CJP-AAP-CONGRESS: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के छात्रों और युवाओं के बड़े आंदोलन ने दिल्ली की राजनीति में हलचल मचा दी है, जिससे कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (AAP) के बीच की दरार एक बार फिर खुलकर सामने आ गई है.
AAP की सक्रियता: आम आदमी पार्टी इस आंदोलन को पूरी ताकत से हाईजैक करने की कोशिश में है. मनीष सिसोदिया, संजय सिंह और आतिशी जैसे शीर्ष नेता लगातार जंतर-मंतर पर पहुंचकर मंच संभाल रहे हैं. आप का पूरा आईटी सेल इस प्रदर्शन के वीडियो को सोशल मीडिया पर वायरल कर इसे अन्ना हजारे जैसा आंदोलन बनाने में जुटा है.
कांग्रेस का पलटवार: कांग्रेस ने भी इस दौड़ में पीछे न रहते हुए सीधे प्रधानमंत्री आवास (लोक कल्याण मार्ग) के बाहर बड़ा धरना शुरू कर दिया. राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने हिरासत में लिए जाने के बावजूद इस मुद्दे पर बड़ा सियासी दांव खेला है, जिससे ‘आप’ खेमे में साफ तौर पर असहजता देखी जा रही है.

आंदोलन का चेहरा बनने की होड़ तेज
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दोनों दल इंडिया ब्लॉक में होने के बावजूद युवाओं के इस ऐतिहासिक गुस्से का नेतृत्व अपने हाथ में लेना चाहते हैं. यही वजह है कि दोनों पार्टियों के बीच इस जमीनी आंदोलन का चेहरा बनने की अंदरूनी होड़ तेज हो गई है. आम आदमी पार्टी (AAP) और कांग्रेस के बीच चल रहा तनाव जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के मंच पर तब और बढ़ गया, जब विरोध प्रदर्शन पर कब्ज़ा करने के आरोप लगे. बुधवार को AAP के एक नेता और कांग्रेस के करीबी माने जाने वाले एक एक्टिविस्ट के बीच हुई बातचीत से यह मतभेद खुलकर सामने आ गया. कैमरे की नज़र से बची इस बातचीत में उस विरोध प्रदर्शन पर राजनीतिक कब्ज़े की लड़ाई दिखी, जो हाल के वर्षों में युवाओं के नेतृत्व में हुए सबसे बड़े आंदोलनों में से एक बनकर उभरा है.
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आंदोलन तेज होने पर सक्रिय हुए राहुल
जून 2025 में I.N.D.I.A ब्लॉक से बाहर निकलने वाली AAP के लिए, कांग्रेस का समर्थन बहुत देर से आया और उससे भी अहम बात यह है कि यह समर्थन ऐसी शर्तों पर था, जिससे AAP को लगा कि आंदोलन कमज़ोर हो गया. एक AAP नेता ने PTI को बताया कि कांग्रेस ने अपने सोशल मीडिया इकोसिस्टम के ज़रिए शुरू से ही इस आंदोलन को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की. जब यह नैरेटिव काम नहीं आया, तो उसने कहना शुरू कर दिया कि भीड़ नहीं है और आंदोलन फ्लॉप हो गया है. जब आंदोलन ने अपनी एक अलग पहचान बना ली, तो कांग्रेस ने उस पर कब्ज़ा करने की कोशिश की.
नेता के अनुसार, सोशल मीडिया पर कांग्रेस समर्थकों ने शुरू में इस अभियान को ‘इंडिया अगेंस्ट करप्शन (IAC) 2.0’ के तौर पर पेश करने की कोशिश की. यह उस भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन का ज़िक्र था जिससे AAP का जन्म हुआ था. UPA को सत्ता से हटाने में अहम भूमिका निभाने वाला वह आंदोलन ही कांग्रेस और AAP के बीच अविश्वास की मुख्य वजह है.
AAP ने दिल्ली में कांग्रेस को किया खत्म
कांग्रेस का मानना है कि भ्रष्टाचार-विरोधी अभियान को RSS-BJP का गुप्त समर्थन हासिल था. यह अविश्वास तब और गहरा गया जब अरविंद केजरीवाल ने AAP बनाई, जिसने 2013 में दिल्ली में कांग्रेस के 15 साल के शासन को खत्म किया, 2022 में पंजाब में उसे हराया और उसी साल गुजरात में पांच विधानसभा सीटों और लगभग 13 प्रतिशत वोट शेयर के साथ एक बड़ी ताकत बनकर उभरी.

AAP नेता सौरभ भारद्वाज ने PTI को बताया कि कांग्रेस ने शुरू में I.N.D.I.A ब्लॉक के सहयोगियों को अपने दूसरे दर्जे के नेताओं को भेजने के लिए मजबूर किया. फिर, जब आंदोलन ने खुद ही ज़ोर पकड़ा, तो उन्होंने इसे अपने कब्ज़े में लेने की कोशिश की. अगर उन्हें सच में लगता था कि यह AAP का प्रोजेक्ट है, तो वे बाद में इसमें क्यों शामिल हुए? कल जंतर-मंतर पर मेरी योगेंद्र यादव से बातचीत हुई, जो कांग्रेस को सलाह देते हैं.AAP का यह भी मानना है कि कांग्रेस ने आंदोलन के एक अहम मोड़ पर भ्रम पैदा किया. उन्होंने एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक के साथ अलग से बातचीत करने की कोशिश की, जो CJP के नेतृत्व वाले विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए थे और 28 जून से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं.
वांगचुक के संपर्क में रही कांग्रेसः AAP
AAP पदाधिकारियों के अनुसार, 20 जुलाई को संसद तक CJP के मार्च से ठीक पहले, कांग्रेस ने वांगचुक को यह संकेत देने के लिए मना लिया कि अगर राजनीतिक दल उन्हें संसद में यह मुद्दा उठाने का भरोसा दें, तो वे अपना अनशन खत्म कर देंगे. उनका आरोप है कि 19 जुलाई की शाम को उनकी पत्नी गीतांजलि वांग्मो ने मंच से यह घोषणा CJP नेतृत्व से सलाह किए बिना की थी. CJP पदाधिकारी भी इस बात से सहमत हैं. एक अन्य AAP नेता ने दावा किया कि इससे भ्रम पैदा हुआ और आंदोलन को नुकसान पहुंचा, जबकि यह उसके सबसे बड़े लामबंदी कार्यक्रमों में से एक था. उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस की राज्यसभा सांसद सागरिका घोष के 19 जुलाई के सोशल मीडिया पोस्ट ने, जिसमें घोषणा की गई थी कि सांसद अगले दिन वांगचुक से मिलेंगे, भ्रम को और बढ़ा दिया.
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कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन पर AAP को संदेह
20 जुलाई को छात्रों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई के बाद प्रधानमंत्री आवास के बाहर कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन को लेकर भी AAP को संदेह है. उनके नेताओं का कहना है कि जब तक कार्रवाई ने छात्रों के विरोध को राष्ट्रीय मुद्दा नहीं बना दिया, तब तक राहुल गांधी इस पर चुप रहे. एक AAP नेता ने कहा कि उन्होंने 20 जुलाई की शाम तक एक शब्द भी नहीं कहा, जब पुलिस ने छात्रों के साथ बर्बरता की थी.

बुधवार को जब एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी से AAP के आरोपों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि कांग्रेस छात्र आंदोलन का पूरा समर्थन कर रही है और AAP पर कोई सीधी टिप्पणी करने से बचते रहे. इस बीच, AAP नेताओं ने वांग्मो की टिप्पणियों की ओर इशारा किया, जिन्होंने गुरुवार को एक टेलीविज़न इंटरव्यू में कांग्रेस के रवैये पर सवाल उठाए थे. उन्होंने कहा कि हम हर नेक इरादे वाले व्यक्ति के साथ हैं. हर कोई जानता है कि (प्रधानमंत्री आवास के बाहर कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन) दिखावटी था. अगर जंतर-मंतर पर सब मिलकर विरोध करते तो यह ज़्यादा ईमानदार कोशिश होती.
विपक्षी सांसदों की अलग-अलग कोशिशों से बढ़ी खाई
वांग्मो ने कहा कि जनता को अब और बेवकूफ नहीं बनाया जा सकता. नेता अब और गुमराह नहीं कर सकते. एक और घटना जिसने कभी सहयोगी रहे इन दलों के बीच दूरियां और बढ़ा दीं, वह थी विपक्षी सांसदों की अलग-अलग कोशिशें, जिनके ज़रिए वे वांगचुक से अपना अनशन खत्म करने की अपील करने के लिए समर्थन जुटा रहे थे.
घोष ने एक पहल की अगुवाई की और पत्र सौंपने से पहले कांग्रेस नेता शशि थरूर समेत 19 सांसदों के हस्ताक्षर जुटाए. उसी दिन बाद में AAP के संजय सिंह ने एक अलग प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया और एक और पत्र सौंपा, जिस पर विपक्ष के अलग-अलग दलों के 55 सांसदों के हस्ताक्षर थे. इनमें समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, CPI(M), शिवसेना (UBT), DMK, RJD, BJD, आज़ाद समाज पार्टी, CPI, नेशनल कॉन्फ्रेंस और झारखंड मुक्ति मोर्चा शामिल थे.
AAP को मिला युवा वोटरों से फिर से जुड़ने का मौका
कांग्रेस के एक लोकसभा सांसद ने AAP के कांग्रेस के प्रति आक्रामक रुख को केजरीवाल की मौजूदा राजनीतिक चुनौतियों से जोड़कर देखा, खासकर 2025 में दिल्ली में पार्टी की हार और 2027 में होने वाले पंजाब विधानसभा चुनावों के संदर्भ में. सांसद ने कहा कि छात्रों के नेतृत्व वाले इस आंदोलन ने AAP को शहरी और युवा वोटरों से फिर से जुड़ने का मौका दिया है, जिन्होंने कभी पार्टी को सत्ता दिलाई थी.
साथ ही, पंजाब में सत्ताधारी पार्टी होने के नाते वह कांग्रेस के साथ बहुत ज़्यादा सहयोग करते हुए नहीं दिख सकती, क्योंकि कांग्रेस वापसी की कोशिश कर रही है. इस मुद्दे से कैसे निपटा जाए, इसे लेकर कांग्रेस में भी मतभेद दिख रहे हैं. ऐसा लगा जैसे कोई गलती सुधारी जा रही हो, बाद में सेवा दल ने जंतर-मंतर पर डेरा डाले प्रदर्शनकारियों के लिए खाना और पीने का पानी भेजा. विपक्ष की दूसरी पार्टियों का मानना है कि इस टकराव का कोई फ़ायदा नहीं है.
धरना स्थल पर पहुंचे थे पवन खेड़ा
I.N.D.I.A ब्लॉक का हिस्सा रही शिवसेना (UBT) के नेताओं ने निजी तौर पर दोनों पक्षों से तनाव कम करने की अपील की है. बुधवार को केजरीवाल ने सांसद संजय राउत के घर पर शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे से मुलाक़ात की. पता चला है कि शिवसेना नेताओं ने AAP को सलाह दी है कि राजनीतिक कड़वाहट छात्रों के अभियान पर हावी नहीं होनी चाहिए. भारद्वाज ने भी इस राजनीतिक खींचतान के महत्व को कम करके दिखाने की कोशिश की.

उन्होंने PTI से कहा कि छात्रों और Gen Z को इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता. असल में यह अभियान सड़कों और इंस्टाग्राम पर चल रहा है. उन्होंने संकेत दिया कि राजनीतिक वर्ग Gen Z के अलग-अलग तरह से लोगों को एकजुट करने के तरीक़ों से चलने वाले आंदोलन को गलत समझने का जोखिम नहीं उठा सकता. जहां कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने विरोध स्थल का दौरा किया और सोनम वांगचुक से मुलाकात की, वहीं कांग्रेस सेवा दल के प्रमुख बीवी श्रीनिवास ने CJP नेतृत्व का मज़ाक उड़ाया.
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