Meta Apology: फेसबुक से मोदी का वीडियो हटाने पर भारत सरकार ने सख्त रुख अपनाया है. सरकार ने जुकरबर्ग से बिना शर्त माफी मांगने की बात कही है. संसदीय समिति ने बुधवार को फेसबुक से PM मोदी का वीडियो हटाने पर मेटा प्रमुख मार्क जुकरबर्ग को तीन दिन में बिना शर्त माफी मांगने का अल्टीमेटम दिया है. ऐसा न करने पर मेटा की कानूनी छूट छीनने की चेतावनी दी गई है. लोकसभा सचिवालय ने आईटी मंत्रालय को पत्र लिखकर इस मामले को बेहद गंभीर बताया है. दरअसल, फेसबुक ने पीएम मोदी का वह वीडियो करीब 5-6 घंटे के लिए हटा दिया था, जिसमें उन्होंने ‘जेन ज़ेड’ छात्रों को पेपर लीक पर सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया था.
कानूनी छूट छिनने का खतरा
ए. ज्योतिर्मयी के हस्ताक्षर वाले पत्र में कहा गया है कि विचार-विमर्श के दौरान समिति ने इस मुद्दे पर मेटा प्रमुख मार्क जुकरबर्ग से माफ़ी की मांग की है. अगर वह यह पत्र मिलने के 3 दिनों के भीतर बिना शर्त माफ़ी नहीं मांगते हैं, तो IT एक्ट की धारा 79(3) के तहत मिली सुरक्षा व छूट वापस ली जा सकती है और एक पब्लिशर के तौर पर उनके खिलाफ़ कार्रवाई की जा सकती है. सूचना प्रौद्योगिकी पर संसदीय स्थायी समिति ने उन इंटरमीडियरी प्लेटफॉर्म्स (मध्यस्थ प्लेटफॉर्म) के खिलाफ़ भी कार्रवाई की मांग की जो बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री (CASM) और महिलाओं के खिलाफ़ अपमानजनक सामग्री दिखाते हैं. पत्र में कहा गया है कि अगर इंटरमीडियरी प्लेटफॉर्म अपने पोर्टल्स से CASM सामग्री हटाने में नाकाम रहते हैं, तो IT एक्ट की धारा 79(3) के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए.
Google इंडिया के खिलाफ भी हो कार्रवाई
पत्र में कहा गया है कि समिति ने हैदराबाद साइबर पुलिस द्वारा Google इंडिया के हेड के खिलाफ साइबर फ्रॉड करने वालों के साथ सह-आरोपी के तौर पर की गई कार्रवाई पर भी चर्चा की. यह कार्रवाई तब की गई जब शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया कि उन्होंने फ्रॉड ऐप्स के जरिए निवेश करके 48 लाख रुपये से ज़्यादा गंवा दिए. समिति चाहती है कि भारत सरकार भी Google इंडिया के खिलाफ इसी तरह की कार्रवाई करे. यह पत्र समिति की उस बैठक के दो दिन बाद आया है जिसमें गृह मंत्रालय, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के प्रतिनिधियों के साथ-साथ स्नैपचैट, Google, X, मेटा (Facebook, WhatsApp और Instagram) और YouTube जैसे प्लेटफॉर्म के प्रतिनिधियों के साथ ‘सोशल और डिजिटल प्लेटफॉर्म और उनके रेगुलेशन’ पर चर्चा हुई थी.
फेसबुक पर भड़की संसदीय समिति
पैनल के चेयरमैन निशिकांत दुबे ने कहा कि यह पहली बार नहीं है जब मेटा ने कोई वीडियो हटाया है. उन्होंने आरोप लगाया कि 2024 में मार्क जुकरबर्ग ने संसदीय चुनाव के नतीजों पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी. उनकी सोच देश को अस्थिर करने की है. उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म गृह मंत्रालय और IT मंत्रालय के निर्देशों को नहीं मानते हैं. दुबे ने कहा कि प्रधानमंत्री की आधिकारिक Facebook पोस्ट को कुछ समय के लिए हटाना एक गंभीर मामला है और समिति यह जानना चाहती है कि ऐसा क्यों किया गया. समिति ने धोखाधड़ी वाले ऐप्स के ज़रिए निवेशकों के 48 लाख रुपये से ज़्यादा गंवाने के मामले में गूगल इंडिया के प्रमुख के खिलाफ़ भारत सरकार से कार्रवाई की भी मांग की.
प्रधानमंत्री की छवि खराब करने की कोशिशः निशिकांत
उन्होंने कहा कि या तो सिस्टम में कोई बड़ी गड़बड़ी है या फिर मेटा और इंस्टाग्राम की तरफ से हमारे देश के प्रधानमंत्री की छवि खराब करने की जानबूझकर कोशिश की गई है. अगर मेटा प्रधानमंत्री की आधिकारिक पोस्ट के साथ ऐसा व्यवहार करता है, तो हमारे देश के आम आदमी की पोस्ट का क्या हाल होगा? ऐसी गड़बड़ी को सिर्फ़ एक तकनीकी खराबी कहकर नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता. अमेरिका में मुख्यालय वाली इस बड़ी सोशल मीडिया कंपनी ने इस घटना के लिए तकनीकी खराबी को ज़िम्मेदार ठहराया है और माफ़ी मांगी है. इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को यह स्पष्टीकरण नाकाफ़ी लगा. कंपनी ने कहा कि कंटेंट गलती से हटा दिया गया था और उसे प्लेटफ़ॉर्म पर वापस बहाल कर दिया गया.
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News Source: PTI
