Ujjain Violence: महाकाल की पवित्र नगरी उज्जैन, जो हमेशा अपनी शांति और आस्था के लिए जानी जाती है, अचानक उपद्रव और तनाव की लपटों में घिर गई. लेकिन इस पूरे विवाद और पथराव के पीछे असली विलेन कौन था, जवाब है- सोशल मीडिया… जी हां सात दिनों की डिजिटल प्लानिंग, भड़काऊ रील्स और एक अपील ने शहर का माहौल तनावपूर्ण कर दिया है. जानें आखिर कैसे डिजिटल स्क्रीन से शुरू हुई चिंगारी सड़क पर पथराव तक पहुंची.
सोशल मीडिया पर बना हिंसा का प्लान
बता दें उज्जैन में छत्री चौक स्थित शाही मस्जिद पर कार्रवाई से पहले ही सोशल मीडिया को हथियार बना लिया गया था. एक-दो दिन नहीं, बल्कि पूरे एक हफ्ते तक मुस्लिम समाज से जुड़े कई कंटेंट क्रिएटर्स और इन्फ्लुएंसर्स ने लगातार उकसाने वाले वीडियो और पोस्ट शेयर किए.
जेसीबी आ गई, जल्दी पहुंचो: इंस्टाग्राम पर साजिद खान नाम के युवक ने रील अपलोड की और अफवाह फैलाई कि पुलिस जेसीबी लेकर आ गई है, सब तुरंत मस्जिद पहुंचें.
भड़काऊ पोस्ट्स: इमरान खान और आरिफ पठान जैसे यूजर्स ने लिखा- ज्यादा से ज्यादा तादाद में छत्री चौक पर शिरकत करो, रात 2 बजे पहुंचो.
बाहरी लोगों की एंट्री: एआईएमआईएम प्रमुख ओवैसी का वीडियो भी वायरल कराया गया, जिसके बाद दूसरे शहरों से भी लोग शहर की फिजा बिगाडने उज्जैन पहुंच गए.
डिजिटल उकसावे का अंजाम
सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के लिए मार्ग में आ रहे शाही मस्जिद के एक हिस्से हटाया जाना था. इसके विरोध में पहले से किए गए भड़काऊ पोस्ट का अंजाम यह हुआ कि जब रविवार शाम को प्रशासन की टीम बुल्डोजर लेकर पहंची तो, वहां मुस्लिम समाज के लोगों ने भीड़ इकट्ठा कर ली. भीड़ ने पुलिस पर पत्थरबाजी की, जिससे स्थिति तनावपूर्ण हो गई. पुलिस को भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े. सुबह मस्जिद कमेटी के लोगों और प्रशासन में बातचीत के बाद सहमति बनी. कुछ देर तक प्रशासन ने मस्जिद को हटाने का काम शांति से किया, लेकिन बाद में फिर हिंसा शुरू हो गई.
कुछ लोगों ने फिर से प्रशासन के काम में रुकावट डाली और पत्थरबाजी शुरू कर दी. जिसके बाद हालात और खराब हो गए. मौके पर भारी पुलिस फोर्स को तैनात किया और शाम को हालात पर काबू पाया गया. पुलिस ने कार्रवाई करते हुए कई आरोपियों को गिरफ्तार किया. देवास रोड से 5 ऐसे बाहरी युवकों को पकड़ा गया जो शहर में दंगा भड़काने की साजिश से आए थे.
5 इन्फ्लुएंसर्स समेत 20 पर केस दर्ज
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है. पुलिस ने पूरे घटनाक्रम में 8 एफआईआर दर्ज की गई हैं, जिनमें से 5 एफआईआर सिर्फ अफवाह और नफरत फैलाने वाले सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर्स के खिलाफ बीएनएस की धाराओं में दर्ज हुई हैं. पुलिस के मुताबिक, 20 लोग नामजद हैं. इधर धर्मगुरुओं और प्रशासन के बीच बातचीत के बाद तय हुआ है कि नुमाइंदा कमेटी खुद ही मस्जिद का चिन्हित हिस्सा हटाएगी. नतीजा साफ है, सोशल मीडिया का गलत इस्तेमाल और रील्स का नशा आज कानून की सलाखों के पीछे पहुंचा चुका है.
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