Home Latest News & Updates कौन हैं Navi Pillay? भारतीय मूल की महिला को मिला 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार

कौन हैं Navi Pillay? भारतीय मूल की महिला को मिला 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार

by Preeti Pal 9 October 2026, 3:43 PM IST (Updated 9 October 2026, 3:44 PM IST)
9 October 2026, 3:43 PM IST (Updated 9 October 2026, 3:44 PM IST)
कौन हैं Navi Pillay? भारतीय मूल की इस jurist को मिला 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार, जानिए क्यों है खास

Navi Pillay: दुनिया में शांति की बात करना आसान है, लेकिन युद्ध और हिंसा के बीच न्याय की आवाज उठाना बड़ी हिम्मत का काम है. साउथ अफ्रीका में भारतीय मूल के तमिल परिवार में पैदा हुईं नवी पिल्लै ने अपनी जिंदगी इसी काम के लिए समर्पित कर दी. मानवाधिकारों और अंतरराष्ट्रीय कानून के क्षेत्र में उनके लंबे योगदान के लिए उन्हें 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार दिए जाने की घोषणा की गई है. नॉर्वेजियन नोबेल समिति के मुताबिक, उन्होंने युद्ध अपराधों, मानवता के खिलाफ अपराधों और नरसंहार के दोषियों को न्याय के कटघरे तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाई है. ऐसे में कई लोगों के मन में ये सवाल है कि नवी पिल्लै कौन हैं?

शुरू हुआ संघर्ष

नवी पिल्लै का पूरा नाम नवनेथेम नवी पिल्लै है. उनका जन्म साउथ अफ्रीका के डरबन में भारतीय तमिल मूल के परिवार में हुआ था. उस समय देश में रंगभेद की व्यवस्था लागू थी. यानी तब लोगों के साथ उनकी नस्ल के आधार पर भेदभाव किया जाता था. ऐसे माहौल में कानून की पढ़ाई करना और न्याय के लिए आवाज उठाना आसान नहीं था. हालांकि, नवी पिल्लै ने मुश्किलों के सामने हार नहीं मानी. उन्होंने वकालत के जरिए भेदभाव और अन्याय का विरोध किया. रंगभेद का विरोध करने वाले नेल्सन मंडेला और बाकी लोगों के संघर्ष के दौर में भी उन्होंने कई काम किए.

अंतरराष्ट्रीय अदालतों में भूमिका

नवी पिल्लै का करियर कई बड़े कानूनी संस्थानों से जुड़ा रहा है. वो साउथ अफ्रीका के हाई कोर्ट में न्यायाधीश रहीं. इसके बाद उन्होंने रवांडा के लिए बने अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायाधिकरण और अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय में भी न्यायिक जिम्मेदारियां निभाईं. इसके अलावा वो संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार उच्चायुक्त भी रह चुकी हैं. इस पद पर रहते हुए उन्होंने दुनिया भर में मानवाधिकारों की रक्षा और उल्लंघनों के खिलाफ कार्रवाई की वकालत की. उन्होंने फिलिस्तीनी क्षेत्रों से जुड़े संयुक्त राष्ट्र के स्वतंत्र जांच आयोग की अध्यक्षता भी की.

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इन मामलों में भी दिया योगदान

नवी पिल्लै के योगदान का एक बड़ा पहलू अंतरराष्ट्रीय कानून में यौन हिंसा को गंभीर अपराध के रूप में पहचान दिलाने से जुड़ा है. उन्होंने ये स्थापित करने में मदद की कि कुछ परिस्थितियों में बलात्कार और यौन हिंसा मानवता के खिलाफ अपराध ही नहीं, बल्कि नरसंहार का हिस्सा भी हो सकते हैं. ये बदलाव पीड़ितों को न्याय दिलाने की दिशा में बहुत बड़ा माना जाता है. इससे ये संदेश भी मजबूत हुआ कि युद्ध और संघर्ष के दौरान किए गए अपराधों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.

कानून का महत्व?

नोबेल समिति ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून शांति और सुरक्षा के लिए बहुत जरूरी है. जब ताकतवर देश या नेता खुद को कानून से ऊपर समझने लगते हैं, तो दुनिया में स्थिरता कमजोर होती है. नवी पिल्लै का काम इसी सोच को मजबूत करता है कि स्थायी शांति के लिए न्याय जरूरी है. उनकी जिंदगी ये दिखाती है कि अदालतें, कानून और मानवाधिकार संस्थाएं सिर्फ कागजी व्यवस्था नहीं, बल्कि हिंसा से प्रभावित लोगों के लिए उम्मीद का सहारा भी बन सकती हैं.

News Source: ANI

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