China Women : चीनी सरकार दशकों से लैंगिक समानता की बात करती रही है. चीन से ऐसी खबरें सामने आती रही हैं कि विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है. महिलाओं के लिए विभिन्न क्षेत्रों में अवसर उपलब्ध होने का दावा किया जाता है और उनके अधिकारों का भी मजबूती से संरक्षण किया जा रहा है. इसी बीच एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि हाल के वर्षों में सार्वजनिक जीवन में उनकी भागीदारी काफी कम हुई है. खासकर राजनीतिक और नीतिगत क्षेत्रों में उनकी भागीदारी घटी है. गौरतलब है कि कई दशकों तक चीन ने जेंडर इक्वालिटी के मामले में माओ जेडोंग के मशहूर नारे ‘महिलाएं आधा आसमान थामे हुए हैं’ को बढ़ावा दिया है. लेकिन हाल के वर्षों में महिलाओं की घरेलू और पारिवारिक भूमिकाओं पर ज्यादा जोर दिया गया है.
क्या CPC का दावा हो रहा है फेल?
राजनीतिक और नीतिगत सेक्टर में महिलाओं की भूमिका कम होने की जानकारी खुद CPC के आधिकारिक मुखपत्र ‘पीपल्स डेली’ ने दी है. राजनीति पर मजबूत पकड़ रखने वाली चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (CPC) कई दशकों से दावा करती आई है कि महिलाओं ने समाजवादी आधुनिकीकरण और सुधार व खुलेपन में सक्रिय भूमिकाई निभाई है. वहीं, ‘पीपल्स डेली’ में छपे एक विश्लेषण के मुताबिक, सार्वजनिक जीवन से जुड़े शब्द ‘अग्रणी महिला’, ‘फाइटर’, ‘करियर’, और ‘एंटरप्रेन्योरशिप’ और निजी जीवन से जुड़े शब्दों ‘परिवार’, ‘बच्चे पैदा करना’, ‘घर का काम’ और ‘प्यारी मां’ की पहचान की गई है. इसके बाद रिसर्चर्स ने देखा कि ‘फीमेल’ और ‘वुमन’ जैसे न्यूट्रल शब्द का उपयोग कितनी बार किया गया है.
1990 में किए जाते थे ऐसे दावे
हांगकांग के अखबार ‘साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट’ ने रविवार को इस स्टडी के कुछ हिस्सों को प्रकाशित किया. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चीन में महिलाओं की भूमिका को अब तेजी से निजी और पारिवारिक जीवन से जोड़कर देखा जा रहा है. वहीं, 1990 के दशक की शुरुआत में महिलाओं को सार्वजनिक जीवन और विभिन्न सामाजिक भूमिकाओं में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रोत्साहित करने पर अधिक जोर दिया जाता था. इसी कड़ी में 1992 में ‘पीपल्स डेली’ में छपा एक लेख भी साझा किया गया, जिसका शीर्षक था ‘पहले कहा जाता था कि औरतें मर्दों से कमतर होती हैं, आज वे आसमान का आधा हिस्सा संभालती हैं’. हालांकि, रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि इसके बाद से पुरुष और महिलाओं के बीच अंतर काफी बढ़ा है. साथ ही औरतों को सार्वजनिक भूमिकाओं से जोड़ने वाला जिक्र भी बहुत कम हुआ है. उदाहरण के लिए, ‘पीपल्स डेली’ ने ‘बच्चे को जन्म देना आसान है, लेकिन बच्चे की परवरिश मुश्किल है’ शीर्षक से एक लेख प्रकाशित किया था. इसके बाद दावा किया जाना लगा कि मां बच्चों पर ध्यान नहीं देती है वह काम करने पर दे रही हैं. ऐसे में चीनी सरकार ने महिलाओं को काम से ज्यादा बच्चों पर ध्यान देने की जरूरत को प्राथमिकता दी है.
चीन की सोच में आया बड़ा बदलाव
रिसर्चर्स का कहना है कि इन शब्दों से अंदाजा लगाया जा सकता है कि चीन की सोच में एक निर्णायक बदलाव आया है. महिलाओं को सार्वजनिक क्षेत्र की बजाय घरेलू और पारिवारिक भूमिकाओं से ज्यादा जोड़ा जाने लगा है. हालांकि, 2020 के बाद से औरतों को सार्वजनिक भूमिकाओं से जोड़ने वाले जिक्र में थोड़ी बढ़ोतरी देखी गई है. रिसर्चर्स ने यह भी बताया कि सरकारी मीडिया में बदलती भाषा का संबंध है कि बड़े संस्थागत और वैचारिक बदलावों से गहराई से जुड़ा हुआ है.
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