Russia-Ukraine War: चार वर्षों से ज्यादा समय से जारी रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है. दोनों देशों के बीच संघर्ष हर एक दिन खतरनाक मोड़ लेता जा रहा है. एक तरफ रूस यूक्रेन को असैन्य करने की कोशिश कर रहा है, तो वहीं कीव रूस के ऊर्जा क्षेत्र को निशाना बनाकर उसकी अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान पहुंचाने की रणनीति पर लगातार काम कर रहा है. साथ ही यूक्रेन इस रणनीति में कुछ हद तक कामयाब भी रहा है. उसने रूस के अलग-अलग हिस्सों में स्थित तेल रिफाइनरियों को निशाना बनाकर वहां ईंधन आपूर्ति पर दबाव बढ़ाया है. सोशल मीडिया पर कई वीडियो सामने आए हैं, जिनमें साफ देखा जा सकता है कि पेट्रोल पंपों पर लंबी-लंबी कतारें लग रही हैं. इन हालात के पीछे ईंधन की सीमित आपूर्ति को एक प्रमुख वजह बताया गया था. इसी कड़ी में यूक्रेन के ड्रोन ने रूस-यूक्रेन सीमा से करीब 800 मील दूर स्थित एक विशाल तेल रिफाइनरी को निशाना बनाया. हमले के बाद रिफाइनरी में भीषण आग लग गई. यूक्रेनी सैन्य अधिकारियों ने गुरुवार को बताया कि ड्रोन ने रूस के अंदर स्थित एक प्रमुख रिफाइनरी पर हमला किया. यह तीन दिनों के भीतर रूस के तेल क्षेत्र को निशाना बनाकर किया गया यूक्रेन का चौथा भीषण हमला था. बता दें कि रूस दुनिया के सबसे बड़े ऊर्जा उत्पादकों में से एक है और तेल उसके सरकारी राजस्व का एक महत्वपूर्ण आधार है. ऐसे में तेल रिफाइनरियों और ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर यूक्रेनी हमले रूस के लिए आर्थिक और रणनीतिक चुनौती बढ़ा सकते हैं.
देश की सबसे बड़ी रिफाइनरी पर हमला
वहीं, बड़े पैमाने पर हमला शुरू किए जाने के चार साल बाद भी रूसी सेना धीमी गति से और भारी नुकसान उठाते हुए यूक्रेन की धरती को कब्जाने के लिए लगातार आगे बढ़ रही है. हालांकि, यूक्रेन की ओर से किए गए इन हमलों से रूस की रिफाइनिंग क्षमता पर असर पड़ा है और गैस स्टेशनों पर ईंधन की कमी हो गई है. कीव के अधिकारियों का कहना है कि इन हमलों का मकसद रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को शांति समझौते के लिए मजबूर करना है. हालांकि, इस रणनीति के काम करने का कोई संकेत नहीं दिख रहा है. यूक्रेन के जनरल स्टाफ ने बताया कि उसकी सेना ने रात के समय रूस के बशकोर्तोस्तान गणराज्य में ‘गज़प्रोम नेफ़्टेखिम सलावत’ तेल रिफाइनिंग और पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स पर हमला किया. इसके बाद वहां पर भीषण आग लग गई. जनरल स्टाफ ने बताया कि यह कॉम्प्लेक्स मॉस्को के दक्षिण-पूर्व में और यूक्रेन की सीमा से लगभग 1,300 किलोमीटर दूर स्थित है. साथ ही यह रूस की सबसे बड़ी तेल रिफाइनिंग और पेट्रोकेमिकल सुविधाओं में से एक है. उन्होंने बताया कि इस प्लांट में सालाना 74 मिलियन बैरल तक तेल प्रोसेस किया जाता है. इससे गैसोलीन, डीजल ईंधन व अन्य उत्पाद बनाए जाते हैं.

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इंडस्ट्रियल जोन में लगी भीषण आग
हमले को लेकर रूस के बशकोर्तोस्तान के गवर्नर रादी खाबिरोव ने बताया कि एक ड्रोन हमले में दो आम नागरिक घायल हो गए और सलावत के इंडस्ट्रियल जोन में आग लग गई. रूस के सबसे बड़े ऑनलाइन रिटेलर ‘वाइल्डबेरीज’ पर यूक्रेनी ड्रोन कई बार हमले कर चुके हैं. इस पर रादी खाबिरोव ने कहा कि रात में हुए हमले के बाद सलावत इंडस्ट्रियल जोन में उसकी एक फैसिलिटी में आग लग गई. कंपनी ने कहा कि फैसिलिटी को खाली करा लिया गया था, लेकिन वहां कोई सामान नहीं रखा हुआ था. वहीं, दूसरी ओर सेवस्तोपोल में गुरुवार को एक अज्ञात यूक्रेनी हथियार के फटने से रूस के इमरजेंसी मिनिस्ट्री के चार विस्फोटक विशेषज्ञ और एक सुरक्षा गार्ड की मौत हो गई. यह जानकारी सेवस्तोपोल में रूस द्वारा नियुक्त गवर्नर मिखाइल राजवोजायेव ने दी. उन्होंने बताया कि वे यूक्रेनी हमले वाली जगह का मुआयना कर रहे थे, तभी दुश्मन का एक हथियार फट गया. फिलहाल दोनों पक्षों की रिपोर्ट की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करना संभव नहीं था. इस बीच ओरेनबर्ग क्षेत्र के गवर्नर येवगेनी सोल्त्सेव ने गुरुवार को कहा कि ओर्स्क में मौजूद रूस की एक रिफाइनरी पर इसी हफ्ते यूक्रेनी ड्रोन से हमला हुआ था. उन्होंने यह भी कहा कि मुख्य बुनियादी ढांचे पर हमला हुआ, जिसे इस समय ठीक नहीं किया जा सकता. सोल्त्सेव ने रूस में यूक्रेनी हमलों से हो रही समस्याओं को सार्वजनिक रूप से स्वीकार करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को ध्यान में रखते हुए मरम्मत में छह महीने तक का समय लग सकता है.
चार लोगों की हुई मौत
यूक्रेन के जनरल स्टाफ ने मंगलवार को कजाकिस्तान की सीमा के पास रूस के ओरेनबर्ग क्षेत्र में ओर्स्क रिफाइनरी पर हमला करने की जानकारी दी थी. इसके जवाब में रूस ने यूक्रेन पर बैलिस्टिक मिसाइलों, जेट-पावर्ड ड्रोन और ग्लाइड बमों से जबरदस्त हमले किए हैं. ये सभी बहुत शक्तिशाली हैं और इन्हें रोकना मुश्किल है. संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, युद्ध शुरू होने के बाद से इन हमलों में 16,000 से ज़्यादा आम नागरिक मारे गए हैं. अधिकारियों ने बताया कि बुधवार और गुरुवार की रात रूस के 133 लंबी दूरी के स्ट्राइक ड्रोन हमलों में यूक्रेन में कम से कम चार लोगों की मौत हो गई और आठ अन्य घायल हो गए. यूक्रेन की सरकारी रेलवे कंपनी, उक्रजालिज्नित्सिया ने गुरुवार को बताया कि दक्षिणी ओडेसा क्षेत्र में एक जेट-पावर्ड शाहिद ड्रोन ने यात्री ट्रेन पर हमला किया. यूक्रेन की सरकारी रेलवे कंपनी, उक्रजालिज़्नित्सिया ने गुरुवार को बताया कि दक्षिणी ओडेसा क्षेत्र में एक जेट-पावर्ड शाहिद ड्रोन ने यात्री ट्रेन पर हमला किया, जिसमें इंजीनियर और उनके सहायक की मौत हो गई. क्षेत्रीय सैन्य प्रशासन के प्रमुख ओलेक्सांद्र प्रोकुदिन ने बताया कि बुधवार की शाम दक्षिणी शहर खेरसॉन में एक रूसी ड्रोन हमले में दो लोगों की मौत हो गई.

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इंटरसेप्टर मिसाइलों का कर रहे हैं जुगाड़
यूक्रेन को अमेरिका में बनी पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइलों की बहुत ज्यादा जरूरत है, जो रूस की बैलिस्टिक मिसाइलों का मुकाबला कर सकें. ईरान युद्ध की वजह से एयर डिफेंस सिस्टम का स्टॉक कम हो गया है. यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की के अनुसार, इस साल यूक्रेन के पास 2025 की तुलना में ढाई गुना कम पैट्रियट इंटरसेप्टर हैं. जेलेंस्की ने कहा कि वे और मिसाइलें हासिल करने की कोशिश में हर दिन बातचीत कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि वे अमेरिका से उनके स्टॉक में मौजूद इंटरसेप्टर मिसाइलों का 5 प्रतिशत हिस्सा बेचने का आग्रह कर रहे हैं, ताकि यूक्रेन को अगली सर्दियों में मदद मिल सके. रूस पावर ग्रिड पर हमले तेज कर देता है. उन्होंने कहा कि उन्हें अब तक सिर्फ एक प्रतिशत ही मिला है. कीव को दी जाने वाली मदद पर नजर रखने वाले जर्मनी के कील इंस्टीट्यूट की गुरुवार की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस साल की पहली छमाही में यूरोपीय देशों ने यूक्रेन को भेजे गए सैन्य उपकरणों के लिए अमेरिकी रक्षा कंपनियों को कम से कम 3 बिलियन यूरो का भुगतान किया. ट्रंप प्रशासन यूक्रेन को अपनी ओर से कोई मदद नहीं देगा, लेकिन दूसरे देशों को अमेरिकी उपकरण खरीदने और उन्हें यूक्रेन भेजने की अनुमति दे रहा है. कील इंस्टीट्यूट ने कहा कि 2026 की पहली छमाही में यूक्रेन को दी गई सैन्य मदद पिछले साल के स्तर के करीब थी, लेकिन वित्तीय और मानवीय मदद 2025 की तुलना में 41 प्रतिशत कम थी.

रणनीतिक साझेदारी पर किए थे हस्ताक्षर
बता दें कि यूक्रेन की तरफ से जारी हमलों के बीच रूस को प्योंगयांग बैलिस्टिक मिसाइलें भेज रहा है. साथ ही वह भारी संख्या में उत्तर कोरियाई सैनिकों की भी तैनाती करने जा रहा है. राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग ने दो साल पहले एक रणनीतिक साझेदारी समझौते पर हस्ताक्षर किए थे. इसमें वादा किया गया है कि अगर किसी भी देश पर हमला होता है, तो दूसरा देश उसकी मदद करेगा. किम ने यूक्रेन पर पुतिन के हमले का समर्थन करने के लिए हजारों सैनिक और भारी मात्रा में हथियार भेजे हैं. कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि मास्को के साथ इस सहयोग से उत्तर कोरिया की सैन्य क्षमताएं बेहतर हो रही हैं.
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रूस बढ़ाएगा हथियारों का प्रोडक्शन
वहीं, इससे पहले जेलेंस्की ने चेतावनी दी थी कि युद्ध के मैदान का अनुभव प्योंगयांग को अपने क्षेत्र के अन्य देशों को धमकाने में मदद करेगा. यूक्रेन का कहना है कि रूस बैलिस्टिक मिसाइलों का प्रोडक्शन बढ़ा रहा है. इसका मकसद है कि कीव में पैट्रियट एयर डिफेंस इंटरसेप्टर की भारी कमी का फायदा उठाना है. साथ ही यूक्रेन ने दावा किया है कि मास्को पूर्वी और दक्षिणी यूक्रेन में 1250 किलोमीटर लंबी फ्रंट लाइन पर नए हमले के लिए और सैनिक की भर्ती की तैयारी कर रहा है.

कूटनीतिक कोशिशें नाकाम हुईं
युद्ध रोकने के लिए अमेरिका की अगुवाई में की गई कूटनीतिक कोशिशें नाकाम हो गई थीं. किसी भी समझौते पर दोनों पक्ष संतुष्ट नहीं हो पाए. वाशिंगटन का कहना था कि जब तक पुतिन को यह लगता रहेगा कि उनके पास अपने सभी मकसद को पूरा करने का कोई कारगर सैन्य रास्ता है, तब तक क्रेमलिन न तो गंभीर बातचीत करेगा और न ही अपनी मांगों पर कोई सार्थक समझौता करेगा. इसके अलावा यूक्रेन में पैट्रियट मिसाइल सिस्टम की कमी की वजह से रूस को आने वाली सर्दियों में यूक्रेन को बहुत ज्यादा नुकसान पहुंचाने का मौका मिल सकता है.
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