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नेपाल बाढ़ः लापता अपनों की तलाश कर रहे परिजनों के लिए अब DNA टेस्ट ही आखिरी उम्मीद

by Sanjay Kumar Srivastava 6 September 2026, 7:34 PM IST
6 September 2026, 7:34 PM IST
नेपाल बाढ़ में लापता अपनों की तलाश कर रहे परिवारों के लिए अब DNA टेस्ट ही आखिरी उम्मीद

Nepal Flood: जब अमृत दियाली ने बाढ़ के पानी में बहकर आ रहा एक इंसानी हाथ देखा, तो उन्हें लगा कि यह बिल्कुल उनके छोटे भाई राज कुमार के हाथ जैसा है. राज कुमार अपनी पत्नी और चार साल के बेटे के साथ नेपाल में आई भयानक बाढ़ के बाद से लापता हैं. ‘द काठमांडू पोस्ट’ अखबार के मुताबिक, भतीजे अविनाश ने दियाली को कटे हुए हाथ की तस्वीर भेजी और कहा कि मुझे एक हाथ मिला है जो बिल्कुल अंकल के हाथ जैसा दिखता है. दियाली के लिए, यह मिलने से उम्मीद और डर दोनों पैदा हुए. अब उनके परिवार के पास यह जानने का एकमात्र तरीका DNA टेस्ट है कि क्या वह शव उनके भाई का है. यह मामला नेपाल के सामने एक बड़ी चुनौती को दिखाता है. नेपाल के अधिकारी 26 अगस्त की बाढ़ के बाद मिले सैकड़ों शवों की पहचान करने और लापता लोगों के परिवारों की मदद करने के लिए DNA टेस्ट पर निर्भर हैं.

2272 DNA सैंपल इकट्ठा

26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा के पास बर्फ और चट्टानों के खिसकने (एवलांच) से अचानक बाढ़ आ गई, जिससे उत्तरी और मध्य नेपाल के कस्बों और गांवों में भारी तबाही हुई. हिमालयी सीमावर्ती इलाके से दक्षिण की ओर बहने वाली भोटेकोशी नदी बाढ़ का पानी अपने साथ ले आई, जिससे घर, गाड़ियां, सड़कें और पुल बह गए और पनबिजली परियोजनाएं क्षतिग्रस्त हो गईं. इसमें 1,300 से ज़्यादा लोगों की मौत हुई है, जबकि करीब 5,000 लोग अभी भी लापता हैं. ‘द काठमांडू पोस्ट’ की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने अब तक 2,272 DNA सैंपल इकट्ठा किए हैं . 1,260 शवों से और 1,012 रिश्तेदारों से ताकि आपदा में मारे गए लोगों की पहचान की जा सके.

मृतकों की पहचान बनी बड़ी चुनौती

अधिकारियों ने बताया कि DNA सैंपल लेने और पहचान की अन्य प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद 1,030 शवों को दफना दिया गया. अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, इस संख्या में 222 महिलाएं, 355 पुरुष और 453 ऐसे शव शामिल हैं जिनकी पहचान लिंग के आधार पर नहीं हो सकी. नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, पहचान के बाद अब तक केवल 96 शव ही परिवारों को सौंपे गए हैं. मृतकों की पहचान करना एक बड़ी चुनौती बन गई है.

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पानी, कीचड़ और मलबे में रहने से मिट जाते हैं पहचान

अधिकारियों ने बताया कि पानी के बहाव में बहकर आए शव अक्सर बुरी तरह क्षतिग्रस्त या सड़-गल गए होते हैं, या फिर उनके केवल कुछ हिस्से ही मिलते हैं, जिससे चेहरे, कपड़ों या निजी सामान से पहचान करना मुश्किल हो जाता है.लंबे समय तक पानी में रहने और कीचड़ व मलबे के संपर्क में रहने से पहचान योग्य निशान मिट सकते हैं, जबकि कुछ अवशेष टूट-फूट गए हैं या दूसरे अवशेषों के साथ मिल गए हैं.फोरेंसिक विशेषज्ञों का कहना है कि इसलिए DNA टेस्ट बहुत ज़रूरी हो गया है, लेकिन यह एक समय लेने वाली प्रक्रिया है जिसमें तुलना के लिए अवशेषों और करीबी रिश्तेदारों के सैंपल की ज़रूरत होती है.

उंगलियों और दांतों से भी हो सकती है पहचान

नेपाल के अधिकारियों ने कहा कि उंगलियों के निशान और दांतों के रिकॉर्ड से भी पहचान की जा सकती है, लेकिन इनकी उपयोगिता अवशेषों की हालत और उनसे मेल खाने वाले रिकॉर्ड की उपलब्धता पर निर्भर करती है. हालांकि, दियाली जैसे परिवारों के लिए पहचान करना सिर्फ़ फोरेंसिक प्रक्रिया नहीं है. यह कई दिनों की अनिश्चितता को खत्म करने और उन्हें अपने प्रियजनों का अंतिम संस्कार करने का मौका देने का एक तरीका है.

पांच दिन बाद मिला राजकुमार का हाथ

जब भोटेकोशी में बाढ़ आई, तो 33 साल के राजकुमार, उनकी 30 साल की पत्नी श्रिति और उनका चार साल का बेटा सिराज रसुवा ज़िले के स्याफ्रुबेसी में रह रहे थे. उनके रिश्तेदारों ने परिवार को खोजने की उम्मीद में चितवन और नवलपुर तक नदी के किनारे कीचड़ और पत्थरों को उलट-पलटकर तलाशी ली. जब वे उन्हें ज़िंदा नहीं ढूंढ पाए, तो उन्होंने उनके शवों की तलाश शुरू कर दी. बाढ़ के पांच दिन बाद राजकुमार के भतीजे अविनाश को नवलपुर में वह हाथ मिला. परिवार ने मंगलवार को DNA टेस्ट के लिए काठमांडू में नेशनल फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी में उसका एक सैंपल भेजा. दियाली के अनुसार, टेस्टिंग के लिए यह सैंपल 182वें नंबर पर है.

बिदुर, नुवाकोट में खुला DNA सैंपल कलेक्शन सेंटर

दियाली ने ‘द काठमांडू पोस्ट’ को बताया कि हमने अब किसी और चीज़ की उम्मीद छोड़ दी है. अगर वह हाथ मेरे भाई का भी निकलता है, तो कम से कम हमें पक्का पता तो चल जाएगा. ‘राटोपाटी’ न्यूज़ पोर्टल की रिपोर्ट के अनुसार, परिवारों के लिए प्रक्रिया आसान बनाने के लिए नेपाल पुलिस ने बिदुर, नुवाकोट में एक DNA सैंपल कलेक्शन सेंटर खोला है, जिससे लापता लोगों के रिश्तेदार काठमांडू जाए बिना सैंपल दे सकें.
नेपाल पुलिस अस्पताल के डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल दामोदर पौडेल ने कहा कि माता-पिता, बच्चों और भाई-बहनों जैसे करीबी खून के रिश्तेदारों के सैंपल, अज्ञात शवों से मिले DNA से मिलान करने के लिए खास तौर पर उपयोगी होते हैं.

वेबसाइट पर दी गई है 1270 अज्ञात शवों की जानकारी

पौडेल के अनुसार, DNA टेस्ट से पहचान करने में मदद मिलेगी, क्योंकि शवों की पहचान करने में मुश्किलें आ रही हैं. ‘द काठमांडू पोस्ट’ की रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारियों ने नेपाल पुलिस की वेबसाइट पर 1,270 अज्ञात शवों की जानकारी भी अपलोड की है, ताकि परिवार यह देख सकें कि क्या उनके लापता रिश्तेदार उन शवों में शामिल हैं जो बरामद किए गए हैं.

गम में रहकर कर रहे पीड़ितों की मदद

अपने प्रियजनों को खोने का दुख और परिवार के लापता सदस्यों की तलाश के बावजूद नेपाल में आई भयानक बाढ़ से बचे कई लोग आपदा से प्रभावित दूसरों की मदद के लिए फिर से काम पर लौट आए हैं. 31 साल के सुदीप कुमार न्यूपाने 26 अगस्त को आई उस बाढ़ से बच गए थे, जिसमें उनके छोटे भाई और एक करीबी साथी बह गए थे. ‘द काठमांडू पोस्ट’ अखबार की शनिवार की रिपोर्ट के अनुसार, दो दिन तक शोक मनाने के बाद वह राहत कार्यों में शामिल हो गए और रसुवा में बेघर हुए लोगों को खाना और दूसरी मदद पहुंचाने में मदद करने लगे.

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आंखों के सामने ही बह गए भाई और दोस्त

न्यूपाने ग्रामीणों को बाढ़ के बारे में चेतावनी देने में मदद कर रहे थे, तभी वह अपने 27 साल के भाई प्रदीप और एक परिचित जनक के साथ बाढ़ की तेज़ लहरों की चपेट में आ गए. बाढ़ के आने की चेतावनी मिलने के बाद तीनों सुरक्षित जगह की ओर भाग रहे थे. इसके कुछ ही देर बाद बाढ़ आ गई और प्रदीप और जनक बह गए. न्यूपाने पहाड़ी पर ऊपर की ओर भागकर अपनी जान बचाने में कामयाब रहे. दो दिन तक शोक मनाने के बाद न्यूपाने राहत कार्यों में वापस लौट आए क्योंकि बेघर हुए लोगों को खाने और रहने की जगह की ज़रूरत थी और स्थानीय सरकारी यूनिट में कर्मचारियों की कमी थी. अख़बार के अनुसार, उन्होंने कहा कि मैं किस्मत से बच गया. जब तक मैं ज़िंदा हूं, समाज और लोगों की सेवा करता रहूंगा.

बाढ़ में फंसे लोगों की मदद कर रहे सुचित जोशी

ऑनलाइन खबर न्यूज़ पोर्टल की रिपोर्ट के अनुसार, पड़ोसी नुवाकोट में सुचित जोशी खोज और बचाव कार्यों में मदद कर रहे हैं, जबकि उनके परिवार के चार सदस्य उनकी पत्नी, सात साल की बेटी, भाभी और भतीजा अभी भी लापता हैं. खोज अभियान के दौरान जोशी को अपने चाचा और एक और भतीजा मिला. इसके बाद उनकी खोज एक बड़े बचाव अभियान में बदल गई, जिसमें पांच लोग उनकी टीम में शामिल हो गए. इस समूह ने बाढ़ में फंसे लोगों की मदद की और एक बुज़ुर्ग महिला को बचाया जो अपने घर के सामने बाढ़ के पानी में फंसी हुई थी.

उन्होंने उसे सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया. जोशी सुरक्षा कर्मियों के साथ मिलकर अपने रिश्तेदारों की तलाश भी कर रहे हैं. एक खोज अभियान के दौरान त्रिशूली नदी से तीन शव बरामद किए गए, लेकिन वे बुरी तरह क्षतिग्रस्त थे और उनकी पहचान नहीं हो सकी.अपने प्रियजनों की तलाश करने के साथ-साथ जोशी आपदा से प्रभावित अन्य लोगों की भी मदद कर रहे हैं. न्यूज़ पोर्टल के अनुसार, उन्होंने कहा कि मैं इस स्थिति का सामना कर रहा हूं और बचाव कार्य जारी रखे हुए हूं.

मोबाइल बैंकिंग के जरिए भेज रहे राहत कोष में पैसा

पहले नेपाल में सरकारी राहत कोष में दान करने का मतलब था कैश साथ ले जाना, बैंक ढूंढना और लाइन में लगना. अब इसके लिए बस एक फ़ोन और QR कोड स्कैन करने की ज़रूरत होती है. ‘मंगोलियन हार्ट’ बैंड के गिटारिस्ट बॉबी लामा के लिए यह बदलाव निजी अनुभव से जुड़ा था. 2015 के भूकंप और COVID-19 महामारी के दौरान लामा ने बचाव और राहत कार्यों में हिस्सा लिया और ज़रूरतमंद समुदायों तक खुद कैश पहुंचाया. बैंक जाने की परेशानी के कारण उन्होंने कभी सरकारी राहत कोष में दान करने के बारे में नहीं सोचा था.’द काठमांडू पोस्ट’ अख़बार के अनुसार, इस बार जब हिमालयी देश में भयानक बाढ़ आई, तो उन्होंने बस एक QR कोड स्कैन किया और मोबाइल बैंकिंग के ज़रिए सीधे प्रधानमंत्री आपदा राहत कोष में पैसे भेज दिए.

राहत कोष में 10 अरब नेपाली रुपये जमा

लामा का अनुभव दिखाता है कि आपदाओं से निपटने के नेपाल के तरीके में एक बड़ा बदलाव आया है. देश का तेज़ी से बढ़ता डिजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर आम नागरिकों, व्यवसायों और विदेशों में रहने वाले दानदाताओं को सीधे सरकारी राहत कोष से जोड़ रहा है. ‘पोस्ट’ की रिपोर्ट के अनुसार, 26 अगस्त को आई भयानक भोटेकोशी बाढ़ के 11वें दिन तक राहत कोष में 10 अरब नेपाली रुपये से ज़्यादा जमा हो चुके थे. इसमें स्कूली बच्चों से लेकर दुनिया की बड़ी टेक कंपनी Nvidia तक ने योगदान दिया है. यह नेपाल में पहली बार हुआ है जब लोग इतने बड़े पैमाने पर सीधे सरकार को डिजिटल तरीके से पैसे भेजकर लेन-देन कर पाए हैं.

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