UP STF Action: उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने नोएडा में हवाला नेटवर्क चलाने और मनी लॉन्ड्रिंग के लिए कई शेल कंपनियां बनाने के आरोप में तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है. इनमें एक चीनी नागरिक भी शामिल है, जो कथित तौर पर अपना वीजा खत्म होने के बाद भी भारत में गैर-कानूनी तरीके से रह रहा था. गुरुवार शाम को बताया गया आरोपी नागरिक लियाओ लोंगहुई अभी नोएडा के सेक्टर 93 में रहता है, संजीव कुमार गाजियाबाद का रहने वाला है और कौशलेंद्र औरैया का रहने वाला है.
नकली कंपनियों के जरिए विदेश भेजा जाता था पैसा
STF नोएडा यूनिट के एडिशनल सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस, राजकुमार मिश्रा ने कहा कि तीनों को बुधवार रात सेक्टर 93 में पूर्वांचल सिल्वर सिटी से संदिग्ध फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन की जांच के बाद गिरफ्तार किया गया. STF के मुताबिक, गैंग ने भारत और चीन में नकली कंपनियां बनाईं और हवाला चैनलों के जरिए गैर-कानूनी तरीके से बड़ी रकम विदेश में ट्रांसफर की. STF को पांच लैपटॉप, नौ मोबाइल फोन, एक टैबलेट, एक नकली आधार कार्ड, दो पैन कार्ड, 10 कंपनी स्टैम्प, दो चीनी पासपोर्ट, एक चीनी पहचान पत्र, अलग-अलग बैंकों की 11 चेक बुक, इनवॉइस, 4.72 करोड़ रुपये के चेक और 15,400 रुपये कैश मिले.
रात को हुई गिरफ्तारी
मिश्रा ने कहा कि जांच के दौरान STF को YTL मैन्युफैक्चरिंग प्राइवेट लिमिटेड का पता चला, जो नोएडा के पते पर रजिस्टर्ड कंपनी थी और सेक्टर 83 से चल रही थी. फर्म को लियाओ लोंगहुई चला रहा था. STF ने लियाओ को उसके भारतीय साथियों, संजीव कुमार और कौशलेंद्र के साथ कंपनी के डॉक्यूमेंट्स के साथ पूछताछ के लिए बुलाया. पूछताछ के दौरान, लियाओ वीजा और कंपनी से जुड़े पूरे रिकॉर्ड नहीं दिखा सका और जांचकर्ताओं को बताया कि बाकी डॉक्यूमेंट्स पूर्वांचल सिल्वर सिटी में उसके घर पर रखे हैं. मिश्रा ने बताया कि बाद में जगह की तलाशी लेने पर कई संदिग्ध शेल कंपनियों से जुड़े चेक बुक और डॉक्यूमेंट्स मिले, जिसके बाद बुधवार रात करीब 10 बजे तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया.
ऐसे चल रहा था पूरा खेल
पूछताछ के दौरान, लियाओ ने जांचकर्ताओं को बताया कि वह 2018 में भारत आया था और YTL मैन्युफैक्चरिंग प्राइवेट लिमिटेड को मैनेज कर रहा था, जो उसके ससुर मुगेन यू और साले क्विपिंग टैंग की बनाई हुई कंपनी थी. पुलिस ने बताया कि कंपनी चीन से बढ़ी हुई कीमतों पर कच्चा माल इंपोर्ट करके मोबाइल फोन कवर बनाती थी और तैयार प्रोडक्ट्स को दिल्ली के करोल बाग और नेहरू प्लेस मार्केट में अंडर-इनवॉइसिंग के जरिए बेचती थी. STF के मुताबिक, बाकी पैसे कथित तौर पर हवाला चैनलों के ज़रिए विदेश ट्रांसफर किए गए और आखिर में वापस चीन भेज दिए गए.
ये हैं शेल कंपनियों के नाम
जांच करने वालों ने आरोप लगाया कि लियाओ ने YTL मैन्युफैक्चरिंग प्राइवेट लिमिटेड के कई कर्मचारियों को अपने डॉक्यूमेंट्स देने के लिए उकसाया, जिनका इस्तेमाल फिर शेल कंपनियां बनाने के लिए किया गया. इनमें JNS इंफ्रा हाइट्स प्राइवेट लिमिटेड, रेफान एंटरप्राइजेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, टाइडीडेस्क एसेंशियल प्राइवेट लिमिटेड और Z वन एंटरप्राइजेज शामिल हैं. STF ने कहा कि एक और शेल कंपनी, हनुराज ट्रेडिंग सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड, कथित तौर पर उसके ड्राइवर देवेंद्र के नाम पर शुरू की गई थी और उसका इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग के लिए किया गया था.
2020 में खत्म हो गया वीजा
पुलिस ने आरोप लगाया कि पूरा रैकेट लियाओ, कौशलेंद्र और कुमार, एक चार्टर्ड अकाउंटेंट की मदद से चला रहा था, जिस पर शेल कंपनियों को शामिल करने और हवाला ट्रांजैक्शन के लिए इस्तेमाल होने वाले बैंक अकाउंट खोलने में अहम भूमिका निभाने का शक है. STF ने कहा कि जांच में यह भी पता चला कि लियाओ का भारतीय वीजा 2020 में खत्म हो गया था और वह तब से देश में गैर-कानूनी तरीके से रह रहा था, जबकि कथित तौर पर शेल कंपनियों के नेटवर्क के जरिए हवाला ऑपरेशन और दूसरे फाइनेंशियल क्राइम कर रहा था. पुलिस ने कहा कि आगे की जांच चल रही है.
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News Source: PTI
