Monsoon Session: मानसून सत्र का हर दिन अब टकराव की नई तस्वीर लेकर सामने आ रहा है. बुधवार को भी संसद के दोनों सदनों में विपक्ष के भारी हंगामे के चलते सामान्य कामकाज नहीं हो सका. राम मंदिर चढ़ावा , जंतर-मंतर पर छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई और गृह मंत्री अमित शाह से जवाब की मांग को लेकर विपक्ष ने सरकार को घेरा. इस बीच राजनीतिक गतिरोध के बीच सरकार ने एक बड़ा दांव चलते हुए महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे अहम विधेयकों को पारित कराने के लिए विशेष सत्र बुलाने का प्रस्ताव भी विपक्ष के सामने रखा है.
हंगामे के बीच विधेयक पास
इससे पहले बुधवार को लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसद नारेबाजी करते हुए वेल में पहुंच गए. कांग्रेस, समाजवादी पार्टी समेत कई विपक्षी दल राम मंदिर चढ़ावा मामले में कथित गड़बड़ी और छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार से जवाब मांगते रहे. लगातार हंगामे के कारण लोकसभा की कार्यवाही पहले दोपहर 2 बजे तक और बाद में पूरे दिन के लिए स्थगित करनी पड़ी. हालांकि, हंगामे के बीच सरकार ने ‘The Bankers’ Book Evidence Bill, 2026′ को लोकसभा से पारित करा लिया.
राज्यसभा में भी गतिरोध बरकरार
उधर राज्यसभा में भी तस्वीर अलग नहीं रही. विपक्ष के विरोध के चलते सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से नहीं चल सकी और बार-बार व्यवधान देखने को मिला. सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी रहा, लेकिन किसी बड़े विधायी कामकाज पर चर्चा संभव नहीं हो सकी. संसद की कार्यवाही शुरू होने से पहले विपक्ष ने अपनी ताकत का प्रदर्शन भी किया. लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा और I.N.D.I.A ब्लॉक के अन्य नेताओं ने प्रेरणा स्थल स्थित महात्मा गांधी की प्रतिमा से मकर द्वार तक मार्च निकाला.
इस मार्च के जरिए विपक्ष ने 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ हुई पुलिस कार्रवाई, अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा मामले में कथित हेराफेरी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ विरोध दर्ज कराया. विपक्ष का कहना है कि सरकार इन मुद्दों पर चर्चा से बच रही है, जबकि सरकार का आरोप है कि विपक्ष केवल संसद की कार्यवाही बाधित करना चाहता है.
रिजूजु ने राहुल गांधी से की मुलाकात
इसी गतिरोध के बीच केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजूजु ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से मुलाकात की और विशेष सत्र का प्रस्ताव रखा. सूत्रों के मुताबिक, सरकार ने 16, 17 और 18 अगस्त को तीन दिवसीय विशेष सत्र बुलाने का संकेत दिया है. इस विशेष सत्र में महिला आरक्षण लागू करने की प्रक्रिया से जुड़े कदम, परिसीमन विधेयक और FCRA संशोधन विधेयक जैसे महत्वपूर्ण प्रस्ताव लाए जा सकते हैं. सरकार की कोशिश है कि इन अहम विधेयकों को मौजूदा राजनीतिक गतिरोध से अलग रखते हुए विशेष सत्र में पारित कराया जाए.
विपक्ष पर कार्यवाही बाधित करने का आरोप
हालांकि विपक्ष की ओर से इस प्रस्ताव पर अभी अंतिम प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. यह ख़बर ऐसे समय आई है जब संसद के भीतर टकराव लगातार गहराता जा रहा है. विपक्ष अपने मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति पर कायम है, जबकि सरकार विपक्ष पर संसद की कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगा रही है. ऐसे माहौल में अगर विशेष सत्र बुलाया जाता है, तो महिला आरक्षण, परिसीमन और एफसीआरए जैसे अहम विधेयकों पर देश की राजनीति एक नए दौर में प्रवेश कर सकती है. अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या सरकार और विपक्ष के बीच गतिरोध टूटेगा या फिर संसद का शेष सत्र भी हंगामे की भेंट चढ़ेगा.
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