Home Top News पासपोर्ट नहीं है नागरिकता का प्रमाण: विदेश मंत्रालय ने केवल ‘यात्रा दस्तावेज’ माना

पासपोर्ट नहीं है नागरिकता का प्रमाण: विदेश मंत्रालय ने केवल ‘यात्रा दस्तावेज’ माना

by Sanjay Kumar Srivastava 25 June 2026, 2:07 PM IST (Updated 28 June 2026, 1:11 PM IST)
25 June 2026, 2:07 PM IST (Updated 28 June 2026, 1:11 PM IST)
Passport

Citizenship Proof: पासपोर्ट कभी भी नागरिकता का सबूत नहीं रहा है. मोदी सरकार ने पिछले 12 सालों में इस दस्तावेज को लेकर कोई नया फैसला नहीं लिया है. विदेश मंत्रालय (MEA) द्वारा इसे सिर्फ एक ‘यात्रा दस्तावेज’ बताया गया है. विदेश मंत्रालय के बयान के बाद उपजे विवाद पर सूत्रों ने कहा कि हाल ही में ऐसा कोई नया फैसला नहीं लिया गया है. मोदी सरकार ने पिछले 12 वर्षों में इस विषय पर कोई नीतिगत बदलाव नहीं किया है. ‘पासपोर्ट अधिनियम 1967’ के नियमों के तहत विशेष परिस्थितियों में गैर नागरिकों को भी पासपोर्ट जारी किया जा सकता है. इसका प्राथमिक उद्देश्य केवल अंतरराष्ट्रीय यात्रा को सुगम बनाना और विदेशी बंदरगाहों पर पहचान स्थापित करना है.

TMC नेता महुआ मोइत्रा ने कसा तंज

विदेश मंत्रालय अधिकारियों के हवाले से मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि पासपोर्ट एक यात्रा दस्तावेज है, न कि नागरिकता का सबूत. यह नागरिकता साबित करने वाला दस्तावेज़ नहीं है. TMC नेता महुआ मोइत्रा ने इस मुद्दे पर सरकार पर तंज कसा. उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि आज भारतीय नागरिकता का एकमात्र सबूत हिंदू होना और BJP का वोटर होना है. इसके अलावा और कुछ भी काम नहीं आएगा. राज्यसभा सांसद कपिल सिबल ने भी इस मामले को लेकर सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने X पर कहा कि तो फिर नागरिकता का सबूत कौन सा दस्तावेज़ है? बूथ लेवल आफिसर (BLO) मेरी नागरिकता पर शक कर सकता है और मुझे वोट देने के अधिकार से वंचित कर सकता है. नतीजा यह कि BJP चुनाव जीत जाती है. मामला अब सुप्रीम कोर्ट के पास है.

जावेद अख्तर ने बताया बेतुका

गीतकार जावेद अख्तर ने विदेश मंत्रालय (MEA) के स्पष्टीकरण को बेतुका बताया. उन्होंने X पर कहा कि विदेश मंत्रालय का कहना है कि पासपोर्ट यात्रा के लिए एक दस्तावेज़ है, न कि नागरिकता का सबूत. सच में??? तो क्या वे कुछ लोगों को यह यात्रा दस्तावेज़ इसलिए दे रहे हैं क्योंकि उन्हें पूरा यकीन नहीं है कि यह व्यक्ति भारतीय नागरिक है या नहीं? यह बेतुका है. आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि बॉम्बे हाई कोर्ट के 2013 के फैसलों से यह स्पष्ट हो गया है कि पासपोर्ट नागरिकता का सबूत नहीं है. चुनाव आयोग की ओर से वोटर लिस्ट में खास तौर पर किए गए सुधार (स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न) पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि आधार नागरिकता का पक्का सबूत नहीं है, बल्कि यह सिर्फ़ पहचान का एक दस्तावेज़ है.

इन पांच तरीकों से नागरिकता की पहचान

20 दिसंबर, 2019 को भारत सरकार के प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) ने नेशनल रजिस्टर ऑफ़ सिटिज़न्स (NRC) और सिटिज़नशिप अमेंडमेंट एक्ट (CAA) के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले सवालों के ज़रिए एक विस्तृत जानकारी जारी की. इसमें कहा गया कि जन्म की तारीख और जन्म स्थान से जुड़े कोई भी दस्तावेज़ जमा करके नागरिकता साबित की जा सकती है. हालांकि, ऐसे स्वीकार्य दस्तावेज़ों पर अभी फ़ैसला लिया जाना बाकी है. PIB ने यह भी कहा कि किसी भी व्यक्ति की नागरिकता का फ़ैसला ‘सिटिज़नशिप रूल्स, 2009’ के आधार पर किया जाता है. ये नियम ‘सिटिज़नशिप एक्ट, 1955’ पर आधारित हैं. इसमें बताया गया कि किसी व्यक्ति के भारत का नागरिक बनने के पांच तरीके हैं: जन्म से नागरिकता, वंश के आधार पर नागरिकता, रजिस्ट्रेशन से नागरिकता, नैचुरलाइज़ेशन (प्राकृतिक रूप से) से नागरिकता और इनकॉरपोरेशन (क्षेत्र के विलय) से नागरिकता.

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News Source: PTI

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