Tribunal Compensation: UP रोडवेज बस की टक्कर से मारे गए व्यक्ति के परिवार को 49 लाख रुपए से ज़्यादा का मुआवज़ा मिलेगा. यह आदेश दिल्ली ट्रिब्यूनल ने दिया है. ट्रिब्यूनल ने माना कि बस ड्राइवर की लापरवाही से हादसा हुआ था. दिल्ली मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल ने एक होटल मालिक के परिवार को 49.77 लाख रुपये का मुआवज़ा देने का आदेश दिया है. 2023 में गलत दिशा से आ रही उत्तर प्रदेश रोडवेज की एक बस ने उनकी कार को टक्कर मार दी थी, जिससे उनकी मौत हो गई थी.
बड़ौत में 1 दिसंबर, 2023 को हुआ था हादसा
प्रिसाइडिंग ऑफिसर विक्रम, मृतक सतेंद्र सिंह के परिवार की ओर से दायर क्लेम याचिका पर सुनवाई कर रहे थे. उन्होंने माना कि 1 दिसंबर, 2023 को उत्तर प्रदेश के बड़ौत में एक बस डिपो के पास हुए इस जानलेवा हादसे के लिए बस ड्राइवर की लापरवाही ज़िम्मेदार थी. 9 अक्टूबर के आदेश में ट्रिब्यूनल ने कहा कि यह हादसा प्रतिवादी नंबर 1 (बस ड्राइवर) द्वारा संबंधित वाहन को तेज़ी और लापरवाही से चलाने के कारण हुआ. ट्रिब्यूनल ने इस दलील को खारिज कर दिया कि हादसा मृतक की लापरवाही के कारण हुआ था. ट्रिब्यूनल ने पाया कि साइट प्लान से पता चलता है कि बस कानूनी रूप से तय रास्ते के बजाय सड़क की गलत दिशा में चली गई थी.
गलत दिशा से आ रही थी बस
ट्रिब्यूनल ने कहा कि मृतक डिपो पार करने ही वाला था और अगर बस गलत तरफ न मुड़ी होती, तो कोई हादसा नहीं होता. यह हादसा तब हुआ जब मृतक सतेंद्र सिंह अपनी कार से अपने पैतृक गांव लौट रहे थे और विनोद कुमार द्वारा चलाई जा रही बस ने उन्हें टक्कर मार दी. सिंह की मौके पर ही मौत हो गई. ट्रिब्यूनल ने गौर किया कि बस ड्राइवर इस बात को साबित नहीं कर पाया कि मृतक तेज़ रफ़्तार से गाड़ी चला रहा था और उसने खुद बस को टक्कर मारी थी. ट्रिब्यूनल ने यह भी देखा कि ड्राइवर ने मामले में गलत तरीके से फंसाए जाने का आरोप लगाते हुए कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई थी.
30 दिनों के भीतर UPSRTC को देनी होगी राशि
ट्रिब्यूनल ने बैंक स्टेटमेंट के आधार पर मृतक की मासिक आय 30,000 रुपये तय की. इन स्टेटमेंट में हर महीने 25,575 रुपये से लेकर 30,776 रुपये तक क्रेडिट एंट्री दिखाई गई थी. उनके परिवार का दावा था कि वे होटल चलाकर महीने में 50,000 से 60,000 रुपये कमाते थे, लेकिन वे अपनी कमाई का कोई दस्तावेज़ी सबूत पेश नहीं कर पाए. सभी तथ्यों पर विचार करते हुए ट्रिब्यूनल ने मृतक के परिवार को अलग-अलग मदों में 47.25 लाख रुपये का मुआवज़ा देने का आदेश दिया. ट्रिब्यूनल ने बस ड्राइवर और उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (UPSRTC) को निर्देश दिया कि वे 30 दिनों के भीतर 7.5 प्रतिशत ब्याज के साथ यह राशि जमा करें. ऐसा न करने पर, देरी की अवधि के लिए 10 प्रतिशत सालाना की दर से ब्याज भी लागू होगा.
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