Home Top News मेटा अधिकारियों से पूछताछ के बाद अब क्या है सरकार की प्लानिंग? जानें किन पहलुओं की हो रही जांच

मेटा अधिकारियों से पूछताछ के बाद अब क्या है सरकार की प्लानिंग? जानें किन पहलुओं की हो रही जांच

by Amit Dubey 9 August 2026, 4:37 PM IST (Updated 9 August 2026, 4:38 PM IST)
9 August 2026, 4:37 PM IST (Updated 9 August 2026, 4:38 PM IST)
Meta and Modi Government

Meta and Modi Government: बीते दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक वीडियो (रील) फेसबुक से कुछ घंटों (5-6 घंटे) के लिए हट गया था. पीएम मोदी की इस रील के हटते ही मामला तूल पकड़ लिया था. सरकार ने इसके लिए फेसबुक की पैरेंट कंपनी मेटा को केवल फटकार ही नहीं लगाई बल्कि स्पष्टीकरण के साथ बिना शर्त माफी मांगने की भी बात कही. वहीं, इस मामले में मेटा के अधिकारियों की मोदी सरकार के अधिकारियों के साथ बैठकें हुईं और उनसे कई सवालों को लेकर पूछताछ भी हुई. इन बैठकों व पूछताछ के बाद अब जो खबरें आ रही हैं वो काफी अहम बताई जा रही हैं.

जी हां, न्यूज एजेंसी पीटीआई की एक रिपोर्ट के अनुसार, सरकारी सूत्रों ने बताया कि मेटा के साथ केंद्र की बैठकों में एक अहम सवाल सामने आया है – क्या इस सोशल मीडिया दिग्गज के रिकमेंडेशन सिस्टम और पेड कंटेंट प्रमोशन उसके ‘इंटरमीडियरी’ (मध्यस्थ) के दर्जे के दायरे में आते हैं? मुख्य मुद्दा यह है कि क्या कंपनी आईटी एक्ट के नियमों का पालन करती है या फिर “किसे क्या कंटेंट दिखाया जाए” यह तय करके ‘पब्लिशर’ की भूमिका में आ जाती है.

सूत्रों ने आगे कहा कि मामला इस बात पर टिका है कि क्या कोई ऐसा प्लेटफॉर्म, जो सक्रिय रूप से यह तय करता है कि यूजर क्या देखेंगे, ‘इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट’ के तहत ‘इंटरमीडियरी’ का दर्जा बनाए रख सकता है. आइए जानते हैं पूरी खबर.

तब प्लेटफॉर्म्स को जिम्मेदारी लेनी होगी

बीते दिनों केंद्र सरकार और मेटा के अधिकारियों के बीच बैठक हुई थी. उसके बाद अब सरकार कई पहलुओं की जांच कर रही है. सूत्रों ने बताया कि अब मामला इस बात पर टिका है कि क्या कोई ऐसा प्लेटफॉर्म, जो सक्रिय रूप से यह तय करता है कि यूजर्स क्या देखेंगे, ‘इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट’ के तहत ‘इंटरमीडियरी’ (मध्यस्थ) का दर्जा बनाए रख सकता है.

यह मामला इसलिए अहम है क्योंकि IT एक्ट की धारा 79 इंटरमीडियरीज को थर्ड-पार्टी कंटेंट के लिए जिम्मेदारी से “सेफ हार्बर” (सुरक्षा) देती है, बशर्ते वे कानून के प्रावधानों और जरूरी सावधानी (ड्यू डिलिजेंस) की शर्तों का पालन करें. सूत्रों ने कहा कि अगर मेटा के रिकमेंडेशन सिस्टम यह तय करते हैं कि “किसे क्या दिखाया जाए” और साथ ही “पैसे लेकर कंटेंट को प्रमोट” भी करते हैं, तो यह सवाल उठता है कि क्या ऐसे काम इंटरमीडियरी की कानूनी परिभाषा के अनुरूप हैं.

सूत्रों के मुताबिक, अगर कोई प्लेटफॉर्म यह तय करता है कि यूजर्स को कौन सा कंटेंट दिखाया जाएगा, तो इसे पब्लिशिंग माना जाएगा और तब प्लेटफॉर्म्स को अपने कामों की जिम्मेदारी लेनी होगी.

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कानून के तहत हो सकती है कार्रवाई

यह मामला इसलिए भी अहम है क्योंकि आईटी एक्ट के तहत इंटरमीडियरीज को कुछ कानूनी सुरक्षा मिलती है, बशर्ते वे तय शर्तों का पालन करें. सूत्रों ने बताया कि पिछले कुछ दिनों में हुई कई दौर की बातचीत के बाद सरकार ने मेटा से डीपफेक की समस्या से निपटने के लिए कदम उठाने को भी कहा है. इसलिए, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म समेत सभी मध्यस्थों (intermediaries) के लिए IT एक्ट की धारा 79 और IT नियम, 2021 के तहत यह जरूरी है कि वे अपने प्लेटफॉर्म पर अपलोड, पब्लिश, होस्ट, शेयर या ट्रांसमिट की गई थर्ड-पार्टी जानकारी के लिए जिम्मेदारी से छूट पाने की शर्त के तौर पर उचित सावधानी (due diligence) बरतें.

उचित सावधानी बरतने की इन जिम्मेदारियों को पूरा न करने पर IT एक्ट की धारा 79 के तहत जिम्मेदारी से मिलने वाली छूट खत्म हो सकती है. साथ ही, ऐसे मध्यस्थों पर IT एक्ट और भारतीय न्याय संहिता समेत किसी भी कानून के तहत कार्रवाई भी हो सकती है.

सूत्रों ने कहा कि कानूनी राय लेने का फैसला करने से पहले सरकार इन बातचीत के नतीजों की समीक्षा करेगी. उन्होंने बताया कि सरकार दूसरे प्लेटफॉर्म के साथ भी बातचीत करेगी ताकि यह देखा जा सके कि क्या वे भारतीय कानून के तहत ‘मध्यस्थ’ (intermediary) की परिभाषा पर खरे उतरते हैं या नहीं.

बिना लेबल वाले AI वीडियो क्यों दिखते हैं?

इस हफ्ते, सरकार ने मेटा की ग्लोबल टीम से डीपफेक, बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट, बिना लेबल वाले सिंथेटिक कंटेंट और रिकमेंडेशन सिस्टम के कामकाज जैसे मुद्दों पर सवाल-जवाब किए. सूत्रों के मुताबिक, मेटा के बड़े अधिकारियों से दो दिनों तक कड़ी पूछताछ के बाद, शुक्रवार को सरकार ने इस सोशल मीडिया कंपनी के साथ तकनीकी बातचीत शुरू की. इस दौरान कंपनी ने बताया कि वह अपने प्लेटफॉर्म पर डीपफेक, बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट और बिना लेबल वाले सिंथेटिक कंटेंट (AI से बने कंटेंट) को लेकर सरकार की चिंताओं को कैसे दूर करने की योजना बना रही है.

सूत्रों ने बताया कि अधिकारी कंपनी की प्रगति पर लगातार नजर रखेंगे. बातचीत के मुख्य मुद्दों में से एक था एआई से बने नुकसानदेह कंटेंट का बार-बार सामने आना, लगातार फैलना और वायरल होना, जबकि उन्हें पहले ही फ्लैग (चिह्नित) किया जा चुका था.

सूत्रों के अनुसार, सरकार ने मेटा से यह भी पूछा कि IT नियमों के तहत सिंथेटिक कंटेंट की पहचान और लेबलिंग जरूरी होने के बावजूद, बिना लेबल वाले AI-जनरेटेड वीडियो उसके प्लेटफॉर्म पर क्यों दिखते रहते हैं. सरकार ने मेटा से कहा कि कंटेंट मॉडरेशन में इंसानी निगरानी बढ़ाई जाए और भारतीय भाषाओं के साथ-साथ स्थानीय बारीकियों की बेहतर समझ और जानकारी रखी जाए.

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और बैठक होने की उम्मीद

जानकारी के अनुसार, आने वाले हफ्ते में मेटा के साथ सरकार की एक और बैठक होने की उम्मीद है. सरकारी सूत्रों ने कहा कि मकसद सेंसरशिप नहीं, बल्कि यह पक्का करना है कि कंपनी भारतीय कानूनों का पालन करे. सूत्रों ने पहले कहा था कि मेटा ने माना है कि “गंभीर मुद्दे” थे और भरोसा दिलाया है कि वह उन्हें हल करने के लिए लगातार कदम उठाएगी. उन्होंने कहा कि सरकार कंपनी पर दबाव डालती रहेगी कि वह अपनी विभिन्न चिंताओं को दूर करने के लिए लगातार उपाय, कार्रवाई और सुधार करे.

मेटा ने क्या दिया भरोसा?

हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फेसबुक पोस्ट पर अस्थायी रोक लगाने के मामले में सरकार के बुलावे के बाद, मेटा के ग्लोबल अफेयर्स हेड जोएल कपलान की अगुवाई वाली मेटा की टीम ने बुधवार और गुरुवार को आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव और आईटी सचिव एस. कृष्णन से मुलाकात की थी. गुरुवार को मेटा की टीम से पूछा गया कि क्या वह भारतीय कानूनों का पालन कर रही है; उनसे एल्गोरिदम से जुड़े मुद्दों और उन सुरक्षा उपायों के बारे में कड़े सवाल पूछे गए जो यह पक्का करते हैं कि संवैधानिक और कानूनी जरूरतों को पूरा किया जा रहा है.

मेटा ने भरोसा दिलाया था कि वह वाकई गंभीर है और डीपफेक, बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री, बॉट्स और सिंथेटिक कंटेंट से जुड़ी चिंताओं को दूर करने के लिए “कड़ी मेहनत” कर रही है. सरकारी सूत्रों ने पहले कहा था कि बुधवार को मेटा ने मोदी की पोस्ट को अस्थायी रूप से हटाने के साथ-साथ बच्चों के यौन शोषण वाली सामग्री से लेकर डीपफेक और “बहुत सारा पैसा” लेकर कुछ कंटेंट को बढ़ावा देने जैसी गलतियों के लिए माफी मांगी थी.

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मार्क जुकरबर्ग की ओर से आई थी माफी?

हालांकि, कपलान ने बुधवार को एक लिखित बयान में कहा था कि उन्होंने “पीएम मोदी की पोस्ट पर रोक लगाने की गलती के लिए मेटा की ओर से मंत्री से माफी मांगी”, लेकिन अपनी पहचान जाहिर न करने की शर्त पर सरकारी सूत्रों ने कहा था कि माफी कंपनी के चीफ एग्जीक्यूटिव मार्क जुकरबर्ग की तरफ से आई थी.

एक संसदीय स्थायी समिति ने भी मोदी की फेसबुक पोस्ट हटाने को लेकर मार्क जुकरबर्ग से माफी की मांग की थी और एक पत्र में चेतावनी दी थी कि अगर तीन दिनों के भीतर माफी नहीं मांगी गई तो उन्हें मिलने वाली सुरक्षा और छूट वापस ली जा सकती है. बता दें कि जिस वीडियो (रील) को फेसबुक से हटाया गया था उसे पीएम नरेंद्र मोदी ने सबसे पहले इंस्टाग्राम पर पोस्ट किया था.

फेसबुक से हटा था पीएम मोदी का वीडियो

मालूम हो कि बीते दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वीडियो फेसबुक से अचानक गायब हो गया था. उनका यह वीडियो 23 जुलाई को शेयर किया गया था. इसे खास तौर पर देश के युवाओं यानी जनरेशन Z को संबोधित करते हुए जारी किया गया था. वीडियो ऐसे समय सामने आया था, जब कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में 36 दिनों तक चले छात्र आंदोलन की देशभर में चर्चा थी. अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने पेपर लीक जैसे गंभीर मुद्दे पर सख्त कार्रवाई का भरोसा दिलाया था. उन्होंने कहा था कि अगले दिन होने वाली कैबिनेट बैठक में इस बारे में कड़े फैसलों की घोषणा की जाएगी.

पीएम मोदी के इस वीडियो को लाखों लोगों ने देखा और ये तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल भी हुआ. लेकिन 28 जुलाई की सुबह फेसबुक यूजर्स को अचानक ये वीडियो दिखाई देना बंद हो गया. शुरुआत में फेसबुक की तरफ से एक नोटिस दिखाया गया. इसमें लिखा था कि वीडियो पर कानूनी अनुरोध की वजह से रोक लगाई गई है. हालांकि, इस नोटिस में ये नहीं बताया गया कि ये कानूनी अनुरोध किसकी तरफ से आया था.

वीडियो के अचानक हटने की खबर फैलते ही सोशल मीडिया पर सवालों की बाढ़ आ गई. कई भाजपा नेताओं और समर्थकों ने इस पर चिंता जताई और स्पष्टीकरण की मांग की. बाद में सूत्रों ने बताया कि मामला किसी कानूनी कार्रवाई का नहीं, बल्कि एक अस्थायी तकनीकी गड़बड़ी का था. इसके कुछ ही समय बाद मेटा ने आधिकारिक बयान जारी किया. उन्होंने कहा कि वीडियो गलती से हट गया था और अब उसे पूरी तरह से बहाल कर दिया गया है. हालांकि, पीएम मोदी का वीडियो हटाना मेटा के लिए काफी भारी पड़ गया है. उसे आगे भी अभी कई सवालों के जवाब देने पड़ सकते हैं.

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