EU-China Trade War: चीन से बढ़ते निर्यात की वजह से यूरोप को रोजाना करीब 1 बिलियन अमेरिकी डॉलर का व्यापार घाटा हो रहा है. अब इसका सीधा असर यूरोप के रोजगार पर भी पड़ने की आशंका जताई जा रही है. बढ़ते व्यापार घाटे के बीच EU के नेता चीन के प्रति अधिक सख्त रुख अपनाने की ओर बढ़ रहे हैं. यूरोपीय आयोग के शीर्ष व्यापार दूत मारोस सेफकोविक चीनी वाणिज्य मंत्री वांग वेन्ताओ के साथ व्यापारिक संबंधों पर बातचीत करने के लिए चीन की राजधानी बीजिंग पहुंचे हैं. इस दौरे का मकसद चीन के साथ यूरोपीय संघ के करीब 360 अरब यूरो के व्यापार घाटे को कम करने के उपायों पर चर्चा करना है. इस साल की शुरुआत में सेफकोविक ने बीजिंग को व्यापार असंतुलन दूर करने के लिए सार्थक परिणाम देने की अक्टूबर तक की समयसीमा दी थी. 27 देशों वाले यूरोपीय संघ के राजनेता और अर्थशास्त्री चीन की भारी सब्सिडी और बढ़ते निर्यात को स्टील और ऑटोमोबाइल समेत यूरोप के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों के लिए बड़ी चुनौती मानते हैं. अमेरिका की ओर से चीन पर टैरिफ बढ़ाए जाने के बाद बीजिंग ने अपने कई उत्पादों के निर्यात को यूरोपीय संघ और अन्य बाजारों की ओर बढ़ाया है. वहीं, स्ट्रासबर्ग में यूरोपीय संसद में मंगलवार को हुई बहस के दौरान सांसदों ने चीन के साथ व्यापार को लेकर चिंता जताई और EU की व्यापार नीति को लेकर कड़े रुख की मांग की.

चीन को लेकर यूरोप में दिख रही एकता
EU ने चीन पर सख्ती बरतने के प्रस्ताव पर 454 से 86 वोट दिए. इसके मुताबिक चीन अपने बाजार नहीं खोलता है तो आर्थिक पारस्परिकता और आनुपातिक यूरोपीय संघ की प्रतिक्रिया के आह्वान पर केंद्रित था. वोट से पहले प्रस्ताव का नेतृत्व करने वाले बेल्जियम के सांसद हिल्डे वॉटमैन्स ने कहा कि यूरोप एक आर्थिक शक्ति है, अब समय आ गया है कि हम इसका इस्तेमाल करें. इस मुद्दे को लेकर यूरोप में एकता दिख रही है, लेकिन यह साफ नहीं है कि EU क्या कर सकता है या क्या करने को तैयार है. उसने चीन से आने वाले स्टील और ई-कॉमर्स के छोटे पार्सल पर पहले ही व्यापार से जुड़े उपाय लागू कर दिए हैं. दूसरी ओर फ्रांस के ‘हाई कमीशन फॉर स्ट्रैटेजी एंड प्लानिंग’ ने फरवरी में तेजी से कदम उठाने की मांग की थी. चीन के कई एक्सपोर्ट पर 30 प्रतिशत टैरिफ लगाना और चीनी करेंसी के मुकाबले यूरो की वैल्यू कम करना. बताया जा रहा है कि चीन में जर्मन कारों की बिक्री तेजी से गिर रही है, लेकिन चीन भारी सरकारी सब्सिडी की वजह से कम कीमत पर कारें बेचकर यूरोप के बाजार पर कब्जा करने की तैयारी में है. फॉक्सवैगन जैसी बड़ी कंपनियों में पहले ही बड़े पैमाने पर छंटनी हो चुकी है. फ्रांस और जर्मनी के एक पत्र के अनुसार, EU से चीन नीति पर बड़े पैमाने पर फिर से सोचने की मांग की गई थी. इसके अलावा यूरोपीय आयोग के लिए ‘ट्रेड बाजूका’ (जबरदस्ती रोकने वाला हथियार) का इस्तेमाल करना आसान बनाने का प्रस्ताव दिया गया था. यह उपायों का एक ऐसा सेट है जिसका पहले कभी इस्तेमाल नहीं किया गया है. इसका मकसद उन देशों से व्यापार और निवेश को रोकना या सीमित करना है जो EU के सदस्य देशों या कंपनियों पर अनुचित दबाव डालते हैं.

स्पेन का रुख चीन के प्रति कम आक्रामक रहा
हालांकि, EU के सभी देश चीन पर आर्थिक प्रतिबंध लगाने से सहमत नहीं है. यूरोजोन की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था स्पेन का हाल के वर्षों में चीन के प्रति रुख कम आक्रामक रहा है. प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने तीन साल में चार बार बीजिंग का दौरा किया है. आयरलैंड से लेकर बुल्गारिया तक के दक्षिणपंथी और वामपंथी सांसदों ने बुधवार को एक अनोखा गठबंधन बनाया और चीन के प्रति कड़े रुख की मांग करने वाले प्रस्ताव के खिलाफ वोट दिया. ब्रसेल्स में ‘यूरोपियन पॉलिसी सेंटर’ ने जून में कहा था कि यूरोप में बैटरी बनाने वाली कंपनियों, सोलर पैनल, स्टील, इलेक्ट्रिक वाहनों, केमिकल और मशीनरी के क्षेत्र में नौकरियों और क्षमता का तेजी से नुकसान हो रहा है. उन्होंने अमेरिकी ट्रेड एक्ट की धारा 301 की तर्ज पर एक व्यापार जांच संस्था बनाने की मांग की. यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इस घटना को यूरोप के लिए एक और ‘चीन शॉक’ बताया. लेयेन ने कहा कि यह वैसा ही है जैसा 2000 के दशक की शुरुआत में अमेरिका में हुआ था, जब अमेरिकी इलाकों में फैक्ट्रियों की लाखों नौकरियां खत्म हो गई थीं. यूरोपीय संघ (EU) की कमजोर होती अर्थव्यवस्था को घरेलू स्तर पर बड़े बदलाव और विदेशी व्यापार के मामले में ज्यादा आक्रामक नीति की जरूरत है. यह बात यूरोपीय संघ के इंटरनल थिंक टैंक, ‘यूरोपीय संघ सुरक्षा अध्ययन संस्थान’ (EUISS) के चीन मामलों के जानकार टिम रूहलिग ने भी कही.

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राजनीतिक नेतृत्व भी कुछ हद तक जिम्मेदार
टिम रूहलिग ने कहा कि इसके लिए यूरोपीय कारोबार और राजनीतिक नेतृत्व भी कुछ हद तक जिम्मेदार हैं. यह साफ है कि सिर्फ चीन से खुद को बचाए रखना ही भविष्य का रास्ता नहीं है. लेकिन भविष्य की टेक्नोलॉजी के लिए खुद को तैयार करने और आने वाले 15-20 सालों में मुकाबले में बने रहने के लिए आपको अपनी सुरक्षा तो करनी ही होगी. रूहलिग ने कहा कि चीन से पूरी तरह अलग हो जाना नामुमकिन है, जैसा कि यूक्रेन पर हमले के बाद EU ने रूस के साथ किया था. अब बीजिंग के साथ व्यापारिक रिश्तों को नए सिरे से तय करने की दिशा में तेजी से काम हो रहा है. रूहलिग ने सवाल किया कि हम किन मामलों में खुद को आजाद या कम से कम ज्यादा विविधता वाला बनाएं? किन मामलों में हम अब भी चीन के साथ मिलकर काम करें? ग्रीस के दौरे पर बुधवार को आए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने यूरोप से अमेरिका के साथ अपना गठबंधन मजबूत करने को कहा और यूरोप से अपनी लंबी नींद से जागने की अपील की. रुबियो ने कहा कि यूरोप और अमेरिका एक अहम मोड़ पर खड़े हैं. साथ ही अभी लिए गए फैसले ही यह तय करेंगे कि क्या पश्चिमी दुनिया, दुनिया में अपनी अगुवाई वाली जगह बनाए रखेगी या फिर कमजोरी, गुलामी और पतन वाले भविष्य को स्वीकार कर लेगी. उन्होंने कहा कि हम अभी कदम उठाने का फैसला करेंगे या फिर हमारे पास कुछ भी करने का विकल्प ही नहीं बचेगा.

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संरक्षणवाद से प्रतिस्पर्धात्मकता नहीं बढ़ सकती
इस हफ्ते बीजिंग में फ्रांस और जर्मनी ने अपने पत्र में चीनी एक्सोपोर्ट्स को लेकर सवाल खड़े किए. इस पर चीन के वाणिज्य मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने कहा कि EU को संरक्षणवादी उपाय अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने से बचना चाहिए. वाणिज्य मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि संरक्षणवाद से प्रतिस्पर्धात्मकता नहीं बढ़ सकती और सप्लाई चेन को अलग करने या काटने से खुद को कोई फायदा नहीं होगा, बल्कि दूसरों को नुकसान ही होगा. यूरोपीय आयोग के आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका के बाद चीन EU का दूसरा सबसे बड़ा सामान व्यापार भागीदार है. चीन की कस्टम एजेंसी के अनुसार, इस साल के पहले आठ महीनों में EU को चीन का निर्यात 15.3 प्रतिशत बढ़ा, जबकि EU से उसका आयात 6.2 प्रतिशत बढ़ा. पिछले महीने चीन के सरकारी अखबार ‘ग्लोबल टाइम्स’ के एक संपादकीय में लिखा था. EU में चीन के खिलाफ व्यापार युद्ध छेड़ने की क्षमता नहीं है. अगर वह सच में ऐसा करने के लिए दृढ़ है, तो कोशिश करके देख ले. पिछले साल अमेरिका के टैरिफ लागू होने के बाद यूरोप के साथ-साथ दक्षिण-पूर्व एशिया, लैटिन अमेरिका और अफ्रीका में चीन का निर्यात बढ़ा, लेकिन फिर भी 2025 में उसे वैश्विक स्तर पर 1.2 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर का व्यापार अधिशेष (ट्रेड सरप्लस) मिला.
‘द कॉन्फ्रेंस बोर्ड’ के एशिया-पैसिफिक सीनियर इकोनॉमिस्ट मैक्स ज़ेंगलीन ने कहा कि अब तक अमेरिकी टैरिफ और अन्य व्यापार प्रतिबंधों के बावजूद चीन की निर्यात मशीनरी काफी मजबूत बनी हुई है. पिछले सप्ताहांत, शेफकोविच और वांग के बीच बैठक से पहले चीन ने EU से होने वाले P-नाइट्रोटोल्यूइन (P-Nitrotoluene) के निर्यात की एंटी-डंपिंग जांच शुरू की. इसका इस्तेमाल डाई और फ़ार्मास्यूटिकल्स में किया जाता है. यह जांच तब शुरू की गई जब बीजिंग ने पिछले महीने चेतावनी दी थी कि अगर EU ने सख्त संरक्षणवादी व्यापार उपाय लागू किए तो वह जवाबी कार्रवाई करेगा.
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चीनी अर्थव्यवस्था निर्यात पर टिकी
ज़ेंगलीन ने आगे कहा कि चीन बाहरी दबाव के कई दौरों से गुजर चुका है और अब तक उसने अपनी राह बदलने के लिए मजबूर करने की कोशिशों का डटकर सामना किया है. चीन की अर्थव्यवस्था काफी हद तक निर्यात पर टिकी है क्योंकि घरेलू मांग सुस्त बनी हुई है. EU बड़ी मात्रा में चीनी लिथियम-आयन बैटरी और हाइब्रिड इलेक्ट्रिक वाहन आयात करता है और चीनी कार निर्माता यूरोप में अपनी उत्पादन क्षमता भी बढ़ा रहे हैं. बैंक ऑफ अमेरिका के अर्थशास्त्रियों ने लिखा है कि जहां चीन के ट्रेड सरप्लस (व्यापार अधिशेष) ने उसके मुख्य व्यापारिक साझेदारों के बीच चिंताएं बढ़ा दी हैं. वहीं, वाशिंगटन में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुई बैठक के बाद अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक संबंध काफी हद तक स्थिर नजर आ रहे हैं. अब ध्यान चीन-EU संबंधों की ओर जा रहा है. जेंगलीन ने आगे कहा कि जब EU के साथ बातचीत की बात आती है, तो यूरोप में चीनी निवेश बीजिंग के लिए मोल-भाव का एक अहम जरिया हो सकता है. खासकर EU के सदस्य देश पूंजी, नौकरियां और नए मैन्युफैक्चरिंग प्रोजेक्ट्स को आकर्षित करने के लिए एक-दूसरे से होड़ कर रहे हैं.
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