Hamas: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाले ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की मध्यस्थता में हमास और गाजा के अन्य सशस्त्र समूह अपने हथियार डालने और पूर्ण निरस्त्रीकरण के लिए राजी हो गए हैं.
हमास की मजबूरी
लगातार जारी इजरायली हमलों, भीषण तबाही और भुखमरी के बीच हमास के वार्ताकार गाजी हमाद ने माना कि यह समझौता उन्होंने गाजा के लोगों को और अधिक मौतों व विस्थापन से बचाने के लिए किया है. इस बड़े समझौते के पीछे हमास की मुख्य मजबूरी युद्ध से पूरी तरह पस्त हो चुकी गाजा की स्थिति और अंतरराष्ट्रीय दबाव है.
इजरायल का पक्ष न होना
यह समझौता सीधे इजरायल और हमास के बीच नहीं, बल्कि अमेरिका समर्थित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ और मध्यस्थ देशों (मिस्र, कतर, तुर्की) द्वारा हमास के साथ तैयार किया गया है. इजरायल इस समझौते का सीधा पक्ष इसलिए नहीं बना क्योंकि वह हमास को एक आतंकी संगठन मानता है और उससे सीधे डील नहीं करता. इजरायल को हमास पर गहरा शक है क्योंकि हमास ने शर्त रखी है कि जब तक इजरायली सेना गाजा पट्टी से पूरी तरह पीछे नहीं हटती, वह हथियारों की सूची नहीं सौंपेगा. वहीं, इजरायल का रुख कड़ा है कि जब तक हमास पूरी तरह निशस्त्र नहीं हो जाता और सुरंगें नष्ट नहीं होतीं, इजरायली सेना गाजा की ‘येलो लाइन’ (सैन्य नियंत्रण सीमा) से पीछे नहीं हटेगी. इस आपसी अविश्वास के कारण इजरायल को अंदेशा है कि हमास जमीन पर वादा पूरा नहीं करेगा.

मिडिल ईस्ट में आएगी शांति
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल में गाजा युद्ध को पूरी तरह खत्म करने और इजरायल को दीर्घकालिक सुरक्षा देने के अपने ’20 प्वाइंट पीस प्लान’ के तहत यह पहल की है. वे गाजा में हमास को हटाकर एक नई गैर-राजनीतिक फिलिस्तीनी सरकार (NCAG) और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा बल की स्थापना करना चाहते हैं, जिससे मिडिल ईस्ट में ऐतिहासिक शांति स्थापित हो सके.
समझौते से युद्ध खत्म करने में मदद
इज़राइल के लगातार हमले के बीच हमास ने कहा है कि उसने हथियार छोड़ने पर समझौता कर लिया है. लेकिन इसमें कई रुकावटें आ सकती हैं और इसे पूरा होने में लंबा समय लग सकता है या शायद यह कभी पूरा ही न हो पाए. शुक्रवार को अधिकारियों ने ‘द एसोसिएटेड प्रेस’ को बताया कि हमास हथियार छोड़ने के समझौते पर सहमत हो गया है.
यह एक अहम कदम है जिससे गाज़ा में युद्ध खत्म करने में मदद मिल सकती है लेकिन इसमें कई रुकावटें आ सकती हैं और इसे पूरा होने में लंबा समय लग सकता है. हमास के एक अधिकारी के मुताबिक, यह ग्रुप एक रोडमैप पर सहमत हुआ है, बशर्ते इज़राइल भी कुछ रियायतें दे, जैसे कि लड़ाई बंद करना और फिलिस्तीनी इलाके से अपनी सेना हटाना. इज़राइल ने इस समझौते पर कोई टिप्पणी नहीं की है, जिसका ऐलान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कुछ घंटे पहले किया था.
अमेरिका की मध्यस्थता में हुआ समझौता
यह समझौता इज़राइल और हमास के बीच लड़ाई खत्म करने के लिए अमेरिका की मध्यस्थता में हुए संघर्ष-विराम समझौते के नौ महीने बाद हुआ है. उस 20 सूत्रीय संघर्ष विराम योजना में मिलिटेंट ग्रुप से अपने हथियार सौंपने और सुरंगों के अपने बड़े नेटवर्क को नष्ट करने को कहा गया है. इसमें गाज़ा से इज़राइली सेना की वापसी, एक नई टेक्नोक्रैटिक फिलिस्तीनी सरकार का गठन, ‘इंटरनेशनल स्टेबिलाइज़ेशन फोर्स’ नाम की सुरक्षा फोर्स की तैनाती और बुरी तरह प्रभावित फिलिस्तीनी इलाके के पुनर्निर्माण की भी बात कही गई है.
लेकिन संघर्ष विराम समझौते के अगले चरण को लागू करने को लेकर इज़राइल और हमास के बीच बातचीत काफी हद तक ठप हो गई थी. हथियार छोड़ने का मुद्दा इसमें सबसे बड़ी अड़चन थी. हथियार छोड़ना हमास के लिए एक बहुत बड़ा बदलाव होगा, क्योंकि उसके संस्थापक चार्टर में इज़राइल के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष की बात कही गई है. हमास अपने हथियारों के जखीरे जिसमें रॉकेट, एंटी-टैंक मिसाइल और विस्फोटक शामिल हैं , को अपनी पहचान का अहम हिस्सा मानता है.

नई फिलिस्तीनी पुलिस फोर्स करेगी रक्षा
ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा कि यह समझौता सोच-समझकर तय किए गए चरणों में लागू किया जाएगा. जैसे-जैसे हथियार हटाने की प्रक्रिया पूरी होगी, इज़राइली सेना पीछे हटेगी और ‘इंटरनेशनल स्टेबलाइज़ेशन फ़ोर्स’ (ISF) एक नई फ़िलिस्तीनी पुलिस फ़ोर्स के साथ मिलकर गाज़ा के निवासियों और पड़ोसियों के लिए सुरक्षित रखने की ज़िम्मेदारी संभालेगी.
‘द एसोसिएटेड प्रेस’ को मिले समझौते के दस्तावेज़ के अनुसार, पुलिस के सभी हथियार अमेरिका समर्थित फ़िलिस्तीनी टेक्नोक्रैटिक कमेटी (जिसे ‘गाज़ा प्रशासन के लिए राष्ट्रीय समिति’ के नाम से जाना जाता है) को सौंप दिए जाएंगे, जब वह इलाक़े में पहुंचेगी. फ़िलिस्तीनी समिति के आने और ISF की तैनाती के बाद भारी हथियारों, सैन्य उत्पादन स्थलों और सुरंगों को हटाने और उन्हें सुरक्षित रखने की प्रक्रिया शुरू होगी. समझौते के अनुसार, यह प्रक्रिया गाज़ा में इज़राइल के नियंत्रण वाले इलाकों से उसके चरणबद्ध तरीके से पीछे हटने पर निर्भर करेगा.
इन शर्तों पर ही इजराइली सेना हटेगी पीछे
एक इज़राइली अधिकारी ने गुरुवार को एक बयान में कहा कि गाज़ा में इज़राइल के कब्ज़े वाले इलाकों (जो कुल इलाके का लगभग 60 प्रतिशत हैं) से तब तक कोई इज़राइली सेना पीछे नहीं हटेगी, जब तक कि चरमपंथी समूह के हथियार नहीं हटा दिए जाते और उस पट्टी को सैन्य-मुक्त नहीं कर दिया जाता. सरकारी प्रोटोकॉल के तहत नाम न बताने की शर्त पर यह बयान दिया गया.
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हालात की जानकारी रखने वाले एक अधिकारी ने बताया कि इज़राइल इसमें पूरी तरह शामिल है, लेकिन वह इस समझौते पर हस्ताक्षर करने वाला पक्ष नहीं है. यह समझौता हमास और उन कई देशों के बीच है, जो युद्धविराम पर बातचीत करने और उसकी गारंटी देने में मदद कर रहे हैं. समझौते पर चर्चा करने के लिए उस अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर बात की. इस समझौते के गारंटर अमेरिका, तुर्की, मिस्र और कतर हैं.
हथियार सौंपने में लग सकते हैं कई साल
व्हाइट हाउस के नियमों के तहत गुरुवार को नाम न बताने की शर्त पर पत्रकारों को डील के बारे में बताते हुए अमेरिका और ‘बोर्ड ऑफ़ पीस’ के अधिकारियों ने इस समझौते को लेकर बहुत उम्मीद जताई. उन्होंने जो स्थिति बताई, वह वैसी ही थी जैसी ट्रंप और उनके करीबी सहयोगियों ने ‘बोर्ड ऑफ़ पीस’ के गठन के समय बताई थी. ट्रंप द्वारा बनाए गए इस बोर्ड का काम गाज़ा में सीज़फायर (युद्धविराम) की निगरानी करना है.
अधिकारियों के अनुसार, हालांकि गाज़ा पुलिस फ़ोर्स से अपने हथियार सौंपने की उम्मीद है, लेकिन इसमें हमास के ज़्यादातर लड़ाके शामिल नहीं हैं और समझौते के इस हिस्से में भारी हथियार भी शामिल नहीं है. इसके बजाय, ‘बोर्ड ऑफ़ पीस’ के एक अधिकारी ने कहा कि भारी हथियारों को सौंपने और हमास की सुरंगों व अन्य बुनियादी ढांचे को हटाने का काम बाद में होगा, जिसमें 200 से 350 दिन लग सकते हैं.

इस प्रक्रिया में शामिल हमास के क्षेत्रीय अधिकारी ने बताया कि हमास और अन्य समूह फ़िलिस्तीनी टेक्नोक्रैटिक कमेटी की देखरेख में गाज़ा के अंदर हथियार इकट्ठा करने और रखने पर सहमत हुए हैं. कहा कि हथियार इज़राइल या ग़ैर-फ़िलिस्तीनी पक्षों को नहीं सौंपे जाएंगे. नाम न बताने की शर्त पर बात करने वाले अधिकारियों ने कहा कि यह एक धीरे-धीरे चलने वाली प्रक्रिया होगी जो इज़राइल के पीछे हटने पर निर्भर करेगा.
इजराइल को शक
अमेरिका के एक अधिकारी ने बताया कि बातचीत के हर चरण में इज़राइल से सलाह ली गई थी. इज़राइल को इस बात पर काफ़ी शक था कि हमास अपने हथियार छोड़ने या गाज़ा से अपना कंट्रोल हटाने के लिए तैयार होगा या नहीं. हालांकि, अधिकारी ने कहा कि इज़राइल से उससे ज़्यादा कुछ करने के लिए नहीं कहा जा रहा था, जितना उसने शुरू में ट्रंप के 20-सूत्रीय प्लान पर सहमत होते समय वादा किया था.
इस प्लान में मुख्य रूप से गाज़ा से अपनी सेना हटाना और उस इलाके में हवाई हमले बंद करने का वादा शामिल है. फ़िलिस्तीनी टेक्नोक्रैटिक कमेटी के एक सदस्य ने शुक्रवार को AP को बताया कि वे गाज़ा में जाने के लिए उत्सुक हैं, लेकिन उन्हें चिंता है कि इज़राइल उनके लिए मुश्किलें खड़ी करेगा. उस व्यक्ति ने नाम न बताने की शर्त पर बात की क्योंकि उन्हें मीडिया से बात करने की इजाज़त नहीं थी. उस व्यक्ति ने कहा कि उन्हें कम से कम दो महीने तक गाज़ा में घुसने की उम्मीद नहीं है.
अब तक 1,200 लोग मारे गए
कमेटी ने शुक्रवार को हुई प्रगति का स्वागत किया, लेकिन कहा कि सरकारी संस्थानों व सेवाओं को बहाल करने और इलाके को फिर से बनाने का काम बहुत बड़ा होगा. गाज़ा में युद्ध 7 अक्टूबर, 2023 को दक्षिणी इज़राइल पर हमास के हमले के बाद शुरू हुआ, जिसमें लगभग 1,200 लोग मारे गए और 251 लोगों को बंधक बना लिया गया. गाज़ा के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, गाज़ा में इज़राइल के जवाबी हमले में 73,000 से ज़्यादा फ़िलिस्तीनी मारे गए हैं, जिनमें युद्धविराम के बाद मारे गए लोग भी शामिल हैं.

यह मंत्रालय हमास के नेतृत्व वाली सरकार का हिस्सा है और इसमें मेडिकल प्रोफ़ेशनल काम करते हैं. यह मंत्रालय मरने वालों की संख्या में आम नागरिकों और उग्रवादियों के बीच कोई फ़र्क नहीं करता है, लेकिन कहता है कि मरने वालों में लगभग आधे महिलाएं और बच्चे हैं. गाज़ा के ज़्यादातर हिस्से पर इज़राइल का कंट्रोल होने के कारण फ़िलिस्तीनी खराब हालत वाले टेंट कैंपों और बुरी तरह क्षतिग्रस्त शहरी इलाकों में रहने को मजबूर हैं.
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