Court Decision: राजकोट कोर्ट ने महज 44 दिनों में सुनवाई पूरी करते हुए आरोपी को मौत की सजा सुना दी. उप मुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने कहा कि गुजरात सरकार हर बेटी की सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है.
Court Decision: राजकोट कोर्ट ने महज 44 दिनों में सुनवाई पूरी करते हुए आरोपी को मौत की सजा सुना दी. विशेष पॉक्सो न्यायाधीश वीए राणा ने मध्य प्रदेश के अलीराजपुर निवासी आरोपी रामसिंह दुडवा (32) को रेप और गंभीर यौन उत्पीड़न के लिए बाल यौन संरक्षण अधिनियम (पॉक्सो) और भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत दोषी ठहराया.फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए उप मुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने कहा कि गुजरात सरकार हर बेटी की सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और ऐसी घटनाओं के प्रति शून्य सहिष्णुता की नीति अपनाती है. यह घटना 4 दिसंबर को राजकोट जिले के अटकोट कस्बे के बाहरी इलाके में घटी. आरोपी ने बच्ची को उस समय अगवा कर लिया जब वह अपने चचेरे भाइयों के साथ एक खेत में खेल रही थी. तीन बच्चों के पिता दुडवा ने बच्ची को पास की झाड़ियों में ले जाकर उसके साथ रेप किया. उसने लोहे की रॉड से भी उसके साथ यौन उत्पीड़न किया और उसे खून से लथपथ और दर्द से तड़पता हुआ छोड़कर फरार हो गया.
आरोपी ने पुलिसकर्मियों पर भी किया था हमला
पुलिस ने उसे 8 दिसंबर को गिरफ्तार कर लिया. जब पुलिसकर्मी सबूत जुटा रहे थे, तब आरोपी ने लोहे की रॉड से पुलिसकर्मियों पर हमला करने की कोशिश की. बचाव में पुलिस ने गोली चलाई जो उसके पैर में लगी. अटकोट पुलिस ने उसके खिलाफ मामला दर्ज किया. पुलिस ने 19 दिसंबर को आरोपपत्र दाखिल किया और अदालत ने 12 जनवरी को उसे दोषी ठहराया. अदालत ने दुडवा को दुर्लभतम मामला मानते हुए मौत की सजा सुनाई. घटनास्थल से मिले मानव बाल के डीएनए का मिलान आरोपी के डीएनए से हो गया था. इसके अलावा जांच के दौरान जब्त की गई रॉड से प्राप्त रक्त के नमूने का मिलान पीड़िता के रक्त से हुआ. पीड़िता का बयान इस मामले में निर्णायक साबित हुआ. पीड़िता के परिवार ने अदालत को पत्र लिखकर त्वरित सुनवाई और आरोपी के लिए मृत्युदंड की मांग की थी.
निर्दोष बेटी को मिला न्यायः उप मुख्यमंत्री
फैसले के बाद उप मुख्यमंत्री संघवी ने कहा कि गुजरात सरकार का स्पष्ट संदेश: हमारी बेटियों पर हमला = जीवन का अंत. उप मुख्यमंत्री और गृह मंत्री के रूप में मैं यह स्पष्ट कर रहा हूं कि गुजरात में लड़कियों और महिलाओं के खिलाफ अपराधों के लिए हमारी नीति बिल्कुल स्पष्ट है: शून्य सहनशीलता. उन्होंने कहा कि अटकोट पॉक्सो मामले में FIR से लेकर सजा तक की पूरी प्रक्रिया मात्र 40 दिनों में पूरी हो गई. उन्होंने लिखा कि यह सिर्फ एक मामला नहीं है. यह एक कड़ा संदेश है: बेटियों पर हाथ उठाने वालों के लिए कोई दया नहीं, केवल कठोर दंड. मैं इस सफल कार्रवाई के लिए राजकोट ग्रामीण पुलिस, सरकारी वकीलों और पूरी न्यायिक प्रणाली को हार्दिक बधाई देता हूं. उनकी तत्परता, समर्पण और व्यावसायिकता के कारण एक निर्दोष बेटी को समय पर न्याय मिला.
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News Source: Press Trust of India (PTI)
