Iran-US War: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ अब तक के सबसे बड़े आर्थिक युद्ध और उसे पूरी तरह अलग-अलग करने का ऐलान किया है. इस रणनीतिक कदम को ट्रंप ने ‘इकोनॉमिक डी-डे’ (Economic D-Day) नाम दिया है.
अमेरिका ने क्यों दी आर्थिक धमकी?
अमेरिका का मुख्य उद्देश्य ईरान को बातचीत की मेज पर लाने और उसकी परमाणु व सैन्य गतिविधियों को पूरी तरह रोकने के लिए मजबूर करना है. ट्रंप का कहना है कि उन्होंने ईरान को समझौते के कई मौके दिए, लेकिन वह नाकाम रहा. हालिया महीनों में दोनों देशों के बीच बढ़े सैन्य और कूटनीतिक तनाव के बाद अमेरिका ने अपनी ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक फ्यूरी’ नीति के तहत दबाव और कड़ा कर दिया है. ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक फ्यूरी'(Operation Economic Fury) संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा 2026 में ईरान के खिलाफ शुरू किया गया एक आर्थिक और रणनीतिक दबाव अभियान है.
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ईरान पर इसका क्या पड़ेगा असर?
इस धमकी और कड़े प्रतिबंधों का ईरान की पहले से ही कमजोर अर्थव्यवस्था पर बेहद गंभीर असर पड़ेगा.
तेल निर्यात में भारी गिरावट: ईरान की कमाई का मुख्य जरिया तेल और गैस है. अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी और प्रतिबंधों से ईरान की तेल बिक्री लगभग ठप हो सकती है.
आर्थिक अस्थिरता: ईरान में महंगाई दर पहले ही 77% के पार पहुंच चुकी है. इस नई आर्थिक चोट से ईरानी मुद्रा का मूल्य और गिरेगा, जिससे देश में आंतरिक असंतोष और विरोध प्रदर्शन तेज हो सकते हैं.

अलग-थलग करने की धमकी का असर
ट्रंप ने साफ चेतावनी दी है कि जो भी देश, बैंक या कंपनी ईरान से व्यापार करेगी या उसे किसी भी तरह की मदद देगी, उसे अमेरिका के साथ व्यापार करने पर 25% का भारी टैरिफ (आयात शुल्क) चुकाना होगा.
व्यापारिक मित्रों को झटका: इसका असर चीन, भारत, रूस, तुर्किये और यूएई जैसे देशों पर पड़ेगा जो ईरान से तेल या ऊर्जा उत्पाद खरीदते हैं.
वैश्विक वित्तीय अलगाव: कोई भी अंतरराष्ट्रीय बैंक अमेरिकी बाजार खोने के डर से ईरान से वित्तीय लेन-देन नहीं करना चाहेगा. इससे ईरान दुनिया से पूरी तरह कट जाएगा.
किन-किन देशों ने की निंदा?
ईरान का पलटवार: ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने इसे ‘आर्थिक आतंकवाद’ कहा है. उन्होंने कहा कि ट्रंप अमेरिका के आंतरिक 40 ट्रिलियन डालर से अधिक के कर्ज संकट से ध्यान भटकाने के लिए यह कर रहे हैं.
अन्य देशों की चिंता: चीन और रूस ने अमेरिकी एकतरफा प्रतिबंधों की आलोचना की है. भारत और तुर्किये जैसे अमेरिकी सहयोगियों ने भी चिंता जताई है, क्योंकि इस फैसले से वैश्विक व्यापार प्रणाली प्रभावित होगी और तेल की कीमतें बढ़कर 94 डालर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं.
ट्रंप अब तक क्या-क्या पाबंदियां लगा चुके हैं?
तेल और वित्तीय नाकेबंदी: ईरान के जहाजरानी, बैंकिंग और मुख्य तेल क्षेत्रों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया जा चुका है.
क्रिप्टोकरेंसी और संपत्तियां फ्रीज: अमेरिकी ट्रेजरी ने ईरानी संस्थाओं से जुड़ी करीब $500 मिलियन की क्रिप्टोकरेंसी और अरबों डॉलर के विदेशी फंड को फ्रीज कर दिया है.
थर्ड-पार्टी प्रतिबंध: ईरान के सैन्य नेटवर्क को गुप्त रूप से तेल बेचने में मदद करने वाली 12 से अधिक विदेशी शेल कंपनियों पर हाल ही में प्रतिबंध लगाए गए हैं.
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सीरिया के विदेश मंत्री का पाकिस्तान दौरा
ईरान ने गुरुवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से आर्थिक नुकसान और अलग-थलग करने की धमकियों को खारिज कर दिया, जबकि ब्रिटेन और अन्य देशों ने एक विवादित बस्ती परियोजना को लेकर इज़राइल की निंदा की. इस बीच, सीरिया के विदेश मंत्री ने पाकिस्तान का दौरा किया, जो अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने की कोशिश कर रहा है.
ईरान ने ट्रंप की आर्थिक धमकी की निंदा की
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने अपने देश के ख़िलाफ़ दी गई आर्थिक धमकियों को खारिज करते हुए कहा है कि ऐसी विफल नीतियां ईरानियों के बीच और ज़्यादा दुश्मनी पैदा करेंगी. अरागची की यह टिप्पणी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के ख़िलाफ़ कड़े आर्थिक कदम उठाने की धमकी देने के कुछ घंटों बाद आई.

ट्रंप ने अभूतपूर्व स्तर पर आर्थिक युद्ध और अलग-थलग करने का वादा किया, लेकिन इसके बारे में ज़्यादा जानकारी नहीं दी. सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में अरागची ने कहा कि इन धमकियों का मकसद अमेरिकी जनता का ध्यान देश की आर्थिक समस्याओं से हटाना है. उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका का आर्थिक आतंकवाद वैश्विक अर्थव्यवस्था और दुनिया भर के देशों की राष्ट्रीय संप्रभुता के लिए खतरा है.
वेस्ट बैंक में प्रस्तावित बस्ती परियोजना की UK ने की आलोचना
कई देशों ने यरूशलेम के पास इज़राइल की एक विवादित बस्ती परियोजना में हुई ताज़ा घटनाक्रम की निंदा की है. इस परियोजना से कब्ज़े वाले वेस्ट बैंक के दो हिस्से हो जाएंगे. इज़राइल के निर्माण और आवास मंत्रालय ने यरूशलेम के पूर्व में खुली ज़मीन पर कई कॉम्प्लेक्स बनाने के लिए टेंडर जारी किया है, जिनमें कुल मिलाकर 1,200 से ज़्यादा घर होंगे.
यह उस परियोजना का ताज़ा कदम है जिस पर दो दशकों से ज़्यादा समय से विचार चल रहा है. आलोचकों का कहना है कि इससे उस इलाके में एक अखंड फ़िलिस्तीनी राज्य के गठन में बाधा आएगी. ब्रिटिश विदेश मंत्री एड मिलिबैंड ने टेंडर जारी करने को अस्वीकार्य और विनाशकारी कदम बताया और बस्ती बसाने वालों की हिंसा और आतंकवाद की निंदा की.
मिस्र और जॉर्डन ने भी की इजराइल की निंदा
बुधवार को जारी एक बयान में उन्होंने कहा कि ब्रिटिश सरकार ने इसे तुरंत वापस लेने की मांग की है और इज़राइली चार्ज डी’अफेयर्स को तलब किया है. मिस्र और जॉर्डन ने भी इज़राइल के इस कदम की निंदा की. काहिरा का कहना है कि इससे पूर्वी यरूशलेम अपने फ़िलिस्तीनी परिवेश से अलग-थलग पड़ जाएगा. इज़राइल के विदेश मंत्री गिदोन सार ने गुरुवार को जवाब देते हुए इज़राइल की धरती पर – जिसमें विवादित इलाका भी शामिल है – यहूदी लोगों के अपने राष्ट्रीय घर को फिर से बसाने के ऐतिहासिक अधिकार का बचाव किया. सार ने फ़िलिस्तीनी चरमपंथ को नज़रअंदाज़ करते हुए सिर्फ़ इज़राइल को दोषी ठहराने के लिए ब्रिटेन की सरकार की आलोचना की. तुर्की ने इस बात से इनकार किया है कि उसका कोई प्रतिनिधिमंडल सीरिया के उस एयर बेस पर गया था जिस पर इज़राइल ने हमला किया था.
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उत्तरी सीरिया के एयर बेस दौरे का तुर्की ने किया इनकार
तुर्की ने इस बात से इनकार किया है कि उसके किसी सैन्य प्रतिनिधिमंडल ने उत्तरी सीरिया के उस एयर बेस का दौरा किया था जिस पर इज़राइल ने हवाई हमले किए थे. साथ ही, तुर्की ने सीरिया की सेना को फिर से खड़ा करने की कोशिशों में उसका समर्थन जारी रखने का वादा किया है. मंगलवार तड़के इज़राइली हमलों में अबू दुहूर बेस को निशाना बनाया गया, जिससे नुकसान तो हुआ लेकिन कोई हताहत नहीं हुआ. इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय ने कहा कि इज़राइल ने बेस पर हमला इसलिए किया क्योंकि सीरिया वहां तुर्की सैनिकों को तैनात करने की इजाज़त देकर सुरक्षा मामलों में बनी यथास्थिति को तोड़ने की कगार पर था.
अबू अल-ज़ुहूर एयर बेस पर हमले की निंदा
सीरियाई अधिकारियों का कहना है कि इज़राइली हमले से पहले तुर्की के एक प्रतिनिधिमंडल ने वहां चल रहे पुनर्निर्माण कार्यों का जायज़ा लेने के लिए बेस का दौरा किया था. तुर्की के रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि हम स्पष्ट करते हैं कि अबू अल-ज़ुहूर एयर बेस पर इज़राइल के हमले से पहले या हमले के दौरान वहां तुर्की का कोई सैन्य प्रतिनिधिमंडल मौजूद नहीं था. मंत्रालय ने कहा कि तुर्की सीरिया के बुनियादी ढांचे और सैन्य क्षमता बढ़ाने की कोशिशों में समर्थन जारी रखेगा. इस हमले की तुर्की, सीरिया और कई अरब देशों ने निंदा की है.
पाकिस्तान में मध्य पूर्व के हालात पर चर्चा
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने बताया कि सीरिया के विदेश मंत्री असद अल-शिबानी बातचीत के लिए इस्लामाबाद पहुंचे हैं. इस बातचीत में क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है. यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब कुछ दिन पहले ही इज़राइल ने उत्तरी सीरिया में एक एयर बेस पर हवाई हमले किए थे, जिससे नुकसान तो हुआ लेकिन कोई हताहत नहीं हुआ.
पाकिस्तानी अधिकारियों का कहना है कि देश का राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व ईरान और अमेरिका, दोनों के संपर्क में है. वे तनाव कम करने और बातचीत फिर से शुरू करने की कोशिश कर रहे हैं, क्योंकि जून में हुए समझौते की 60 दिन की समय-सीमा खत्म हो गई है. यह समझौता पाकिस्तान ने क्षेत्रीय देशों की मदद से करवाया था.
हूती हमले में मारे गए पाकिस्तानी क्रू सदस्यों के शव लाए गए स्वदेश
बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य में तंजानिया के झंडे वाले एक कमर्शियल जहाज़ पर पिछले हफ़्ते हुए हूती हमले में मारे गए दो पाकिस्तानियों के शव पाकिस्तान वापस भेज दिए गए हैं. विदेश मंत्री इशाक डार ने X पर एक पोस्ट में बताया कि हमले में घायल हुए छह पाकिस्तानी नाविक भी सुरक्षित देश लौट आए हैं. डार ने मेडिकल मदद समेत सहयोग के लिए सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय का धन्यवाद किया. डार ने कहा कि पाकिस्तान इस हमले की कड़ी निंदा करता है और दोहराता है कि समुद्री यात्रियों की सुरक्षा हर समय सुनिश्चित की जानी चाहिए.
ओमान ने समुद्री सुरक्षा के प्रति दोहराई अपनी प्रतिबद्धता
ओमान के एक अधिकारी ने कहा कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना पूरे इलाके की सुरक्षा और समृद्धि से अलग नहीं किया जा सकता. अपने जापानी समकक्ष के साथ एक प्रेस ब्रीफिंग में बोलते हुए ओमान के विदेश मंत्री बद्र अल-बुसैदी ने कहा कि इस जलडमरूमध्य में स्थायी सुरक्षा के लिए इलाके में स्थायी शांति ज़रूरी है, जिसे संयम और लगातार कूटनीति के ज़रिए ही हासिल किया जा सकता है.

इससे पहले हफ़्ते में ईरान ने घोषणा की थी कि उसने ओमान के साथ इस जलडमरूमध्य से जहाज़ों की आवाजाही के लिए एक रूपरेखा पर सहमति बना ली है. यह जलडमरूमध्य दोनों देशों के बीच स्थित है और दोनों पक्ष एक संयुक्त बयान के विवरण को अंतिम रूप देने के लिए काम कर रहे हैं. 28 फरवरी को ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से शिपिंग बाधित हुई है और यह जलडमरूमध्य लगभग बंद हो गया है. युद्ध से पहले जो ईरान पर अमेरिका और इज़राइल के हमलों से शुरू हुआ था, दुनिया के व्यापारिक तेल और प्राकृतिक गैस का लगभग पांचवां हिस्सा फारस की खाड़ी के मुहाने पर स्थित इस जलमार्ग से होकर गुज़रता था.
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