Home Latest News & Updates जब 1 वोट से गिर गई थी अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार, ऐसे कवि से बने प्रधानमंत्री, पढ़ें उनकी अद्भुत कविताएं

जब 1 वोट से गिर गई थी अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार, ऐसे कवि से बने प्रधानमंत्री, पढ़ें उनकी अद्भुत कविताएं

by Neha Singh 16 August 2026, 4:24 PM IST
16 August 2026, 4:24 PM IST
Atal Bihar Vajpayee

Atal Bihar Vajpayee: मैं जी भर जिया, मैं मन से मरूं, लौटकर आऊंगा, कूच से क्यों डरूं….पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की ये पक्तियां सुनकर जोश भर जाता है. आज अटल बिहारी वाजपेयी की आठवीं पुण्यतिथि है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और BJP के सीनियर नेताओं ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की पुण्यतिथि पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी और भारत की तरक्की में उनकी बेमिसाल भूमिका को याद किया.

भारत रत्न से सम्मानित अटल बिहारी वाजपेयी न सिर्फ एक अच्छे राजनेता थे, बल्कि एक संवेदन शील कवि, एक बेहतरीन वक्ता और एक शानदार पत्रकार भी थे. उनकी भाषा में सरलता और उनके शब्दों में देश के लिए गहरा प्यार झलकता था. अटल बिहारी वाजपेयी वो शख्सियत थी, जिनकी विपक्षी पार्टियां तक बहुत सम्मान करती थी. उन्हें सच में भारतीय राजनीति का “अजातशत्रु” (जिसका कोई दुश्मन न हो) कहा जाता था. पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने एक बार संसद में उन्हें “भारतीय राजनीति का भीष्म पितामह” कहा था, जिससे पता चलता है कि उनका कद विचारधारा की सीमाओं से परे था. उन्होंने अपने राजनीतिक सफर काफी दिलचस्प रहा, जिसे हर किसी को जानना चाहिए. आज वाजपेयी जी की पुण्यतिथि पर जानें उनके राजनीतिक जीवन की दिलचस्प बातें.

प्रधानमंत्री मोदी ने किया याद

पीएम मोदी समेत BJP के सभी दिग्गज नेता और मंत्रियों ने दिल्ली में यमुना किनारे बने वाजपेयी मेमोरियल ‘सदैव अटल’ पर जाकर उन्हें श्रद्धांजलि दी. पीएम ने कहा, “अटल जी को उनकी ‘पुण्य तिथि’ पर याद कर रहा हूं. एक असाधारण राजनेता, जिनके पास जबरदस्त विजन था, उन्होंने अपना जीवन हमारे देश की सेवा में लगा दिया.” उन्होंने आगे कहा कि वाजपेयी के शब्दों और कोशिशों ने पीढ़ियों को प्रेरित किया और उनके नेतृत्व ने देश को काफी मजबूत किया. सुशासन और जनता की भलाई पर उनका ध्यान हमेशा हमें रास्ता दिखाता रहेगा.”

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले में वाजपेयी जी की एक मूर्ति का अनावरण किया. उन्होंने वाजपेयी को एक देशभक्त राजनेता बताया जिन्होंने अपने जीवन का हर पल देश को समर्पित कर दिया. उन्होंने कहा, “एक तरफ उन्होंने न्यूक्लियर टेस्ट और कारगिल युद्ध के जरिए पूरी दुनिया को भारत की ताकत से वाकिफ कराया, वहीं दूसरी तरफ उनकी वैल्यू-बेस्ड पॉलिटिक्स ने पहली बार अंत्योदय और गुड गवर्नेंस के विजन को जमीन पर उतारा.” रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी वाजपेयी के स्मारक पर गए और कहा कि उनके नेतृत्व में भारत ने आर्थिक और सामाजिक विकास में नई ऊंचाइयां हासिल कीं. उन्होंने कहा, “भारत की तरक्की में उनके योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा. उनकी पर्सनैलिटी, आदर्श और देश की सेवा के लिए अटूट प्रतिबद्धता हमेशा हमारे लिए प्रेरणा का स्रोत रहेगा.” दिल्ली सरकार ने कम इनकम वाले परिवारों को साफ-सुथरा, सब्सिडी वाला खाना देने के लिए 25 नई ‘अटल कैंटीन’ शुरू की गईं.

पत्रकार से बने नेता

वाजपेयी का जन्म 25 दिसंबर, 1924 को ग्वालियर में हुआ था और 16 अगस्त, 2018 को नई दिल्ली में उनका निधन हो गया. अटल जी को कविता लिखने का हुनर ​​विरासत में मिला था. उनके पिता कृष्ण बिहारी वाजपेयी ग्वालियर रियासत के जाने-माने कवि और शिक्षक थे. अपने परिवार के माहौल की वजह से बचपन से ही कविता उनकी रगों में दौड़ती थी. किशोरावस्था में ही उन्होंने अपनी मशहूर कविता, “हिंदू तन, मन, हिंदू जीवन, रग-रग में हिंदू, मेरा परिचय” लिखी, जो उनके अंदर पनप रहे देशभक्ति के जज्बे को दिखाती थी. उनकी कविताएं सिर्फ भावनाओं को जाहिर नहीं करती थीं, बल्कि देश की मिट्टी, इतिहास और संस्कृति की झलक भी थीं.

वाजपेयी छात्र रहते हुए ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ गए थे. उन्होंने “राष्ट्रधर्म” और “पाञ्चजन्य” जैसी मैगजीन के एडिटर के तौर पर भी काम किया, जहां उनकी कलम और विचार और तेज हुए. 1951 में जब भारतीय जनसंघ की स्थापना हुई, तो अटल जी उसके संस्थापक सदस्य में शामिल हो गए. वे जनसंघ के डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के पर्सनल सेक्रेटरी और करीबी साथी बन गए, जिससे उन्हें भारतीय राजनीति को करीब से समझने का मौका मिला. 1957 में अटल जी पहली बार बलरामपुर (उत्तर प्रदेश) से लोकसभा के लिए चुने गए. पार्लियामेंट में उनके पहले भाषण से प्रभावित होकर, उस समय के प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने भविष्यवाणी की थी कि “यह नौजवान एक दिन भारत का प्रधानमंत्री बनेगा.”

बीजेपी के पहले प्रधानमंत्री

अपनी जबरदस्त हाजिरजवाबी और शालीन भाषा से वे संसद में विपक्ष की सबसे मशहूर और मजबूत आवाज बनकर उभरे. जब वे बोलते थे, तो विपक्ष के नेता भी उन्हें शांति और सम्मान के साथ सुनते थे. 1975 में जब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने देश में आपातकाल लागू किया तो उन्हें भी उस दौरान जेल हुई थी. इसके बाद 1977 में बनी जनता पार्टी की सरकार में वे भारत के विदेश मंत्री बने और संयुक्त राष्ट्र (UN) में पहला हिंदी भाषण देकर इतिहास रच दिया. 1980 में जनता पार्टी के खत्म होने के बाद, अटल जी ने एल.के. आडवाणी और दूसरे नेताओं के साथ मिलकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) की स्थापना की और इसके पहले राष्ट्रीय अध्यक्ष बने. शुरुआती दौर में 1984 के लोकसभा चुनाव में BJP को सिर्फ दो सीटें मिलीं, लेकिन अटल जी ने अपनी कविताओं के जरिए पार्टी कार्यकर्ताओं का हौसला बढ़ाया- “हार नहीं मानूंगा, रार नहीं ठानूंगा, काल के कपाल पर लिखता मिटाता हूं, गीत नया गाता हूं.” उनके इसी जज्बे ने बीजेपी को देश के कोने-कोने तक पहुंचाया. वे पहली बार प्रधानमंत्री बने, लेकिन बहुमत साबित न कर पाने की वजह से उनकी सरकार सिर्फ 13 दिन ही चली.

एक वोट से गिरी सरकार

1996 के आम चुनावों में देश की जनता ने किसी भी एक पार्टी को पूरी तरह से बहुमत (272 सीटें) नहीं दिया था. लेकिन इन चुनावों में भारतीय जनता पार्टी 161 सीटें जीतकर इतिहास में पहली बार संसद में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी. वहीं सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा और वह सिर्फ 140 सीटों पर सिमट कर रह गई. क्योंकि BJP सबसे बड़ी पार्टी थी, इसलिए उस समय के राष्ट्रपति डॉ. शंकर दयाल शर्मा ने संसदीय परंपराओं का पालन करते हुए, BJP के संसदीय दल के नेता अटल बिहारी वाजपेयी को सरकार बनाने न्योता दिया. राष्ट्रपति का न्योता स्वीकार करते हुए, अटल बिहारी वाजपेयी ने 16 मई, 1996 को पहली बार भारत के प्रधानमंत्री के तौर पर शपथ ली. यह पूरे देश के लिए ऐतिहासिक पल था. राष्ट्रपति ने उन्हें संसद में बहुमत साबित करने के लिए दो हफ्ते (31 मई तक) का समय दिया.

बहुमत के जादुई आंकड़े (272) तक पहुंचने के लिए, BJP को दूसरी क्षेत्रीय पार्टियों के समर्थन की जरूरत थी. अटल बिहारी वाजपेयी और उनकी पार्टी ने सहयोगियों को साथ लाने की पूरी कोशिश की, लेकिन कई क्षेत्रीय पार्टियां सेक्युलरिज्म के मुद्दे पर BJP के साथ आने को तैयार नहीं थीं. 27 मई, 1996 को जब संसद में नो-कॉन्फिडेंस मोशन पर बहस हुई, तो अटल बिहारी वाजपेयी को एहसास हुआ कि उनके पास बहुमत हासिल करने के लिए नंबर नहीं हैं. वोटिंग से ठीक पहले, उन्होंने संसद में एक ऐतिहासिक और इमोशनल भाषण दिया, जिसमें उन्होंने कहा- “सरकारें आएंगी-जाएंगी, पार्टियां बनेंगी-बिगड़ेंगी, मगर यह देश रहना चाहिए, इस देश का लोकतंत्र अमर रहना चाहिए.” उनकी यह पंक्तियां आज तक जनता को याद हैं.

यह देखते हुए कि संसद में उनके पास बहुमत नहीं है, अटल बिहारी वाजपेयी ने वोटिंग से ठीक पहले अपने इस्तीफे का ऐलान कर दिया. इस तरह, उनकी पहली सरकार सिर्फ 13 दिनों में गिर गई. हालांकि, इस इज्जतदार इस्तीफे और उनके शानदार भाषण ने पूरे देश के लोगों का दिल जीत लिया और उन्हें भविष्य के लिए एक मजबूत नेता के तौर पर उनकी छवि बनाई. उनका दूसरा कार्यकाल 19 मार्च 1998 से 13 अक्टूबर 1999 तक, केवल 13 महीने के लिए रहा. इस दौरान उन्होंने पोखरण में सफल न्यूक्लियर टेस्ट करके भारत को न्यूक्लियर पावर बनाया. इस सरकार के गिरने का मुख्य कारण इसकी सहयोगी AIADMK प्रमुख जे. जयललिता का समर्थन वापस लेना था. इसके बाद 13 अक्टूबर 1999 को अटल बिहारी वाजपेयी तीसरी बार देश के प्रधानमंत्री बने. इस बार उन्होंने अपने पांच साल के कार्यकाल को पूरा किया.

अटल जी की अद्भुत कविताएं

गीत नया गाता हूँ
गीत नया गाता हूँ
टूटे हुए तारों से फूटे बासंती स्वर
पत्थर की छाती मे उग आया नव अंकुर
झरे सब पीले पात कोयल की कुहुक रात
प्राची मे अरुणिम की रेख देख पता हूँ
गीत नया गाता हूँ
टूटे हुए सपनों की कौन सुने सिसकी
अन्तर की चीर व्यथा पलकों पर ठिठकी
हार नहीं मानूंगा, रार नहीं ठानूंगा,
काल के कपाल पे लिखता मिटाता हूँ
गीत नया गाता हूँ

मौत से ठन गई

जूझने का मेरा इरादा न था,
मोड़ पर मिलेंगे इसका वादा न था
रास्ता रोक कर वह खड़ी हो गई,
यों लगा जिंदगी से बड़ी हो गई
मौत की उमर क्या है? दो पल भी नहीं,
जिंदगी-सिलसिला, आज-कल की नहीं
मैं जी भर जिया, मैं मन से मरूं,
लौटकर आऊंगा, कूच से क्यों डरूं?
तू दबे पांव, चोरी-छिपे से न आ,
सामने वार कर फिर मुझे आजमा
मौत से बेखबर, जिंदगी का सफ़र,
शाम हर सुरमई, रात बंसी का स्वर…..

परिचय

मैं शंकर का वह क्रोधानल कर सकता जगती क्षार-क्षार,
डमरू की वह प्रलय-ध्वनि हूं जिसमें नचता भीषण संहार
रणचण्डी की अतृप्त प्यास, मैं दुर्गा का उन्मत्त हास,
मैं यम की प्रलयंकर पुकार, जलते मरघट का धुआंधार
फिर अन्तरतम की ज्वाला से, जगती में आग लगा दूं मैं,
यदि धधक उठे जल, थल, अम्बर, जड़, चेतन तो कैसा विस्मय?
हिन्दू तन-मन, हिन्दू जीवन, रग-रग हिन्दू मेरा परिचय!

मैं आदि पुरुष, निर्भयता का वरदान लिए आया भू पर,
पय पीकर सब मरते आए, मैं अमर हुआ लो विष पी कर
अधरों की प्यास बुझाई है, पी कर मैंने वह आग प्रखर,
हो जाती दुनिया भस्मसात्, जिसको पल भर में ही छूकर
भय से व्याकुल फिर दुनिया ने प्रारंभ किया मेरा पूजन.
मैं नर, नारायण, नीलकंठ बन गया न इस में कुछ संशय,
हिन्दू तन-मन, हिन्दू जीवन, रग-रग हिन्दू मेरा परिचय……

पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी की पुण्यतिथि, राष्ट्रपति मुर्मु, प्रधानमंत्री मोदी ने ‘सदैव अटल’ पर दी श्रद्धांजलि

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