Vote Right : कांग्रेस ने रविवार को वोट देने के अधिकार को मौलिक अधिकार बनाने पर जोर दिया. राष्ट्रीय पार्टी का कहना है कि यह कदम वोटरों को दबाने या फिर मनमाने ढंग से अयोग्य ठहराने वाली कार्रवाइयों के खिलाफ अहम कदम होगा. पार्टी लगातार आरोप लगाती आ रही है कि विभिन्न राज्यों में हुए SIR प्रक्रिया के दौरान भारी संख्या में लोगों के मत को अवैध करार दे दिया गया. इसी बीच कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित के इशारे पर काम करने वाले चुनाव आयोग का पक्षपाती कार्य सबके सामने आ चुका है. यही वजह है कि अब वक्त आ गया है कि वोट देने के अधिकार को मौलिक अधिकार का दर्जा मिलना चाहिए.
क्या बोले थे संविधान सभा में शामिल नेता?
आपको बताते चलें कि सुप्रीम कोर्ट की दो जजों की बेंच ने फुटपाथ पर चलने के अधिकार को संविधान के तहत मौलिक अधिकार घोषित किया था. इस पर जयराम रमेश ने कहा कि संविधान सभा ने सरदार पटेल के नेतृत्व में मौलिक अधिकारों, अल्पसंख्यकों और आदिवासी क्षेत्रों के लिए सलाहकार समिति बनाई थी. उन्होंने बताया कि 21-22 अप्रैल 1947 को हुई बैठक में वोट देने के अधिकार को मौलिक अधिकार बनाने पर जोरदार चर्चा हुई थी. इस दौरान डॉ. अंबेडकर और बाबू जगजीवन राम ने इसके पक्ष में मजबूती से अपनी बात रखी थी.
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बीते करीब सात दशकों से चल रही है बहस
रमेश ने दावा किया कि सरदार पटेल, सी राजगोपालाचारी और कुछ अन्य लोगों का मानना था कि अगर वोट देने के अधिकार को मौलिक अधिकार बना दिया गया, तो रियासतें भारतीय संघ में शामिल होने में हिचाकिचा सकती है. संविधान में सार्वभौमिक व्यस्त मताधिकार का प्रावधान करना ही काफी है. उन्होंने आगे कहा कि पटेल का खुद यह मानना था कि सार्वभौमिक व्यस्क मताधिकार के आधार पर चुनाव का प्रावधान करता है. बता दें कि बीते करीब सात दशकों से इस बात पर लगातार बहस चल रही है कि क्या वोट देने के अधिकार को ‘जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951’ के तहत मिला कानूनी अधिकार या फिर मौलिक अधिकार है.
वोट देने से जुड़े सभी कार्यों को मौलिक अधिकार बनाना चाहिए
वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने खुद इस बात को माना है कि वोटर्स को उम्मीदवारों के आपराधिक रिकॉर्ड, उनका आर्थिक हित और राजनीतिक फंडिंग के स्रोतों के बारे में जानने का संवैधानिक और मौलिक अधिकार है. रमेश ने तर्क दिया कि कोर्ट ने वोट की गोपनीयता की रक्षा की है और NOTA के माध्यम से सभी उम्मीदवारों को खारिज करने के अधिकार को मान्यता दी है. साथ ही यह बात और अजीब लगती है कि वोट देने का अधिकार अभी भी कानूनी अधिकार तक सीमित है. अब वक्त है कि मताधिकार से जुड़े सभी अधिकारों को मौलिक अधिकार बना देना चाहिए.
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