NATO SUMMIT: तुर्की के अंकारा में 7-8 जुलाई को आयोजित नाटो शिखर सम्मेलन में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सदस्य देशों द्वारा रक्षा खर्च न बढ़ाने पर गहरी नाराजगी जताई. ट्रंप ने विशेष रूप से स्पेन को बेकार साझेदार कहा, जबकि अन्य देशों पर ईरान-अमेरिका संघर्ष में असहयोग का आरोप लगाया और सभी सहयोगियों से रक्षा बजट GDP का 5% करने की सख्त मांग की.
फ्रेडरिकसेन ने ट्रंप की बातों को किया खारिज
डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिकसेन ने बुधवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस नई मांग को खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि अमेरिका को NATO सहयोगी डेनमार्क से ग्रीनलैंड का कंट्रोल ले लेना चाहिए. उन्होंने कहा कि ग्रीनलैंड निश्चित रूप से बिक्री के लिए नहीं है. तुर्की में NATO सदस्य देशों के नेताओं की बैठक से पहले फ्रेडरिकसेन ने कहा कि हमें उम्मीद है कि सभी सहयोगी देश ग्रीनलैंड के लोगों के आत्मनिर्णय के अधिकार का सम्मान करेंगे. कहा कि हम संप्रभु देश हैं और हम चाहते हैं कि हर कोई हमारी क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता का सम्मान करे.

ग्रीनलैंड को NATO सहयोगियों पर भरोसा
ट्रंप ने बैठक से ठीक पहले ग्रीनलैंड को लेकर पुरानी बात फिर से छेड़ दी और जोर दिया कि अमेरिका को इस अर्ध-स्वायत्त द्वीप पर नियंत्रण करना चाहिए. NATO इस सिद्धांत पर बना है कि इसके 32 सदस्य एक-दूसरे के क्षेत्र की रक्षा करेंगे, न कि उस पर कब्जा करने की धमकी देंगे. फ्रेडरिकसेन ने कहा कि हमले की स्थिति में डेनमार्क NATO के हर इंच क्षेत्र की रक्षा के लिए तैयार है, जिसमें हमारा अपना क्षेत्र भी शामिल है. वह एक-दूसरे की रक्षा करने के अपने वादे को निभाने के लिए NATO सहयोगियों पर भरोसा करेगा.
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एकजुटता का किया आह्वान
आइसलैंड की प्रधानमंत्री क्रिस्ट्रुन फ्रोस्टाडॉटिर ने कहा कि ग्रीनलैंड ग्रीनलैंड के लोगों का है. उन्होंने बाहरी खतरों का सामना करने के लिए NATO सहयोगियों के बीच एकता का आह्वान किया. फ्रोस्टाडॉटिर ने कहा कि हमें गठबंधन के बाहर से खतरों का सामना करना पड़ रहा है. इन NATO सहयोगियों के लिए रूस सबसे बड़ा खतरा है. हमें खुद पर और इस बात पर ध्यान देने की जरूरत है कि हम कैसे एकजुट रहें.
ईरान पर हमलों का समर्थन
NATO के सेक्रेटरी जनरल मार्क रुटे ने बुधवार को अंकारा से कहा कि उन्हें भरोसा है कि अमेरिका इस मिलिट्री संगठन के प्रति पूरी तरह से प्रतिबद्ध है. उन्होंने ईरान के खिलाफ़ ट्रंप के कड़े एक्शन की तारीफ भी की. तेहरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तीन कमर्शियल जहाजों पर हमले के बाद अमेरिका ने ईरान पर कई हमले किए.

इन हमलों के बारे में रुटे ने कहा कि मुझे लगता है कि यह बहुत ज़रूरी था, क्योंकि जब सीज़फायर (युद्धविराम) लागू हो और ईरान असल में उसका उल्लंघन कर रहा हो, तो हम देख सकते हैं कि कल क्या हुआ. रुटे ने कहा कि मुझे लगता है कि अमेरिका का कड़ा जवाब देना बहुत ज़रूरी है. ईरान पर अमेरिकी हमले और ग्लोबल मार्केट में तेल बेचने की इजाज़त देने वाले लाइसेंस को रद्द करना, जवाबी कार्रवाई थी. इससे दोनों देशों के बीच महीनों से चल रही लड़ाई को खत्म करने के लिए हुए अंतरिम समझौते की कमज़ोरी भी उजागर हुई.
सहयोगी देश रक्षा पर ज्यादा कर रहे खर्च
ट्रंप ने तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन द्वारा आयोजित डिनर से निकलने के तुरंत बाद ये हमले किए और अब तक इन हमलों के बारे में कोई बात नहीं की है. अमेरिकी राष्ट्रपति का अमेरिका से बाहर रहते हुए मिलिट्री एक्शन लेना दुर्लभ है, हालांकि 2011 में पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने ब्राज़ील की यात्रा के दौरान लीबिया में हमलों की मंज़ूरी दी थी. अंकारा में NATO के 32 सदस्य देशों की बैठक का मकसद गठबंधन के खर्च के लक्ष्यों को पूरा करने की दिशा में हुई प्रगति पर ध्यान केंद्रित करना था. रुटे ने कहा कि सभी सहयोगियों से GDP के हिसाब से बराबर खर्च करने की अमेरिका की मांग पूरी तरह से सही है. उन्होंने यह भी बताया कि एस्टोनिया, लातविया, लिथुआनिया, पोलैंड, डेनमार्क और ग्रीस पहले से ही ज़्यादा निवेश कर रहे हैं.
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NATO समिट में एकता पर हुई बात
NATO नेताओं की बैठक की अध्यक्षता करने से पहले रुटे ने कहा कि इसमें कोई शक नहीं कि प्रतिबद्धता है. लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि ट्रंप प्रशासन को उम्मीद है कि यूरोपीय देश और कनाडा अपने खर्च को अमेरिका के बराबर ले आएंगे. NATO नेताओं ने ट्रंप को यह दिखाने की कोशिश की कि वे रक्षा पर खर्च बढ़ा रहे हैं. NATO समिट का मकसद एकता दिखाना और किसी भी संभावित दुश्मन को रोकना होता है. यह संकल्प अब पहले से कहीं ज़्यादा ज़रूरी हो गया है क्योंकि रूस यूक्रेन के ख़िलाफ़ युद्ध जारी रखे हुए है और ऐसी चिंताएं बढ़ रही हैं कि दूसरे यूरोपीय देशों को भी निशाना बनाया जा सकता है.

रुटे ने की ट्रंप की तारीफ
पिछले महीने अमेरिकी नेता को खुश करने की कोशिश में रुटे ने वाशिंगटन जाकर ‘ट्रंप ट्रिलियन’ की तारीफ़ की यानी वह 1.2 ट्रिलियन डॉलर जो 2017 में ट्रंप के सत्ता में आने के बाद से यूरोपीय सहयोगियों और कनाडा ने रक्षा खर्च में जोड़े हैं.फिर भी ट्रंप ने वफ़ादारी की मांग की और NATO को दिखावटी ताकत करार दिया, क्योंकि कुछ सहयोगियों ने ईरान पर हमले के लिए अमेरिकी सेना को अपने बेस तक खुली पहुंच देने से इनकार कर दिया था. जब नेता तुर्की की राजधानी अंकारा में इकट्ठा हुए, तो रुटे ने बढ़े हुए खर्च के लिए योजनाबद्ध कई समझौतों को दिखाने के लिए एक बड़ी घोषणा वाला कार्यक्रम आयोजित किया. इनमें से ज़्यादातर पैसा अमेरिकी कंपनियों पर खर्च किया जाना था, जिससे अमेरिकियों के लिए हज़ारों नौकरियां पैदा होंगी. NATO के राजनयिकों और अधिकारियों को उम्मीद थी कि ट्रंप इसे अपनी जीत मानेंगे, लेकिन तुर्की पहुंचने के बाद से उनकी कुछ टिप्पणियों को देखते हुए लगता है कि उन्हें एक बार फिर खरी-खोटी सुननी पड़ सकती है.
बेल्जियम, स्पेन पर नाराज हैं ट्रंप
ट्रंप लंबे समय से कहते आ रहे हैं कि NATO के लिए रक्षा का बोझ उठाने में अमेरिका अपनी हिस्सेदारी से कहीं ज़्यादा खर्च कर रहा है. पिछले साल हुई समिट में सहयोगी देश अपनी GDP का 5% हिस्सा रक्षा पर खर्च करने पर सहमत हुए थे. इसमें से 3.5% रक्षा बजट पर और 1.5% सड़कों, पुलों और बंदरगाहों पर खर्च किया जाना था, ताकि लड़ाई के समय सैनिक और हथियार तेज़ी से पहुंच सकें. मंगलवार को NATO की ओर से जारी नए आंकड़ों से पता चला है कि स्लोवेनिया, बेल्जियम, स्पेन और चेक रिपब्लिक को ट्रंप प्रशासन की नाराज़गी का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि वे गठबंधन के GDP का 2% खर्च करने के पुराने लक्ष्य को पूरा करने में संघर्ष कर रहे हैं.
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यूरोप अपनी सुरक्षा की जिम्मेदारी खुद उठाए
ट्रंप प्रशासन एक ज़्यादा चुस्त और घातक ‘NATO 3.0’ देखना चाहता है, जिसमें यूरोप अपनी सुरक्षा (यूक्रेन सहित) की ज़िम्मेदारी पारंपरिक हथियारों के साथ खुद उठाए, जबकि अमेरिका अपना परमाणु सुरक्षा कवच (न्यूक्लियर अंब्रेला) देता रहे. हालांकि, पेंटागन ने यूरोप में अमेरिकी सेना की मौजूदगी की 6 महीने की समीक्षा शुरू कर दी है, जिससे सहयोगी देश यह जानने के लिए उत्सुक हैं कि ट्रंप अमेरिकी सैनिकों की संख्या में कितनी कटौती करने का इरादा रखते हैं. सेना में कटौती इस बात पर निर्भर कर सकती है कि यूरोपीय सहयोगी कितनी तेज़ी से रक्षा खर्च बढ़ाते हैं और क्या वे अपने सैन्य अड्डों के ज़्यादा इस्तेमाल की इजाज़त देने के लिए तैयार हैं.

NATO में शामिल होने के लिए जेलेंस्की दे रहे हैं जोर
राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की ने मंगलवार को एक बार फिर अपील की कि यूक्रेन को गठबंधन में शामिल होने की इजाज़त दी जाए. उन्होंने कहा कि यूक्रेनी सेना बहुत अनुभवी है और इससे NATO की रक्षा क्षमताएं और मज़बूत होंगी. ज़ेलेंस्की ने यूक्रेन की परिस्थितियों के अनुसार ढलने की क्षमता और रूस के अंदर तक हमला करने, मॉस्को की तेल रिफाइनरियों और ऊर्जा से जुड़े अन्य ठिकानों को निशाना बनाने की उसकी काबिलियत पर ज़ोर दिया. उन्होंने कहा कि यूक्रेन की सेना हर महीने औसतन 30,000 रूसी सैनिकों को खत्म कर रही है. उत्तरी, मध्य और पूर्वी यूरोप के कुछ देशों में यह चिंता बढ़ रही है कि रूस महाद्वीप पर ‘हाइब्रिड अटैक’ यानी पारंपरिक युद्ध और साइबर हमलों जैसी रणनीतियों का मिला-जुला रूप करने की तैयारी कर रहा है, क्योंकि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को यूक्रेन में जीत हासिल करने में मुश्किल हो रही है.
हिज़्बुल्लाह को खत्म कर सकता है अल-शारा
ट्रंप ने सीरिया के राष्ट्रपति अहमद अल-शारा से भी मुलाक़ात की. अल-शारा कभी विद्रोही थे और उन्होंने ही उस हमले का नेतृत्व किया था जिसके कारण दिसंबर 2024 में तानाशाह बशर अल-असद को सत्ता से हटना पड़ा था. कभी अल-कायदा के लड़ाके रहे अल-शारा को ट्रंप का समर्थन हासिल है, क्योंकि वे सीरिया का पुनर्निर्माण करना चाहते हैं और पश्चिम के साथ लंबे समय से टूटे हुए संबंधों को फिर से बहाल करना चाहते हैं. ट्रंप ने बार-बार कहा है कि अल-शारा लेबनान में हिज़्बुल्लाह को खत्म करने का काम इज़राइली सेना से बेहतर ढंग से कर सकते हैं. इस बात ने लेबनान और इज़राइल दोनों जगह चिंता पैदा कर दी है. सीरियाई नेता ने कहा है कि उन्हें ऐसा करने में कोई दिलचस्पी नहीं है.
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