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टीकों की संख्या 18 से घटकर 11: क्या अमेरिकी बच्चों के इम्यून सिस्टम पर मंडरा रहा है खतरा?

by Sanjay Kumar Srivastava 13 August 2026, 9:41 PM IST (Updated 13 August 2026, 9:53 PM IST)
13 August 2026, 9:41 PM IST (Updated 13 August 2026, 9:53 PM IST)
टीकों की संख्या 18 से घटकर 11: क्या अमेरिकी बच्चों के इम्यून सिस्टम पर मंडरा रहा है कोई अनजाना खतरा?

US Vaccine: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षा के मद्देनजर एक नए आदेश पर हस्ताक्षर किए हैं. इस नीति के तहत, उन्होंने बच्चों के लिए अनिवार्य टीकों की संख्या को 18 से घटाकर 11 कर दिया है. साथ ही, उन्होंने MMR (खसरा, मम्प्स और रूबेला) वैक्सीन को एक साथ देने के बजाय तीन अलग-अलग खुराकों (शॉट्स) में और अलग-अलग समय पर देने की सिफारिश की है.

बदलाव का कारण

ट्रंप प्रशासन और स्वास्थ्य सचिव रॉबर्ट एफ. कैनेडी जूनियर का मानना है कि बच्चों को एक साथ कई टीके देने से उनके स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है. ट्रंप ने टीकों और ऑटिज्म के बीच संभावित संबंध की जांच का हवाला देते हुए माता-पिता को अधिक विकल्प और वैज्ञानिक स्वतंत्रता देने के लिए यह कदम उठाया है. हालांकि चिकित्सा विशेषज्ञ इस दावे को पूरी तरह से खारिज करते हैं.

माता-पिता और दवा कंपनियों पर असर

माता-पिता पर असर: अब माता-पिता को अपने बच्चों के टीकाकरण के लिए डॉक्टर के पास बार-बार जाना होगा. इससे उनका मेडिकल खर्च और भागदौड़ बढ़ जाएगी. कुछ माता-पिता इस स्वायत्तता से खुश हैं, जबकि विशेषज्ञों को डर है कि इससे बच्चे समय पर टीके लगवाने से चूक सकते हैं.

दवा कंपनियों पर असर: वर्तमान में अमेरिका में अलग-अलग खसरा या रूबेला के टीके उपलब्ध नहीं हैं. ऐसे में दवा कंपनियों को नए सिरे से सिंगल शॉट वैक्सीन बनाने, उनके क्लीनिकल ट्रायल करने और नई गाइडलाइंस के अनुसार उत्पादन लाइन बदलने के लिए बड़े निवेश की जरूरत होगी.

ट्रंप के आदेश की आलोचना

अमेरिका में बच्चों के टीकाकरण के तरीके को बदल दिया गया है.राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को इसकी घोषणा की. ट्रंप के इस आदेश की पूरे अमेरिका में आलोचना की जा रही है. पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट्स ने अमेरिका में बच्चों के टीकाकरण के तरीके को बदलने के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एग्जीक्यूटिव ऑर्डर की तुरंत आलोचना की है. सबसे बड़ी रुकावटें वे अभूतपूर्व आर्थिक और लॉजिस्टिकल चुनौतियां हो सकती हैं जो यह माता-पिता, हेल्थ प्रोवाइडर्स और दवा बनाने वाली कंपनियों पर डालेगा.

वैक्सीन को इंजेक्शन में बांटा गया

रिपब्लिकन राष्ट्रपति की सोमवार की घोषणा में कॉम्बिनेशन शॉट्स जिसमें खसरा, कण्ठमाला और रूबेला या MMR वैक्सीन शामिल हैं, को अलग-अलग इंजेक्शन में बांटने की बात कही गई है. ऑर्डर में कहा गया है कि इसके और दूसरे टीकाकरण के लिए अपॉइंटमेंट के बीच जितना संभव हो, उतना अंतर रखा जाना चाहिए. ऐसा करने के लिए दवा बनाने वाली कंपनियों को उन अलग-अलग वैक्सीन को फिर से बनाना होगा जिन्हें दशकों से अमेरिका में अलग से नहीं बेचा गया है. उन्हें ऐसे नए मैन्युफैक्चरिंग प्लांट भी बनाने होंगे जो देश में अभी इस्तेमाल होने वाली वैक्सीन की तुलना में लाखों और डोज़ बना सकें.

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तीन अलग-अलग खुराकों में देने की सिफारिश

माता-पिता के लिए MMR वैक्सीन को अलग-अलग करने और शॉट्स के बीच अंतर रखने का मतलब होगा कि उन्हें अभी की तुलना में डॉक्टर के पास कई ज़्यादा बार जाना होगा. इन अपॉइंटमेंट्स से बच्चों के डॉक्टरों (पीडियाट्रिशियन) पर भी दबाव बढ़ सकता है जो आमतौर पर ये शॉट्स लगाते हैं, साथ ही सिरिंज और अन्य मेडिकल सप्लाई से जुड़ी लागत भी बढ़ सकती है. अमेरिका और अन्य देशों में हुई स्टडीज़ से पता चला है कि कॉम्बिनेशन वैक्सीन से इस बात की संभावना बढ़ जाती है कि बच्चे स्कूल शुरू करने से पहले संक्रामक बीमारियों से पूरी तरह सुरक्षित हो जाएंगे.

बदलाव का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं

जॉन्स हॉपकिन्स ब्लूमबर्ग स्कूल ऑफ़ पब्लिक हेल्थ की डॉ. एना डर्बिन ने कहा कि हम कम सुविधाजनक और ज़्यादा महंगे काम तभी करते हैं जब ऐसा करने का कोई ठोस कारण हो. इसके लिए कोई ठोस वजह नहीं है. मुझे लगता है कि यह बहुत खराब पब्लिक हेल्थ पॉलिसी है. ट्रंप के एग्जीक्यूटिव ऑर्डर के तहत सरकारी अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे 90 दिनों के भीतर MMR वैक्सीन को अलग-अलग करने और दूसरी वैक्सीन के बीच समय का अंतर रखने की योजना बनाएं. लेकिन फार्मास्युटिकल साइंटिस्ट और पूर्व रेगुलेटर का कहना है कि इन बदलावों में कई साल लग सकते हैं और दवा बनाने वाली कंपनियों को नई स्टडी और मैन्युफैक्चरिंग सुविधाओं पर करोड़ों डॉलर खर्च करने पड़ सकते हैं.

अभी अलग-अलग वैक्सीन उपलब्ध नहीं

अभी अमेरिका में खसरा (measles), मम्प्स या रूबेला के लिए अलग-अलग वैक्सीन उपलब्ध नहीं हैं. फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) द्वारा इन वायरस के लिए मंजूर की गई सभी वैक्सीन कॉम्बिनेशन शॉट हैं. 1970 के दशक की शुरुआत से ही अमेरिका में ‘थ्री-इन-वन’ तरीका ही अपना रहा है. FDA के वैक्सीन विभाग के पूर्व प्रमुख डॉ. जेसी गुडमैन ने कहा कि कंपनियों को बड़े पैमाने पर स्टडी करनी होगी ताकि यह दिखाया जा सके कि नए अलग-अलग शॉट बच्चों में इम्यून सिस्टम को मजबूत करने वाली वैसी ही प्रतिक्रिया पैदा करते हैं जैसी मौजूदा वैक्सीन से होती है.
कंपनियों को नई मैन्युफैक्चरिंग सुविधाओं और प्रक्रियाओं की सुरक्षा भी साबित करनी पड़ सकती है, क्योंकि अमेरिका में लगभग आधी सदी से खसरे के अलग-अलग शॉट का बड़े पैमाने पर उत्पादन नहीं हुआ है.

अभी तक सिर्फ कॉम्बिनेशन टीका ही

जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर गुडमैन ने कहा कि सवाल यह है कि तब से अब तक कितना बदलाव आया है. FDA और कंपनियां उन तुलनाओं के आधार पर आगे बढ़ने में कितना सहज महसूस करेंगी? इंडस्ट्री के जानकारों के मुताबिक, नई वैक्सीन प्लांट को डिजाइन करने, बनाने और उसके लिए सरकारी मंजूरी लेने में आमतौर पर लगभग पांच साल का समय लगता है. इसके अलावा, गुडमैन ने कहा कि FDA को हर अलग की गई वैक्सीन की अलग-अलग समीक्षा और लाइसेंसिंग करनी होगी.

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एक ऐसी प्रक्रिया जिसका पहले कोई उदाहरण नहीं है. उन्होंने कहा कि मुझे नहीं लगता कि बच्चों की सुरक्षा करने वाले बेहद असरदार सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों को बिना किसी वैज्ञानिक कारण के हटाने का कोई मिलता-जुलता उदाहरण है. खसरे और उससे जुड़ी बीमारियों के लिए अलग-अलग टीके अक्सर कम आय वाले देशों में इस्तेमाल किए जाते हैं जो MMR टीका नहीं खरीद सकते. मर्क, GSK और कुछ अन्य कंपनियां जो अमेरिका में बच्चों के टीके सप्लाई करती हैं, वे सिर्फ़ कॉम्बिनेशन टीका ही बनाती हैं.

अलग-अलग खुराक देने से कोई फायदा नहीं

अलग-अलग बयानों में, मर्क और GSK ने कहा कि वे अपने उत्पादों की सुरक्षा और असरदार होने की बात पर कायम हैं. किसी ने भी अपने टीकों को अलग-अलग करने की योजनाओं पर चर्चा नहीं की. मर्क ने ईमेल से भेजे गए एक बयान में कहा कि अब तक, ऐसा कोई प्रकाशित वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिला है जो कॉम्बिनेशन MMR वैक्सीन को तीन अलग-अलग टीकों में बांटने से कोई फ़ायदा दिखाता हो.

डॉक्टरों के पास लगाने होंगे कई चक्कर

MMR का टीका अभी दो डोज़ में दिया जाता है. पहली डोज़ 1 साल की उम्र में और दूसरी डोज़ 4 साल की उम्र के बाद. अगर इस टीके को तीन अलग-अलग हिस्सों में बांटा जाए, तो इसके लिए छह बार क्लिनिक जाना पड़ेगा. काली खांसी (पर्टुसिस) और दूसरी संक्रामक बीमारियों के टीकों के बीच अंतर रखने से क्लिनिक जाने की संख्या कई गुना बढ़ सकती है. डर्बिन के अनुसार, जैसे-जैसे क्लिनिक जाने की संख्या बढ़ती है, माता-पिता के अपॉइंटमेंट छूटने या अपॉइंटमेंट लेना बंद कर देने की संभावना भी बढ़ जाती है. उन्होंने कहा कि यह कम सुविधाजनक और ज़्यादा महंगा होगा, और कम लोग टीका लगवाएंगे.

डेनमार्क में अमेरिका की तुलना में कम टीके

पिछले साल से ट्रंप ने अमेरिकी बच्चों को लगाए जा रहे टीकों की संख्या पर बार-बार चिंता जताई है और स्वास्थ्य सचिव रॉबर्ट एफ. केनेडी जूनियर से इनकी संख्या कम करने को कहा है. केनेडी और दूसरे अधिकारियों ने डेनमार्क जैसे छोटे देशों का उदाहरण दिया है, जहां अमेरिका की तुलना में थोड़े कम टीके लगाने की सलाह दी जाती है. लेकिन डर्बिन का कहना है कि कॉम्बिनेशन टीकों को अलग-अलग करने से बच्चों को दूसरे समान देशों की तुलना में बहुत ज़्यादा अलग-अलग टीके लगवाने पड़ेंगे. व्हाइट हाउस के प्रवक्ता कुश देसाई ने कहा कि MMR वैक्सीन पर ट्रंप प्रशासन की कोशिशों से माता-पिता को अपने बच्चों के लिए टीकाकरण के समय और आवृत्ति (कितनी बार टीका लगवाना है) के बारे में ज़्यादा विकल्प मिलेंगे, जिससे आखिरकार तीनों बीमारियों के लिए टीकाकरण की दर बढ़ेगी.

नई वैक्सीन बनाने को मजबूर नहीं कर सकता व्हाइट हाउस

ट्रंप के आदेश के अनोखे होने के बावजूद कुछ एक्सपर्ट्स को शक है कि इससे कोई खास बदलाव आएगा. न तो व्हाइट हाउस और न ही FDA दवा बनाने वाली कंपनियों को नई वैक्सीन बनाने और उनकी मंज़ूरी लेने के लिए मजबूर कर सकते हैं. बिज़नेस के नज़रिए से देखें तो जो वैक्सीन कंपनियां पहले से ही कॉम्बिनेशन शॉट्स (मिला-जुला टीका) के तौर पर बेच रही हैं, उनके अलग-अलग वर्जन बनाने में उन्हें कोई खास फ़ायदा नहीं दिखता. फिलाडेल्फिया के चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल में वैक्सीन रिसर्चर और सरकार के पूर्व सलाहकार डॉ. पॉल ऑफिट ने कहा कि वे खुद अपने ही प्रोडक्ट से मुकाबला करेंगी, और ऐसा करने की कोई वजह नहीं है.

वैक्सीनेशन का कानूनी अधिकार सिर्फ राज्य सरकारों के पास

हालांकि ट्रंप के आदेश में और ज़्यादा फ़ेडरल रिसर्च और सुझावों की बात कही गई है, लेकिन स्कूली बच्चों के लिए वैक्सीनेशन ज़रूरी करने का कानूनी अधिकार सिर्फ़ राज्य सरकारों के पास है. यह आदेश राज्यों को बस यह सलाह देता है कि वे ट्रंप प्रशासन के नज़रिए के हिसाब से अपने कानूनों में बदलाव करने पर विचार करें. ऑफ़िट ने कहा कि मुझे लगता है कि राज्य इस पर ध्यान नहीं देंगे. मुझे लगता है कि असल बात यह है कि मेडिकल सलाह के लिए हमें डोनाल्ड ट्रंप की तरफ़ देखने की ज़रूरत नहीं है.

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