Home Top News ‘ज्ञानेश कुमार ने 10 महीनों में 14 बार नजरअंदाज कीं आपत्तियां’, चुनाव आयुक्तों के आरोपों से बवाल

‘ज्ञानेश कुमार ने 10 महीनों में 14 बार नजरअंदाज कीं आपत्तियां’, चुनाव आयुक्तों के आरोपों से बवाल

by Neha Singh 23 September 2026, 1:52 PM IST (Updated 23 September 2026, 2:04 PM IST)
23 September 2026, 1:52 PM IST (Updated 23 September 2026, 2:04 PM IST)
CEC Gyanesh Kumar

CEC Gyanesh Kumar: देश भर में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) के बीच एक नया विवाद सामने आया है. मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर दो दूसरे चुनाव आयुक्तों ने मनमाने तरीके से फैसले लेने और उनकी आपत्तियों को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया है. एक मीडिया रिपोर्ट ने खुलासा किया है कि चुनाव आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी ने 10 महीने में 14 बार आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के सामने अपने आपत्तियां दर्ज कराई, जिनकी सुनवाई नहीं की गई. इसके बाद से देश की सियासत गरमा गई है. अब विपक्षी पार्टियां ज्ञानेश कुमार पर हमला कर रही हैं और उन्हें हटाने की मांग कर रही हैं.

चुनाव आयोग ने आरोपों को खारिज किया

SIR का काम तीनों कमिश्नरों की देखरेख में हुआ है. लेकिन अखबार की रिपोर्ट में कहा गया है कि संधू और जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार, बिना उनकी जानकारी के लिए गए फैसलों और जारी किए गए आदेशों पर औपचारिक रूप से आपत्ति जताई है. हालांकि चुनाव आयोग (ECI) ने अखबार की उस रिपोर्ट को खारिज कर दिया है. मामले से जुड़े लोगों ने कहा कि किसी भी चुनाव आयुक्त ने चुनाव आयोग के फैसलों पर अपनी असहमति नहीं जताई थी. उन्होंने कहा कि दोनों आयुक्तों ने बस कुछ बातें कही थीं, जिन पर बाद में कमीशन ने विचार किया.

रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों चुनाव आयुक्तों ने अलग-अलग मौकों पर कई खास मुद्दों पर आपत्ति जताई. इनमें Form-6 में बदलाव पर विवाद, वोटर डेटा को सेंट्रलाइज करने का सवाल और पश्चिम बंगाल में अपील फाइल करना जैसे मुद्दे शामिल हैं.

इस्तीफे की मांग

कांग्रेस और शिवसेना समेत कई पार्टियों ने इस खुलासे पर तीखी प्रतिक्रिया दी है और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है. कांग्रेस के कम्युनिकेशन्स इंचार्ज जनरल सेक्रेटरी जयराम रमेश ने एक्स पर मीडिया रिपोर्ट का स्क्रीनशॉट शेयर किया. रमेश ने कहा कि पार्टी की ओर से, उनके साथी अभिषेक सिंघवी एक बड़े नेशनल अखबार में किए गए सनसनीखेज खुलासों पर मीडिया से विस्तार से बात करेंगे कि कैसे “CEC ने भारत के इलेक्शन कमीशन की विश्वसनीयता और अखंडता को खत्म कर दिया है.”

कांग्रेस के ऑर्गनाइजेशन इंचार्ज जनरल सेक्रेटरी के सी वेणुगोपाल ने कहा कि इसमें कोई शक नहीं है कि कुमार को ऑफिस में बने रहने का कोई हक नहीं है. राज्यसभा MP कपिल सिब्बल ने कुमार को सस्पेंड करने और उनके कामों के पीछे कौन है, इसकी जांच के लिए FIR दर्ज करने की मांग की.

‘एक आदमी की तानाशाही’ का आरोप

पूर्व मुख्य चुनाव कमिश्नर ओ पी रावत ने कहा कि कानूनी वोटर रजिस्ट्रेशन फॉर्म 6 में बदलाव “बिल्कुल गलत और गैर-कानूनी” हैं. उन्होंने चुनाव आयोग के अंदर मतभेदों के खुलासे को “बहुत गंभीर” और “दुर्भाग्यपूर्ण” बताया. CPI(M) MP जॉन ब्रिटास ने कहा कि यह अब चुनाव आयोग नहीं रहा, यह CEC कुमार के तहत “एक आदमी की तानाशाही” है. उन्होंने कहा, “दो चुनाव आयुक्तों ने 10 महीनों में 14 बार आधिकारिक आपत्तियां जताई. उन्होंने नए वोटर्स को जोड़ने और बड़े पैमाने पर नाम हटाने को ‘अनऑथराइज़्ड और गैर-कानूनी’ बताया. उन्होंने सीक्रेट नाम हटाने, फिर से नाम वापस लेने और फॉर्म 6 में बदलावों पर आपत्ति दर्ज की, जो पहली बार वोट देने वाले युवाओं को परेशान करते हैं. यह सब उन्हें अंधेरे में रखकर किया गया. “

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News Source: PTI

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