Home Top News सऊदी के बड़े तेल रीफाइनरी पर हूतियों का ड्रोन हमला,होर्मुज खोलने के लिए ईरान ने रखी ये नई शर्त

सऊदी के बड़े तेल रीफाइनरी पर हूतियों का ड्रोन हमला,होर्मुज खोलने के लिए ईरान ने रखी ये नई शर्त

by Sanjay Kumar Srivastava 9 August 2026, 5:46 PM IST (Updated 9 August 2026, 5:48 PM IST)
9 August 2026, 5:46 PM IST (Updated 9 August 2026, 5:48 PM IST)
सऊदी के बड़े तेल रीफाइनरी पर हूती विद्रोहियों का बड़ा ड्रोन हमला

Yemen Houthi: यमन के हूती विद्रोहियों ने रविवार को सऊदी अरब के एक बड़े तेल रिफाइनरी पर जोरदार हमला किया. ईरान समर्थित विद्रोहियों का सऊदी अरब पर यह ताज़ा हमला है. इस बीच, ईरान ने बातचीत फिर से शुरू करने और होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को दोबारा खोलने के लिए नई मांगें रखी हैं. उधर, युद्ध को देखते हुए पेंटागन अमेरिकी रक्षा उद्योग पर हथियारों का उत्पादन तेज़ करने का दबाव बना रहा है.

अरामको को बनाया निशाना

हूती विद्रोहियों के मिलिट्री प्रवक्ता याह्या सरी ने कहा कि उन्होंने ड्रोन से सऊदी अरब के जाज़ान शहर में अरामको रिफाइनरी को निशाना बनाया. उन्होंने कहा कि यह हमला सऊदी ड्रोन द्वारा यमन के हज्जा और सादा प्रांतों के ऊपर हवाई क्षेत्र का उल्लंघन करने के जवाब में किया गया था. रविवार की सुबह सऊदी ऊर्जा मंत्रालय ने अरामको रिफाइनरी में आग लगने की सूचना दी, जिसमें कोई हताहत नहीं हुआ. मंत्रालय ने कहा कि आग बुझा दी गई थी, लेकिन आग लगने के कारणों के बारे में कोई जानकारी नहीं दी.रविवार को हूती विद्रोहियों का हमला मिसाइल और ड्रोन हमलों की उस कड़ी का हिस्सा है, जिनमें सऊदी अरब और रेड सी में उसके जहाजों को निशाना बनाया गया है.

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मोचा बंदरगाह पर भी हमला

यमन सरकार के एक अधिकारी ने रविवार को कहा कि हूती विद्रोहियों ने रेड सी पर स्थित एक अहम बंदरगाह पर भी हमला किया. सूचना मंत्रालय के असिस्टेंट अंडर सेक्रेटरी फायेद अल-नोमान ने कहा कि हूती विद्रोहियों ने मोचा बंदरगाह पर मिसाइलें और ड्रोन दागे. यह यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के तहत आने वाले मुख्य बंदरगाहों में से एक है. हाल के वर्षों में इसे उन जहाजों को संभालने के लिए अपग्रेड किया गया है जो होदेइदा में हूती-नियंत्रित बंदरगाहों से नहीं गुजरते. हूती विद्रोहियों की ओर से इस पर कोई तुरंत प्रतिक्रिया नहीं आई. इस तनाव के बढ़ने से यमन में गृहयुद्ध के फिर से भड़कने का खतरा पैदा हो गया है, जबकि 2022 में हुए समझौते के बाद इस गरीब अरब देश में बड़ी लड़ाई रुक गई थी.

शर्तें पूरी होने तक अमेरिका के साथ बातचीत फिर शुरू नहीं

तेहरान में रविवार को पत्रकारों से बात करते हुए ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने कहा कि अमेरिका के साथ बिचौलियों के ज़रिए संदेशों का आदान-प्रदान जारी है, लेकिन इसे बातचीत नहीं कहा जा सकता. उन्होंने कहा कि हमारे नज़रिए से बातचीत तब तक फिर से शुरू नहीं हो सकती जब तक कि मेमोरेंडम ऑफ़ अंडरस्टैंडिंग (समझौता ज्ञापन) का उल्लंघन बंद न हो जाए और अमेरिका उन शर्तों को पूरा न कर दे जिसका उसने उल्लंघन किया था.

उन्होंने आगे कहा कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से होकर गुज़रने वाले नए समुद्री रास्तों के बारे में ओमान के साथ बातचीत अंतिम चरण में है. अरागची ने कहा कि हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य फिर से खुल जाएगा. रास्तों पर समझौता हो सकता है, लेकिन जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के लिए कई अन्य शर्तें भी हैं, जिसके बारे में बिचौलियों के ज़रिए जानकारी दी गई है.

ईरान को धमकी देना बंद करे अमेरिका

इसी तरह ईरान की ताकतवर ‘सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल’ ने कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज) तब तक नहीं खुलेगा जब तक अमेरिका अपना व्यवहार नहीं सुधारता. काउंसिल ने नई मांगें रखी हैं जिनसे इस जलमार्ग के प्रबंधन के समझौते पर बातचीत में उथल-पुथल मच सकती है. ईरान के सरकारी प्रसारक ने काउंसिल के सचिव मोहम्मद बाघेरी ज़ोलगद्र का बयान जारी किया, जो ताकतवर ‘रिवोल्यूशनरी गार्ड’ के कमांडर भी हैं. बयान में कहा गया है कि अमेरिका को ईरान को दोबारा कभी धमकी नहीं देनी चाहिए और उसे ईरान तथा क्षेत्र में उसके सशस्त्र सहयोगियों के साथ युद्ध को हमेशा के लिए खत्म करना चाहिए.

ईरानी बंदरगाहों से अपनी सेना हटाएं ट्रंप

ईरान ने कहा कि अमेरिका को ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक नाकेबंदी हटानी चाहिए और उस इलाके से अपनी सेना वापस बुलानी चाहिए. उसे युद्ध से हुए नुकसान के लिए ईरान को पूरी भरपाई करनी चाहिए. प्रतिबंध हटाने चाहिए और रोकी गई संपत्ति को बिना किसी शर्त के जारी करना चाहिए. अमेरिका, जो नाकेबंदी खत्म करने से पहले इस जलडमरूमध्य पर एक स्वीकार्य समझौता चाहता था, की ओर से इस पर कोई तुरंत टिप्पणी नहीं आई. जून में हुए अंतरिम समझौते के अनुसार, प्रतिबंध खत्म करने का कार्यक्रम और मुआवजे की योजना अंतिम समझौते का हिस्सा होंगे और बातचीत में रोकी गई संपत्ति का मुद्दा भी शामिल होगा. अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, नाकेबंदी की वजह से 53 कमर्शियल जहाजों का रास्ता बदलना पड़ा. दो जहाज बेकार हो गए और शनिवार तक दो जहाजों पर कब्जा किया गया.

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पेंटागन का हथियारों का उत्पादन बढ़ाने पर जोर

पेंटागन के प्रवक्ता शॉन पार्नेल ने शनिवार को एक बयान में कहा कि विभाग हथियारों की खरीद बढ़ाने पर तेज़ी से काम कर रहा है, ताकि हमारे सैनिकों को वे हथियार मिल सकें जिसकी उन्हें ज़रूरत है. कहा कि वह भी उतनी तेज़ी से जितनी तेज़ी से ख़तरे का सामना करने के लिए ज़रूरी है. वॉशिंगटन के थिंक टैंक ‘सेंटर फ़ॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज़’ के एक नए विश्लेषण के अनुसार, ईरान के साथ युद्ध में अमेरिकी सेना के एडवांस्ड मिसाइल इंटरसेप्टर का स्टॉक और भी कम हो गया है, जो पहले से ही सीमित था. पार्नेल ने कहा कि हथियारों की तेज़ी से डिलीवरी की यह कोशिश आधुनिकीकरण की उस बड़ी योजना का हिस्सा है जो पांच महीने पहले शुरू हुए इस संघर्ष से भी पहले से चल रही थी.

ईरान-ओमान के बीच संभावित समझौता

होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz), जो दुनिया भर में तेल और प्राकृतिक गैस की सप्लाई के लिए बहुत ज़रूरी है, युद्ध से पहले एक अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग माना जाता था. लेकिन बातचीत की जानकारी रखने वालों के अनुसार, ईरान और ओमान एक अस्थायी समझौते को अंतिम रूप देने पर काम कर रहे हैं. इस समझौते के तहत, जहाज़ ईरान के पास वाले रास्ते से जलडमरूमध्य में प्रवेश करेंगे और ओमान के पास वाले रास्ते से बाहर निकलेंगे, जिससे यह जलडमरूमध्य फिर से खुल जाएगा. इन लोगों ने नाम न बताने की शर्त पर यह जानकारी दी क्योंकि उन्हें सार्वजनिक रूप से बोलने की अनुमति नहीं थी.

गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल का भी समर्थन

यह समझौता अमेरिका और ईरान के बीच पहले हुए एक अलग समझौते को बहाल करने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत के लिए दोनों देशों के बीच 60 दिन की समय-सीमा को फिर से शुरू करने के उद्देश्य से बनाया गया है. बातचीत के बारे में जानकारी देने वाले लोगों के अनुसार, इस समझौते को गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल के सदस्यों का समर्थन प्राप्त है. उम्मीद है कि अंतिम रूप दिए जाने पर ईरान, ओमान, अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र के इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गनाइज़ेशन द्वारा इसकी संयुक्त रूप से घोषणा की जाएगी. हालांकि, उन लोगों ने इस बात पर ज़ोर दिया कि समझौते के अंतिम रूप लेने से पहले इसकी शर्तों में अभी भी बदलाव हो सकता है.

दर्जनभर से ज्यादा जहाजों पर हुआ हमला

अमीराती अधिकारियों ने बताया कि अबू धाबी की सरकारी तेल और गैस कंपनी ADNOC के एक जहाज़ पर जलडमरूमध्य (स्ट्रेट) से गुज़रते समय हमला किया गया. विदेश मंत्रालय ने कहा कि ईरान ने कमर्शियल जहाज़ों पर हमलों के तहत यह मिसाइल दागी थी. ADNOC ने एक बयान में कहा कि तड़के हुए इस हमले में कोई हताहत नहीं हुआ. कंपनी ने बताया कि फरवरी में अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के ख़िलाफ़ युद्ध शुरू किए जाने के बाद से इस जलडमरूमध्य से गुज़रते समय उसके एक दर्जन से ज़्यादा जहाज़ों पर मिसाइलों और ड्रोनों से हमले किए गए हैं.

कंपनी के अनुसार, इन हमलों में एक क्रू मेंबर की मौत हुई है और 20 अन्य घायल हुए हैं. यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशन्स सेंटर ने बताया कि ओमान के ख़साब शहर के पूर्व में एक जहाज़ पर किसी चीज़ (प्रोजेक्टाइल) से हमला हुआ, जिससे आग लग गई थी. आग बुझा दी गई और जहाज़ व क्रू सुरक्षित हैं. यह साफ़ नहीं था कि यह घटना ADNOC वाले मामले से जुड़ी थी या नहीं.

किसी तीसरे देश को निशाना बनाना मकसद नहीं: तुर्की

तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने कहा कि सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की के बीच शुक्रवार को हुए रक्षा समझौते का मकसद किसी तीसरे देश के खिलाफ़ नहीं है. समझौते के मुताबिक, अगर किसी एक देश पर हमला होता है तो उसे तीनों देशों पर हमला माना जाएगा. फिदान ने शनिवार को तुर्की की सरकारी समाचार एजेंसी ‘अनादोलु’ को बताया कि ये देश किसी भी राज्य को तब तक दुश्मन नहीं मानते जब तक वह उनके खिलाफ़ कोई आक्रामक कदम न उठाए.

कहा कि हमारे पास ऐसा कुछ भी लिखित या हस्ताक्षरित नहीं है जो किसी साझा खतरे को परिभाषित करता हो. जब उनसे पूछा गया कि आपसी रक्षा व्यवस्था कैसे काम करेगी, तो फिदान ने कहा कि कोई सदस्य देश औपचारिक रूप से मदद की मांग करेगा और दोनों देशों की ओर से दी जाने वाली मदद में खुफिया जानकारी साझा करने से लेकर लॉजिस्टिक्स सहायता या सैन्य टुकड़ियों की तैनाती तक शामिल हो सकती है. फिदान ने बताया कि इस व्यवस्था के तहत सऊदी अरब में एक सचिवालय स्थापित किया जाएगा.

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