Delhi Building Collapse : राजधानी दिल्ली के आरके पुरम स्थित सत्य निकेतन इलाके में रविवार को एक इमारत भर-भराकर गिर गई. इस बिल्डिंग में ज्यादातर दिल्ली विश्वविद्यालय के स्टूडेंट रहते थे. फिलहाल स्थानीय लोगों की मदद से एनडीआरएफ और प्रशासन की टीमें बचाव अभियान में लगी हुई हैं. अभी तक कई लोगों को बाहर निकालकर अस्पताल में इलाज के लिए भेज दिया है. साथ ही इस घटना में 3 लोगों की मौत हो चुकी है और पांच गंभीर रूप से घायल हुए हैं. इसी बीच बिल्डिंग के आसपास रह रहे लोगों ने अपनी आपबीती बताई. उन्होंने बताया कि सत्य निकेतन में अचानक आए झटके के बाद आस-पास की इमारतों में रहने वाले लोग अपने घरों से बाहर निकल आए. बाहर आकर उन्होंने देखा कि छात्रों से भरी-पूरी PG अकोमोडेशन मलबे के ढेर में बदल गई थी. दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस के पास प्राइवेट स्टूडेंट हॉस्टल ‘हॉस्टल डेज’ नाम की पांच मंजिला इमारत ढह गई. इसके बाद कई लोगों ने नंगे हाथों और जो भी औजार उन्हें मिले उनसे मलबा हटाने की कोशिश की. दूसरी ओर दिल्ली पुलिस में काम करने वाले स्थानीय निवासी राजन छेत्री ने बताया कि इमारत में लगभग 15 कमरे थे, जिनमें हर कमरे में दो से तीन स्टूडेंट रहे थे. साथ ही बेसमेंट में मरम्मत या निर्माण का काम चल रहा था.
शुरुआत में हल्का झटका महसूस हुआ
छेत्री ने कहा कि यहाँ रहने वाले ज्यादातर छात्र केरल, हरियाणा और उत्तर प्रदेश से हैं. साथ ही यहां पर रहने वाले स्टूडेंट मुख्य रूप से मोतीलाल नेहरू कॉलेज, आत्माराम सनातन धर्म कॉलेज और श्री वेंकटेश्वर कॉलेज में पढ़ते हैं. वे लोग एक बेड का करीब 12 हजार रुपये किराया दे रहे थे. उन्होंने आगे कहा कि मैं पिछले 20 सालों से यहां रह रहा हूं. बेसमेंट में कुछ निर्माण कार्य चल रहा था, जहां पानी जमा होने लगा था. इमारत की नींव भी बहुत कमजोर थी. पुलिस ने बताया कि दोपहर 1:34 बजे साउथ कैंपस पुलिस स्टेशन में PCR कॉल आई, जिसके बाद आठ फायर टेंडर और कई रेस्क्यू टीमें मौके पर भेजी गईं. इसके अलावा एक स्थानीय निवासी ने समाचार एजेंसी PTI को बताया कि हमें अपने घर में हल्का झटका महसूस हुआ. ऐसा लगा जैसे जमीन हिल रही हो, जैसे भूकंप आया हो. इसके बाद हम तेजी से बाहर भाग गए. उन्होंने दावा किया कि तुरंत कोई इंतजाम न होने पर निवासियों ने मलबे में फंसे लोगों की तलाश में खुद ही भारी कंक्रीट के स्लैब हटाने और मलबा साफ करने का काम शुरू कर दिया. निवासी ने दावा किया कि पास की इमारत भी खतरे में लग रही थी और थोड़ी झुकी हुई थी. उन्होंने यह भी कहा कि गिरी हुई इमारत के अंदर अभी भी 50 से 60 छात्र हो सकते हैं.

ऊपरी मंजिल में 35 से 40 छात्र रह रहे थे
एक अन्य निवासी ने PTI को बताया कि ऊपरी मंजिलों पर करीब 35 से 40 छात्र रह रहे थे और जब इमारत गिरी, तो उस वक्त ज्यादातर स्टूडेंट सो रहे थे. उन्होंने दावा किया कि बेसमेंट में काम चल रहा था और वह इमारत गिरने से कुछ ही मिनट पहले ही बाहर निकल पाए थे, लेकिन इस दौरान उन्हें कुछ चोटें आईं. उन्होंने आगे कहा कि जैसे ही मैं बाहर निकला, पूरी इमारत गिर गई. एक और निवासी ने बताया कि उसका भतीजा अपनी बाइक से इस इमारत के पास से गुजरा था और उसके कुछ ही पल बाद बिल्डिंग मलबे के ढेर में तब्दील हो गई. निवासी ने अपने भतीजे की बात को दोहराते हुए कहा कि इमारत के पास से गुजरते ही जोरदार आवाज के साथ पूरी बिल्डिंग ढह गई. भतीजे ने कहा कि बस कुछ ही सेकंड की बात थी. दूसरी ओर एक अन्य निवासी ने बताया कि पीजी में रहने वाले ज़्यादातर छात्र केरल, हरियाणा और उत्तर प्रदेश से थे. मलबे में फंसे कई लोगों के केरल से होने की आशंका है. उन्होंने कहा कि रविवार होने की वजह से कई छात्र कॉलेज नहीं गए थे और PG के अंदर ही थे. 20-22 सालों से इस इलाके में प्रियंका नाम की महिला ने बताया कि इलाके में पांच या छह मंजिल तक की इमारतें बनाई जा रही हैं. कई घरों को लड़कों के PG में बदल दिया गया है और मकान मालिक कहीं और रहने चले गए हैं.

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इमारत के अंदर कई छात्र फंसे हुए थे
प्रियंका ने आगे बताया कि बिल्डिंग के मालिक बस प्रॉपर्टी को PG का नाम देते हैं, ऑनलाइन किराया लेते हैं और उन्हें चलाने के लिए छोड़ देते हैं. उन्होंने यह भी बताया कि जो PG गिरा है, वह 20 साल से ज्यादा पुराना है और इतने सालों में मैंने वहां कोई मरम्मत का काम होते नहीं देखा. पूरा सत्य निकेतन PG से भरा पड़ा है और मुश्किल से 30 प्रतिशत मकान मालिक ही असल में यहां रहते हैं. यहां तक कि यहां के नाले और सीवर भी खुले हुए हैं. इमारत के अंदर कई छात्र फंसे हुए थे. प्रियंका ने कहा कि चूंकि बारिश हो रही थी, इसलिए ज्यादातर छात्र अपने कमरों में थे. कुछ छात्र वीकेंड होने के कारण घर चले गए थे. एक और निवासी ने कहा कि इलाके की इमारतें बहुत पुरानी हैं और उन्होंने ऐसी सभी प्रॉपर्टीज की स्ट्रक्चरल जांच की मांग की. उन्होंने दावा किया कि रिहायशी इलाके में बेसमेंट वाली पांच मंजिला इमारतें बनाई गई थीं और सवाल उठाया कि क्या ऐसी इमारतों को बनाने की इजाजत दी जानी चाहिए थी.

लोगों ने बताई बिल्डिंग गिरने की ये वजह
वहीं, स्थानीय लोगों ने इसके लिए मरम्मत के काम और बेसमेंट में जमा पानी को जिम्मेदार ठहराया, जबकि MCD का कहना है कि जब तक मलबा नहीं हटाया जाता, तब तक यह पता नहीं लगाया जा सकता कि कोई काम चल रहा था या नहीं. अधिकारियों के मुताबिक, MCD ने गिरी हुई इमारत से सटे उस भवन को खाली करवाकर सील कर दिया है, जिसमें लड़कियों का PG चल रहा था. MCD के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पांच मंजिला इमारत में लड़कों का हॉस्टल था और ये लगभग 30 साल पुरानी G+4 इमारत थी. इसे एक पुनर्वास कॉलोनी में करीब 55 वर्ग गज के इलाके में बनाया गया था, जहां सिर्फ G+1 यूनिट बनाने की ही मंजूरी दी थी. अधिकारी ने कहा कि गिरी हुई इमारत नियमों का उल्लंघन करके बनाई गई थी और उसे सिर्फ ग्राउंड फ्लोर और पहली मंजिल बनाने की ही इजाजत थी. स्थानीय लोगों का दावा है कि मरम्मत के काम और कई दिनों की बारिश के बाद बेसमेंट में जमा पानी से इमारत कमजोर हो गई होगी. हालांकि, नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि यह पता लगाना मुमकिन नहीं है कि कोई काम चल रहा था या नहीं, क्योंकि मलबा अभी हटाया जाना बाकी है.

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जानें क्या बोले MCD के डिप्टी कमिश्नर?
इसके अलावा MCD के डिप्टी कमिश्नर (दक्षिण) राकेश कुमार ने बताया कि गिरी हुई इमारत से सटी दूसरी इमारत की हालत जर्जर पाए जाने के बाद नगर निगम ने उसे खाली करवाकर सील कर दिया है और उसे गिराया जाएगा. उन्होंने आगे कहा कि बगल वाली इमारत में रहने वाले सभी लोगों को पास के कम्युनिटी हॉल में शिफ्ट कर दिया गया है. राकेश कुमार ने बताया कि घटना के बाद मौके पर दो हाइड्रा मशीनें, चार JCB, करीब आधा दर्जन पिकअप ट्रक और 30-40 MCD कर्मचारी तैनात किए गए थे. जब उनसे बेसमेंट में मरम्मत का काम चलने की खबरों के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि मलबा अभी तक हटाया नहीं गया है और यह पता लगाने का कोई तरीका नहीं है कि क्या ऐसा कोई काम हो रहा था. कुमार ने यह भी कहा कि इस इलाके में पहले से ही सीलिंग का काम चल रहा था और अब और भी सख्त कार्रवाई की जाएगी. अधिकारियों के मुताबिक, इस इलाके में ऐसे कई और अवैध PG और हॉस्टल खुले हुए हैं.
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MCD के डिप्टी कमिश्नर ने बताया कि दिल्ली पुलिस, NDRF, दिल्ली फायर सर्विस और दूसरी एजेंसियों की बचाव टीमें घटनास्थल पर अपना काम जारी रखे हुए हैं. लगभग 70 कर्मियों और एक डॉग स्क्वाड वाली NDRF की दो टीमें तैनात की गई हैं. साथ ही अंदर फंसे लोगों के लिए मलबे के नीचे ऑक्सीजन सिलेंडर पहुंचाए गए हैं. इसके अलावा मलबे के नीचे अभी भी कितने लोग फंसे हैं. इसकी सही संख्या के बारे में तुरंत पता नहीं चल पाया है. हालांकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि अभी भी कई लोग अंदर हो सकते हैं.
इस रूप में हुई मृतकों की पहचान
मृतकों की पहचान मुकेश कुमार और उनकी बेटियों माया (17), नीतू (7) और पल्लवी (5) के रूप में की गई. उन्होंने बताया कि कुमार की तीसरी बेटी काजल गंभीर रूप से घायल हो गई. कानपुर के लाला लाजपत राय अस्पताल (LLR) में उसका इलाज चल रहा है. कुमार के चचेरे भाई तेज बहादुर सिंह ने पुलिस की लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि हादसे के बाद परिवार ने कई बार साढ़ पुलिस को फोन किया, लेकिन शुरू में उनके फोन का कोई जवाब नहीं मिला. उन्होंने बताया कि ग्रामीणों को खुद ही बचाव कार्य शुरू करना पड़ा और मलबे में फंसे परिवार के सदस्यों को बाहर निकालने के लिए उन्होंने करीब दो घंटे तक काम किया. परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि पटारा CHC में इलाज में देरी हुई क्योंकि पीड़ितों के वहां पहुंचने पर कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था. उन्होंने इस लापरवाही की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की. परिवार के मुताबिक, काजल उर्फ लक्ष्मी की शादी दिसंबर में होने वाली थी.
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