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SC का कड़ा रुख: हम नहीं सुनेंगे भूषण तिवारी एनकाउंटर केस, सीधे पटना हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाइए

by Sanjay Kumar Srivastava 30 June 2026, 12:45 PM IST (Updated 30 June 2026, 12:46 PM IST)
30 June 2026, 12:45 PM IST (Updated 30 June 2026, 12:46 PM IST)
सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख: हम नहीं सुनेंगे भूषण तिवारी एनकाउंटर केस, सीधे पटना हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाइए

Bharat Tiwari Encounter: सुप्रीम कोर्ट (SC) ने मंगलवार को बिहार पुलिस एनकाउंटर में एक्टिविस्ट भरत भूषण तिवारी की हत्या की जांच के लिए स्वतंत्र कमेटी बनाने वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया. जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस शील नागू की बेंच ने याचिकाकर्ता विशाल तिवारी को पटना हाई कोर्ट जाने का निर्देश दिया. सुनवाई के दौरान जब बेंच ने याचिकाकर्ता से उनकी पहचान पूछी तो वकील ने इसे जनहित याचिका (PIL) बताया.कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि वे इस पर सुनवाई नहीं करेंगे, लेकिन याचिकाकर्ता को हाई कोर्ट जाने की पूरी छूट है.

परिवार का दावा- सरेंडर के बाद मारी गई गोली

याचिका में सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (CBI) से जांच की भी मांग की गई थी, जिसमें कहा गया था कि इस मामले में तुरंत स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की ज़रूरत है. बिहार के भोजपुर ज़िले के बिलौटी गांव के रहने वाले भूषण तिवारी की 17 जून को हुई हत्या पर विवाद खड़ा हो गया है. उनके परिवार का दावा है कि पुलिस की गोली लगने से पहले उन्होंने सरेंडर कर दिया था और अपना हथियार फेंक दिया था. बिहार सरकार ने शनिवार को इस घटना की न्यायिक जांच की घोषणा की थी. अपनी याचिका में तिवारी ने कहा है कि लोकतांत्रिक समाज में पुलिस को सज़ा देने वाली अथॉरिटी नहीं बनने दिया जा सकता, क्योंकि यह अधिकार सिर्फ़ न्यायपालिका के पास है.

पूरे बिहार में एनकाउंटर तेजी से बढ़े

बिहार की घटना का ज़िक्र करते हुए याचिका में कहा गया है कि इससे पुलिस के काम करने के तरीकों और एनकाउंटर के दौरान बल के इस्तेमाल पर बहस छिड़ गई है. याचिका में कहा गया है कि पिछले कुछ सालों में बिना कानूनी प्रक्रिया के हत्याओं (एक्स्ट्रा-ज्यूडिशियल किलिंग) की घटनाएं बढ़ी हैं, जो कानून के शासन के लिए एक बड़ी चुनौती है. इसमें दावा किया गया है कि हाल ही में पूरे बिहार में पुलिस एनकाउंटर तेज़ी से बढ़े हैं. इसमें दावा किया गया कि तिवारी की हत्या संदिग्ध लग रही थी. इसमें सुप्रीम कोर्ट के 2014 के एक फ़ैसले का ज़िक्र किया गया, जिसमें पुलिस एनकाउंटर में मौत या गंभीर चोट लगने के मामलों की जांच के लिए कई दिशा-निर्देश जारी किए गए थे.

पुलिस ने भूषण तिवारी को मानसिक रूप से बताया अस्वस्थ

याचिका में कहा गया कि फर्जी एनकाउंटर या पुलिस कस्टडी/जेल में आरोपी की मौत/हत्या कानून के शासन को कमज़ोर करती है. अगर इन हत्याओं को यह कहकर सही ठहराया जाता है कि मारा गया आरोपी गैंगस्टर था या उसका आपराधिक रिकॉर्ड था, तो यह समाज को आंख के बदले आंख वाले कानून की ओर ले जाएगा. याचिका में केंद्र सरकार से यह निर्देश देने की भी मांग की गई है कि वह सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को 2014 के फ़ैसले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय किए गए निर्देशों और दिशा-निर्देशों का पालन करने के लिए एडवाइज़री जारी करे.

इलाज के लिए पटना मेडिकल कॉलेज और अस्पताल ले जाते समय घायल तिवारी की मौत हो गई. मंगलवार को पुलिस के शुरुआती बयान में तिवारी को मानसिक रूप से अस्वस्थ बताया गया था, जबकि परिवार के सदस्यों समेत अन्य लोगों ने उन्हें एक ऐसे एक्टिविस्ट के तौर पर बताया जो प्रशासन के सामने लगातार स्थानीय मुद्दे उठाते थे. पुलिस के बयान में कहा गया है कि तिवारी ने लगातार पुलिस पर गोलियां चलाईं, जिसके जवाब में आत्मरक्षा में पुलिस को भी गोली चलानी पड़ी और इस दौरान उनके पैर में गोली लग गई.

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News Source: PTI

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