Home Top News पीएम का निर्देश और किराना हिल्स…, पूर्व CDS अनिल चौहान ने Op सिंदूर पर किए बड़े खुलासे

पीएम का निर्देश और किराना हिल्स…, पूर्व CDS अनिल चौहान ने Op सिंदूर पर किए बड़े खुलासे

by Neha Singh 26 August 2026, 8:03 AM IST (Updated 26 August 2026, 8:37 AM IST)
26 August 2026, 8:03 AM IST (Updated 26 August 2026, 8:37 AM IST)
Ex CDS Anil Chauhan

Ex-CDS Anil Chauhan: पूर्व CDS जनरल अनिल चौहान (रिटायर्ड) ने मंगलवार को ऑपरेशन सिंदूर के बारे में बड़े खुलासे किए हैं. उन्होंने एक इवेंट में ऑपरेशन के उद्देश्य, पाकिस्तान की परमाणु फैसिलिटी को निशाना बनाने के बारे में चीजें साफ कर दी हैं. पूर्व CDS जनरल अनिल चौहान ने बताया कि पहलगाम हमले के बाद 29 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में हुई मीटिंग में यह तय हुआ कि “हमें पाकिस्तान को एक बड़ा सबक सिखाना चाहिए और इसके लिए उनकी सोच से बाहर का एक्शन लेना चाहिए, क्योंकि भारत क्रॉस-बॉर्डर आतंकवाद को बर्दाश्त नहीं करेगा. यह पहली बार है जब जनरल चौहान ने उस मीटिंग में लिए गए फैसलों की जानकारी पब्लिक में साझा की है.

रक्षा मंत्री ने चुना टारगेट

चौहान के मुताबिक, 23 से 29 अप्रैल के बीच मिलिट्री लीडरशिप और सरकार के बीच लगातार मीटिंग हुईं. चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी की चार-पांच बार मीटिंग हुई और NSA के साथ भी कई राउंड की बातचीत हुई. मिलिट्री के पास एक्शन के लिए कई ऑप्शन थे, जिन पर NSA के साथ बातचीत हुई. 29 अप्रैल की मीटिंग ने मिलिट्री लीडरशिप को साफ पॉलिटिकल दिशा दी. पीएम मोदी ने सेनाओं से कहा कि उन पर एक्शन लेने के लिए तुरंत कोई पॉलिटिकल प्रेशर नहीं है. उन्हें अपनी तैयारी और हालात के हिसाब से एक टाइमलाइन तय करनी चाहिए, लेकिन यह पक्का करना चाहिए कि ऑपरेशन में नाकामी की कोई गुंजाइश न रहे और कार्रवाई के पक्के सबूत मौजूद हों.

चौहान ने बताया कि इस मीटिंग में बहावलपुर को भी संभावित टारगेट की लिस्ट में शामिल किया गया,भले ही यह दूसरे टारगेट की तुलना में काफी दूर था. उन्होंने कहा कि यह फैसला रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के सुझाव पर लिया गया था. टारगेट को लिस्ट में तब शामिल किया गया जब प्रधानमंत्री ने कहा कि हमें कुछ बड़ा करने की जरूरत है. बहावलपुर को शामिल करने से एयर पावर की जरूरत बढ़ गई, क्योंकि ड्रोन या दूसरे हथियार उस इलाके तक नहीं पहुंच पा रहे थे और कामयाबी की गारंटी नहीं थी.

हर समय 100 प्रतिशत तैयार नहीं रहती आर्मी

चौहान के मुताबिक, आर्मी का अलर्ट लेवल और हमले का दिन और समय जैसे ज़रूरी ऑपरेशनल फैसले चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी लेवल पर लिए गए थे. यह पूरा प्लान 23 अप्रैल से लगभग 6 मई तक किए गए लगातार एनालिसिस पर आधारित था. उन्होंने कहा कि मिलिट्री लीडरशिप को हमेशा मौजूद ऑप्शन में से सही एक्शन का रास्ता तय करने के लिए साफ पॉलिटिकल डायरेक्शन की जरूरत होती है. पूर्व CDS ने यह भी कहा कि कोई भी आर्मी हर समय 100% तैयार नहीं रहती है. आर्म्ड फोर्सेज में हमेशा कमियां होती हैं और दुश्मन का असेसमेंट कभी भी पूरी तरह से नहीं होता है. उनके मुताबिक, यह एक लगातार चलने वाला प्रोसेस है. इसके बावजूद, तीनों सेनाओं ने सरकार को साफ कर दिया था कि सरकार जो भी फैसला लेगी, आर्मी उसे सिर्फ एक या दो दिन में नहीं, बल्कि कई दिनों में असरदार तरीके से लागू कर पाएगी.

जारी है ऑपरेशन सिंदूर

भारत सरकार और आर्मी ने ऑपरेशन सिंदूर को एक नई स्ट्रेटेजिक रेड लाइन के तौर पर पेश किया है. चौहान ने कहा कि दुश्मन के खिलाफ एक ही स्ट्रेटेजी बार-बार नहीं दोहराई जा सकती है और हालात के हिसाब से नई स्ट्रेटेजी बनानी होंगी. उन्होंने यह भी कहा कि ऑपरेशन सिंदूर का एक बड़ा हिस्सा पूरा हो चुका है, लेकिन ऑपरेशन अभी भी चल रहा है. ऑपरेशन सिंदूर, 22 अप्रैल, 2025 को पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद भारत की मिलिट्री कार्रवाई थी. मई 2025 में भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकवादी ढांचे से जुड़ी नौ जगहों को निशाना बनाया, जिसमें 100 से ज्यादा आतंकी मारे गए थे. चौहान के अनुसार, इस ऑपरेशन के लिए राजनीतिक दिशा, मिलिट्री तैयारी, इंटेलिजेंस असेसमेंट और टारगेट कन्फर्मेशन का तालमेल बहुत जरूरी था.

किरना हिल्स से क्यों उठा धूआं

चौहान ने कहा, “एयर मार्शल भारती से किराना हिल्स के बारे में एक सवाल पूछा गया था. मुझे लगता है कि मुझे यह साफ करना चाहिए. यह कई बार पूछा गया है कि क्या किराना हिल्स पर हमला हुआ था, क्योंकि वहीं उनके (पाकिस्तान के) न्यूक्लियर प्लांट हैं.” एयर मार्शल भारती “सही कह रहे थे कि हमने किराना हिल्स को टारगेट नहीं किया था.” पूर्व CDS ने कहा, “मैं शायद कुछ हद तक समझा सकता हूं… उन हमलों से पहले, हमने सरगोधा में कई ड्रोन भेजे थे और किराना हिल्स सरगोधा से लगभग 10 किलोमीटर उत्तर में है. तो ये ड्रोन सरगोधा और उसके आस-पास के रडार को खोज रहे थे. इसके लिए एक टाइम लिमिट होती है, जिसका मतलब है कि वे लगभग दो घंटे तक हवा में मंडराते हैं और अगर उन्हें कोई टारगेट नहीं मिलता है, तो वे नीचे आकर कहीं क्रैश हो जाते हैं.” पूर्व CDS ने कहा, “हो सकता है कि यह उन पहाड़ियों में से किसी एक से टकराया हो. तो यह एक वजह हो सकती है… क्योंकि पाकिस्तानी मीडिया ने किराना हिल्स से धुआं निकलते हुए कुछ तस्वीरें भी दिखाईं.”

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News Source: PTI

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