Home Latest News & Updates कर्मभूमि के लिए होनी चाहिए हिंदुओं की वफादारी: ब्रिटेन में मोहन भागवत ने बताया क्या है हिंदुत्व

कर्मभूमि के लिए होनी चाहिए हिंदुओं की वफादारी: ब्रिटेन में मोहन भागवत ने बताया क्या है हिंदुत्व

by Neha Singh 7 September 2026, 9:56 AM IST (Updated 7 September 2026, 10:07 AM IST)
7 September 2026, 9:56 AM IST (Updated 7 September 2026, 10:07 AM IST)
Mohan Bhagwat in UK

Mohan Bhagwat in UK: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने रविवार को कहा कि हिंदुत्व साफ कहता है कि आपकी वफादारी आपकी ‘कर्मभूमि’ के लिए होनी चाहिए और ब्रिटिश हिंदुओं के लिए वह UK है. मोहन भागवत लंदन में ‘सेलिब्रेशन ऑफ वननेस’ नाम के कार्यक्रम में शामिल हुए, जहां हिंदू स्वयंसेवक संघ (HSS) UK के सैकड़ों कम्युनिटी लीडर, स्टूडेंट और वॉलंटियरों ने उन्हें सुना. भागवत ने ऑडियंस द्वारा पहले से पूछे किए गए कई सवालों के जवाब दिए. UK का दौरा उनके तीन देशों की विदेश यात्रा का आखिरी हिस्सा था.

कर्मभूमि के प्रति हो वफादारी

भागवत ने कहा, “असल में, कोई झगड़ा नहीं है. अगर ब्रिटिश हिंदू अच्छे, पक्के, सच्चे हिंदू हैं, तो ब्रिटिश और भारत के हितों के बीच कभी कोई झगड़ा नहीं होगा.” यह सवाल हिंदूओं की जन्मभूमि और उनके काम की जगह (कर्मभूमि) के बीच बंटी हुई वफादारी के डर के बारे में था. भागवत ने इस पर कहा “अगर ऐसा होता है, तो यह साफ है कि ब्रिटिश हिंदूओं को ब्रिटेन के साथ जाना चाहिए. अपवाद हो सकता है, लेकिन हिंदुत्व इस बारे में साफ है- आपकी वफादारी आपकी कर्मभूमि के प्रति होनी चाहिए. आपकी जन्मभूमि, या आपकी शुरुआत की जमीन या आपका जन्मस्थान, वह है जहां आपको वे वैल्यूज मिलती हैं जिनके आधार पर आप अपनी कर्मभूमि में रहते हैं और उसकी सेवा करते हैं. इसलिए, हिंदुत्व कभी भी अपनी कर्मभूमि को धोखा देने के लिए नहीं कहता.”

‘विविधता में एकता है’

भागवत ने कहा कि हिंदू शब्द को किसी भी धार्मिक प्रैक्टिस या लाइफस्टाइल के आधार पर नहीं समझा जा सकता. “हिंदू एक स्वभाव है, जिस समाज में स्वभाव होता है, उसे सभी विविधताओं को स्वीकार करना चाहिए और उनका सम्मान करना चाहिए. हिंदुत्व यह मानता है कि सभी रास्ते एक ही लक्ष्य की ओर ले जाते हैं. जैसे धरती पर गिरने वाला सारा पानी आखिरकार समुद्र में चला जाता है; उसी तरह, क्योंकि विविधता प्राकृतिक है, इसलिए रास्ते अलग-अलग होने ही हैं. हमारे पास ऐसा कोई मैकेनिज्म नहीं है जिससे हम खुद को एक जैसा बना सकें. एकता के लिए एकरूपता जरूरी नहीं है. उन्होंने कहा, “विविधता में ही एकता है.”

हिंदू राष्ट्र पर बोले भागवत

भागवत ने RSS को सेवा पर आधारित एक संगठन के तौर पर बताया. उन्होंने इसके सिद्धांत के जरिए एक बेहतर दुनिया बनाने में आने वाली पीढ़ियों की भूमिका पर भरोसा जताया. उन्होंने हिंदुत्व को एकता का सिद्धांत बताया और कहा “हमें अलग रहने की ज़रूरत नहीं है. हम साथ चल सकते हैं. हम साथ काम कर सकते हैं. यही हिंदुत्व है.” हिंदू राष्ट्र शब्द के बारे में डिटेल में बताते हुए उन्होंने कहा “हिंदू राष्ट्र का मकसद क्या था? (यह था) दुनिया को यह सच बताना कि विविधता प्राकृतिक है, एकता सच है. इससे दुनिया को फायदा होता है.” बता दें, RSS के सौ साल पूरे होने के मौके पर भागवत का इंटरनेशनल टूर सोमवार को खत्म होने की उम्मीद है, जब वह भारत लौटेंगे.

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News Source: PTI

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