Indus Waters Treaty: भारत और पाकिस्तान के रिश्ते को आपसी बातचीत से सुधारने की कई बार कोशिश की गई है. इस मामले में भारत ने पाक पर कई बार भरोसा भी किया है, लेकिन हर बार पाकिस्तान ने ‘पीठ में छुरा घोपने’ (विश्वासघात) का काम किया है. वर्ष 1947 में भारत से अंग्रेजों का शासन समाप्त होते ही देश का बंटवारा हो गया था और पाकिस्तान का निर्माण हुआ था. तब से लेकर अभी तक पाकिस्तान भारत के लिए धोखा ही देता रहा है. यह एक तरह से ‘धोखेबाज पड़ोसी’ हो गया है.
अगस्त 1947 में भारत के विभाजन के परिणामस्वरूप सिंधु जल विवाद उत्पन्न हुआ था, जिसके लिए अंततः एक सहमतिपूर्ण समाधान हेतु बातचीत की आवश्यकता पड़ी. कई दौर की बातचीत के बाद सिंधु जल संधि (आईडब्ल्यूटी) पर 19 सितंबर 1960 को कराची में हस्ताक्षर किए गए थे और यह 12 जनवरी 1961 को ‘प्रभावी तिथि’, 1 अप्रैल 1960 से लागू हुई थी. इस संधि के तहत भारत की ओर से कुछ नदियों का पानी पाकिस्तान को देने का नियम था, इस संधि पर हम विस्तार से बात करेंगे, लेकिन सबसे पहले यह जान लें कि फिलहाल भारत ने इस संधि यानी सिंधु जल समझौते को स्थगित कर रखा है. इसकी वजह से भारत से पाकिस्तान को मिलने वाला पानी अब नहीं मिल पा रहा है और पाक इसके लिए तरस गया है.
बीते साल 22 अप्रैल को पाकिस्तान के द्वारा पाले गए आतंकियों ने भारत के जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में कायराना हमला किया था. पहलगाम की बैसरन घाटी में आतंकियों ने निहत्थे पर्यटकों को गोलियों से भून दिया था, जिसमें एक नेपाली नागरिक समेत कुल 25 भारतीय लोगों की जान चली गई थी. इस आतंकी घटना के जवाब में भारत ने ऑपरेशन सिंदूर लॉन्च किया था. इसी दौरान नई दिल्ली ने पाकिस्तान को पानी का झटका देते हुए सिंधु जल समझौते को स्थगित कर दिया था.
अब पिछले एक साल से अधिक समय से यह संधि स्थगित है और पाकिस्तान सिंधु के पानी के लिए तरस गया है. पाकिस्तान अब भारत को धमकी दे रहा है. पाक सेना समेत वहां के कई नेता भारत को जंग के लिए गीदड़भभकी दे रहे हैं. आइए जानते हैं कि पाकिस्तान की ओर से सिंधु जल को लेकर भारत के लिए क्या-क्या कहा जा रहा है. इसके साथ ही हम जानेंगे यह सिंधु जल संधि (सिंधु जल समझौता) क्या है. शुरुआत हम पहलगाम हमले और ऑपरेशन सिंदूर से करेंगे.
पहलगाम हमला
हर दिन की तरह 22 अप्रैल 2025 को भी जम्मू-कश्मीर के पहलगाम की बैसरन घाटी में पर्यटकों की भीड़ लगी हुई थी. वे अपनी फैमली, दोस्तों के साथ कश्मीर की वादियों का आनंद ले रहे थे. तभी दोपहर करीब डेढ़ बजे के आसपास सेना की वर्दी में आए करीब 4-5 आतंकियों ने निहत्थे पर्यटकों पर हमला कर दिया. उन्होंने महिलाओं के सामने उनके साथ आए पुरुषों को बेरहमी से कत्ल किया. मारने से पहले आतंकियों ने लोगों से उनका धर्म पूछा और हिंदू होने पर मौत के घाट उतार दिया. इस आतंकी घटना का वीडियो और फोटो भी सामने आए थे. इसमें कुल 26 लोगों की जान गई थी. हमले के बाद आतंकी मौके से फरार हो गए थे.

ऑपरेशन सिंदूर
पहलगाम में हुए आतंकी हमले का जोरदार जवाब देने के लिए भारत सरकार ने बहुत ही कम समय में अपनी प्लानिंग और तैयारी कर ली. भारतीय सशस्त्र बलों ने बीते साल 6-7 मई की रात को पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में स्थित आतंकी संगठनों के कुल 9 ठिकानों पर एक साथ हमला कर दिया. इस हमले ने आतंकियों में हलचल पैदा कर दी. भारत ने लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद, हिजबुल मुजाहिदीन के ठिकानों पर जोरदार बमबारी की. इसमें आतंकियों के ठिकाने बर्बाद हो गए, उनके कई लॉन्चपैड नष्ट हो गए. भारत की इस कार्रवाई में 100 से अधिक आतंकी और उनके आका मारे गए थे.
भारत के इस हमले से पाकिस्तान बौखला गया. वह आतंकियों पर किए हमले को अपने पर मानते हुए भारत की सीमा वाले इलाके पर ड्रोन और गोलियों से हमला कर दिया. वहीं, पाकिस्तानी हमले के जवाब में भारत ने अपनी कार्रवाई शुरु कर दी. भारतीय सेना ने लाहौर में पाकिस्तानी रडार सिस्टम को ध्वस्त कर दिया.
भारतीय सशस्त्रों बलों की चौतरफा कार्रवाई से पाकिस्तान और उसकी सेना घबरा गई. इस भारी क्षति से आहत होकर, पाकिस्तान के सैन्य संचालन महानिदेशक (DGMO) ने भारतीय डीजीएमओ को फोन किया और युद्ध को समाप्त करने का आग्रह किया. तब जाकर भारत ने अपने ऑपरेशन को रोका. दोनों पक्षों के बीच यह सहमति बनी कि दोनों पक्ष 10 मई 2025 को भारतीय समयानुसार शाम 5 बजे से जमीन, हवा और समुद्र में किसी भी प्रकार की गोलीबारी और सैन्य कार्रवाई रोक देंगे. हालांकि, पहलगाम हमले के बाद भारत के द्वारा स्थगित की गई सिंधु जल संधि अभी भी स्थगित है. वहीं पाकिस्तान ने भारतीय जहाजों के लिए अपने एयर स्पेस को इस हमले के बाद से बंद कर रखा है.
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समझौता स्थगन पर पाक विदेश मंत्री ने क्या कहा?
पहलगाम हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के लिए भेजे जाने वाले पानी के लिए बने सिंधु जल संधि को स्थगित कर दिया था. भारत की इस कार्रवाई के एक साल से अधिक हो चुके हैं. इस बीच अब पाकिस्तान सिंधु के पानी के लिए तरसता हुआ दिख रहा है. वह भारत को धमका भी रहा है. हाल ही में पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने कहा था कि कोई भी देश इस समझौते को एकतरफा निलंबित या रद्द नहीं कर सकता. उन्होंने भारत पर अंतरराष्ट्रीय कानून और संधि का उल्लंघन करने का आरोप लगाया.
डार ने यहां तक कह दिया था कि भारत के द्वारा पानी को रोकना, विशेष रूप से चिनाब नदी का, पाकिस्तान के जल सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा है. विदेश मंत्री के बाद पाकिस्तानी सेना और उसके बाद पीपीपी नेता बिलावल भुट्टों ने भी भारत के खिलाफ बयान जारी किया है.
सभी जरूरी कदम उठाएगा- पाक सेना
बीते दिनों पाकिस्तानी सेना की ओर से भी भारत के द्वारा स्थगित किए गए सिंधु जल संधि पर बयान जारी किया गया. सोमवार को रावलपिंडी के जनरल मुख्यालय में पाकिस्तानी सेना के फील्ड मार्शल सैयद आसिम मुनीर ने 276वीं कोर कमांडर्स कॉन्फ्रेंस की अध्यक्षता की. इसके बारे में पाकिस्तानी सेना के इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस की ओर से एक बयान जारी किया गया जिसमें सिंधु जल समझौते का जिक्र था. इस बयान में कहा गया, “सिंधु जल समझौते के बारे में भारत के बयानों पर ध्यान देते हुए, फोरम ने 24 अप्रैल, 2025 के नेशनल सिक्योरिटी कमिटी के निर्देशों का समर्थन किया और यह पक्का इरादा जताया कि पाकिस्तान अपने पानी के अधिकारों की रक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाएगा.”

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जंग लड़नी पड़े तो जंग लड़ने को तैयार- भुट्टो
वहीं, गिलगित में पीपीपी के नेता बिलावल भुट्टो जरदारी ने एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा, “भारत सिंधु को एक हथियार के तौर पर पाकिस्तान के खिलाफ इस्तेमाल करना चाहता है.” उन्होंने आगे कहा, “हम भारत को बताना चाहते हैं कि हम इस समझौते की रक्षा करेंगे. हम आपको जवाब देंगे, हम सिंधु पर सौदा करने को तैयार नहीं हैं, जंग लड़नी पड़े तो जंग लड़ने को तैयार हैं.” भुट्टो ने मोदी सरकार को भी निशाने पर लिया और कहा, “सिंधु जल समझौते के मैदान में भी हम मोदी सरकार को नाकाम करेंगे.”
भारत ने क्या कहा?
बीते दिनों विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान को करारा जवाब दिया. मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, “सिंधु जल संधि पर भारत का रुख एक जैसा रहा है.” उन्होंने आगे कहा कि पाकिस्तान द्वारा बॉर्डर पार आतंकवाद को लगातार बढ़ावा देने के जवाब में सिंधु जल संधि रोके रखा गया है. पाकिस्तान को सीमा पार आतंकवाद के लिए अपना समर्थन भरोसेमंद और पक्के तौर पर छोड़ना होगा.

क्या है संधि जल संधि?
न्यूज एजेंसी पीटीआई की एक रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त 1947 में भारत के विभाजन के परिणामस्वरूप सिंधु जल विवाद उत्पन्न हुआ. इसके लिए अंततः एक सहमतिपूर्ण समाधान हेतु बातचीत की आवश्यकता पड़ी. 4 मई 1948 का अंतर-डोमिनियन समझौता (दिल्ली समझौता) दोनों देशों के बीच जलक्षेत्र का पहला नियमन था. जल आपूर्ति विवाद उत्पन्न होने की बात स्वीकार करते हुए भी, समझौते में कहा गया था कि ‘स्वामित्व अधिकार’ पश्चिमी पंजाब को पूर्वी पंजाब के जलक्षेत्र में किसी भी प्रकार का हिस्सा मांगने का अधिकार नहीं देते. बाद में, पाकिस्तान ने 23 अगस्त 1950 को इस समझौते की निंदा की.
1951 की शुरुआत में, टेनेसी वैली अथॉरिटी के पूर्व अध्यक्ष डेविड लिलिएंथल ने प्रस्ताव दिया कि भारत और पाकिस्तान विश्व बैंक की मदद से सिंधु बेसिन प्रणाली को संयुक्त रूप से विकसित करें. इसके बाद, विश्व बैंक के अध्यक्ष यूजीन ब्लैक ने 6 सितंबर 1951 को दोनों प्रधानमंत्रियों को पत्र लिखकर यह प्रस्ताव रखा. दोनों सहमत हो गए. ब्लैक ने भारतीय, पाकिस्तानी और विश्व बैंक के इंजीनियरों की एक कार्यकारी समिति का प्रस्ताव रखा. वार्ता में अत्यधिक उतार-चढ़ाव आए और कई बार तो यह टूटने की कगार पर पहुंच गई, लेकिन विश्व बैंक के दृढ़ संकल्प ने इसे तब तक कायम रखा जब तक कि अंततः 1960 में संधि पर हस्ताक्षर नहीं हो गए.
सिंधु जल संधि (IWT-Indus Waters Treaty) पर 19 सितंबर 1960 को कराची में हस्ताक्षर किए गए थे और यह 12 जनवरी 1961 को ‘प्रभावी तिथि’, 1 अप्रैल 1960 से पूर्वव्यापी प्रभाव से लागू हुई थी.

भारत-पाकिस्तान के हिस्से में कौन-कौन सी नदियां?
सिंधु नदी लगभग 1800 मील लंबी है. इसकी पश्चिमी सहायक नदियां (काबुल, कुर्रम) 700 मील से अधिक लंबी हैं; पूर्वी सहायक नदियों (झेलम, चिनाब, रावी, ब्यास, सतलुज) की कुल लंबाई 2800 मील से अधिक है. यह 450,000 वर्ग मील क्षेत्र को सिंचित करती है और विश्व की सबसे बड़ी नदी प्रणालियों में से एक है. इस बेसिन (बहाव वाले क्षेत्र ) का अधिकांश भाग भारत और पाकिस्तान में स्थित है, जो दक्षिण एशियाई क्षेत्र के इतिहास, संस्कृति और इकोसिस्टम को प्रभावित करता है.
भारत और पाकिस्तान के बीच 1960 में हुए सिंधु नदी जल संधि के तहत सिंधु नदी की सहायक नदियों को पूर्वी और पश्चिमी नदियों में विभाजित किया गया. सतलज, ब्यास और रावी नदियों को पूर्वी नदी बताया गया जबकि झेलम, चेनाब और सिंधु को पश्चिमी नदी बताया गया. संधि के तहत रावी, ब्यास और सतलुज को भारत हिस्से में दिया गया. वहीं, सिंधु, झेलम और चिनाब को पाकिस्तान को आवंटित किया गया.
संधि के लिए एक आयोग को भी बनाया गया. आयोग के पास यह तय करने का विवेकाधिकार है कि किसी भी मतभेद को तटस्थ विशेषज्ञ द्वारा निपटाया जाए या उसे विवाद माना जाए, ऐसा निर्णय केवल आयोग के भीतर आपसी सहमति से ही लिया जा सकता है. जानकार बताते हैं कि वहीं, मध्यस्थता न्यायालय की स्थापना केवल आपसी सहमति से या किसी विवाद को सुलझाने के लिए बातचीत या मध्यस्थता के विफल होने पर ही की जा सकती है.
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