Home Top News पाक में सियासी टकराव, राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद इमरजेंसी लागू; विपक्ष बोला- बड़ी राजनीतिक भूल

पाक में सियासी टकराव, राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद इमरजेंसी लागू; विपक्ष बोला- बड़ी राजनीतिक भूल

by Sachin Kumar 11 October 2026, 7:03 PM IST (Updated 11 October 2026, 7:04 PM IST)
11 October 2026, 7:03 PM IST (Updated 11 October 2026, 7:04 PM IST)
Pak opposition parties slam imposition emergency KPK

Pakistan News: पाकिस्तान में इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) और केंद्र सरकार के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है. खैबर पख्तूनख्वा में रविवार को राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी की ओर से चुनी हुई सरकार को भंग करने और आपातकाल लागू करने के फैसले के बाद राजनीतिक विवाद गहरा गया है. इस कदम को PTI के शासन को कमजोर करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है. इसके विरोध में प्रांत में प्रदर्शन शुरू हो गए हैं. वहीं, विपक्षी दलों और वकीलों के एक संगठन ने आपातकाल और गवर्नर शासन लागू करने के फैसले की कड़ी निंदा की है. उन्होंने इसे प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ सरकार की बड़ी राजनीतिक भूल बताते हुए कहा कि जनता इस फैसले को कभी स्वीकार नहीं करेगी.

राष्ट्रपति के बयान में कही गई ये बात

राष्ट्रपति जरदारी की मंजूरी मिलने के बाद शहबाज शरीफ सरकार ने खैबर पख्तूनख्वा (KPK) में इमरजेंसी और गवर्नर शासन लागू कर दिया. प्रधानमंत्री कार्यालय ने अपने एक बयान में कहा कि कैबिनेट सदस्यों ने स्थिति को समीक्षा की और प्रांतीय सरकार द्वारा आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई से जानबूझकर पीछे हटने पर ध्यान दिया. राष्ट्रपति की घोषणा के मुताबिक, संविधान के अनुच्छेद 232(1) और 234(1) के तहत एक आदेश जारी किया. इसमें उत्तर-पश्चिमी प्रांत में बढ़ते आतंकवादी हमलों और संवैधानिक व्यवस्था के ठप होने का हवाला दिया गया.

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विधायी शक्तियां अपने हाथों में लेने की अनुमति देती है

प्रांत की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री को प्रस्ताव दिया गया कि वह राष्ट्रपति को सलाह दें कि वे अपनी संवैधानिक शक्तियों का इस्तेमाल करें. साथ ही अनुच्छेद 232 और 234 के तहत प्रांत में इमरजेंसी लागू करें. इमरजेंसी पाकिस्तान की संघीय सरकार को सुरक्षा संकट या संवैधानिक शासन के ठप होने की स्थिति में किसी प्रांत में मुख्य कार्यकारी और विधायी शक्तियां अपने हाथ में लेने की अनुमति देती है.

इमरान की रिहाई के लिए कर रहे थे प्रदर्शन

राष्ट्रपति की तरफ से आदेश के बाद मुख्यमंत्री, प्रांतीय मंत्री, सलाहकार, विशेष सहायक और एडवोकेट जनरल तुरंत छोड़ देंगे. यह कदम मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी के नेतृत्व में चल रहे विरोध मार्च के बीच उठाया गया है. वे लगातार जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की रिहाई और उनके इलाज की मांग कर रहे हैं. यह मार्च 4 अक्टूबर को लक्की मरवत से शुरू हुआ था और प्रांत के कई जिलों से होकर गुजरा है. पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के चेयरमैन बैरिस्टर गोहर खान का कहना है कि हम इस कदम को पूरी तरह से खारिज करते हैं. KPK की जनता का जनादेश उनका संवैधानिक और कानूनी अधिकार है. इस जनादेश को नज़रअंदाज़ करके, प्रांतीय स्वायत्तता को कमज़ोर करके और संघ तथा प्रांत के बीच टकराव पैदा करके न तो शांति स्थापित की जा सकती है और न ही स्थिरता लाई जा सकती है.

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