार्ता नहीं हुई है. कुसरा के मेयर वादी ने कहा कि यह ऐसी जिंदगी नहीं है जो इसी तरह चलती रह सकती है. बहुत ज्यादा दबाव से आखिरकार विस्फोट होता है.
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