Judges Retirement Age: अगर सब कुछ ठीक रहा तो न्यायिक अधिकारियों की रिटायरमेंट की उम्र बढ़ सकती है. सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा है कि राज्य सरकारें न्यायिक अधिकारियों की रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाने का विरोध करने के लिए वित्तीय बोझ का हवाला नहीं दे सकतीं. चीफ़ जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने राज्यों की चिंताओं को गलतफहमी बताया. कोर्ट ने सभी राज्यों से जजों की रिटायरमेंट उम्र पर फिर से विचार कर दो हफ़्ते के भीतर फ़ैसला लेने को कहा है.
अनुभवी और पुराने जज वित्तीय रूप से कम खर्चीले
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अनुभवी न्यायिक अधिकारियों को बनाए रखने से उन पर आने वाला वित्तीय बोझ, उन्हें रिटायर करने और खाली हुई जगहों को भरने पर आने वाले खर्च से कम हो सकता है. इसलिए रिटायरमेंट की उम्र न बढ़ाने के लिए राज्य सरकारों द्वारा बताई गई वजहें सही नहीं हैं. अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मुद्दे पर तुरंत फिर से विचार किया जाना चाहिए और दो हफ़्ते के अंदर एक स्वतंत्र और व्यावहारिक फ़ैसला लिया जाना चाहिए. बेंच ने कहा कि अगर कोई राज्य सरकार रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाने का फ़ैसला करती है, तो इस फ़ैसले का फ़ायदा उन ज्यूडिशियल अफ़सरों को भी मिलेगा जो इस बीच रिटायर हो रहे हैं.
62 साल में रिटायर होते हैं हाई कोर्ट के जज
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से कहा था कि वे ज्यूडिशियल अफ़सरों की रिटायरमेंट की उम्र 60 से बढ़ाकर 61 साल करने पर विचार करें. बेंच एक ऐसी याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें पूरे देश में ज़िला न्यायपालिका के जजों की रिटायरमेंट की उम्र 60 से बढ़ाकर 62 साल करने की मांग की गई थी. बेंच ने सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया कि वे इस मामले पर अपने-अपने अधिकार क्षेत्र वाले हाई कोर्ट से सलाह-मशविरा करके फ़ैसला लें. अगर वे सहमत होते हैं, तो ऐसे राज्यों में ज्यूडिशियल अफ़सरों को 61 साल की उम्र तक नौकरी जारी रखने की इजाज़त दी जाएगी. नौकरी जारी रखने का यह फ़ैसला इस कार्यवाही के अंतिम नतीजे पर निर्भर करेगा. सुप्रीम कोर्ट के जजों की रिटायरमेंट की उम्र 65 साल है, जबकि हाई कोर्ट के जज 62 साल की उम्र में रिटायर होते हैं.
जस्टिस शेट्टी आयोग की सिफारिश हो गई थी खारिज
यह मामला सुप्रीम कोर्ट के 2002 के उस फ़ैसले के संदर्भ में उठा है जिसमें जस्टिस के. जगन्नाथ शेट्टी कमीशन की सिफ़ारिश को राज्यों ने मानने से इनकार कर दिया गया था. कमीशन ने ज़िला जजों की रिटायरमेंट की उम्र 62 साल करने का प्रस्ताव दिया था. तब से, तेलंगाना और मध्य प्रदेश समेत कुछ राज्यों ने रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाने की दिशा में कदम उठाए हैं. पिछले साल 20 नवंबर को तत्कालीन CJI बीआर गवई की अध्यक्षता वाली बेंच ने मध्य प्रदेश के ज्यूडिशियल अधिकारियों की रिटायरमेंट की उम्र 60 से बढ़ाकर 61 साल कर दी थी. बेंच ने अपने अंतरिम आदेश में तेलंगाना हाई कोर्ट के इसी तरह के फैसले का ज़िक्र किया था. बेंच ने सवाल किया कि जब राज्य सरकार ऐसा करने को तैयार थी, तो ज्यूडिशियल अधिकारियों को यह राहत क्यों नहीं दी जानी चाहिए.
हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: कम आय वाले पति को राहत, कहा- कमाने वाली पत्नी भी उठाए घर और बच्चे का खर्च
News Source: PTI
