Tree Saving Initiative: भोपाल से आज पर्यावरण संरक्षण की एक बेहद खूबसूरत और अनुकरणीय तस्वीर सामने आई है. अक्सर देखा जाता है कि विकास की अंधी दौड़ में सडकों और फुटपाथों को चमकाने के चक्कर में पेड़ों के आस पास कंक्रीट बिछाकर उनका दम घोंट दिया जाता है, लेकिन भोपाल के एमपी नगर में सजग नागरिकों और नगर निगम ने मिलकर इन बेजुबान पेड़ों को एक नई जिंदगी देने की शुरुआत की है.
सड़क निर्माण के समय की लापरवाही
राजधानी भोपाल के एमपी नगर जोन-1 स्थित विजय स्तंभ परिसर के पास आज सुबह एक अनोखे और बेहद जरूरी अभियान की शुरुआत हुई. यहां नगर निगम की टीम कटर और हथौड़ों की मदद से पेड़ों के आस पास जमी कंक्रीट को हटाने के काम में जुटी हुई है. दरअसल एमपी नगर में सड़क निर्माण के समय लापरवाही के चलते कई हरे-भरे पेड़ों के तनों को कंक्रीट से पूरी तरह ब्लॉक कर दिया गया था, जिससे पेड़ों के अस्तित्व पर संकट मंडरा रहा था. पेड़ों की इस दुर्दशा पर विजय स्तंभ रहवासी समिति और पर्यावरण के लिए काम करने वाली संस्था वॉच लीग ने चिंता जताई. इन सजग नागरिकों ने एकजुट होकर भोपाल नगर निगम के उच्च पदस्थ अधिकारियों को जमीनी हकीकत से अवगत कराया. नागरिकों की इस आवाज पर बीएमसी के डिप्टी कमिश्नर हिरेन्द्र कुशवाहा जी ने तुरंत संज्ञान लिया और खुद इलाके का निरीक्षण करने पहुंचे.
पेड़ों का रखरखाव करेगी बीएमसी
डिप्टी कमिश्नर हिरेन्द्र कुशवाहा के कड़े निर्देशों के बाद आज सुबह 11 बजे से ही भोपाल नगर निगम का अमला हरकत में आ गया. विजय स्तंभ परिसर के निकट सभी पेड़ों के आसपास से कंक्रीट को पूरी तरह साफ किया जा रहा है. कंक्रीट हटने के बाद अब बीएमसी की टीम इन पेड़ों के वैज्ञानिक ढंग से संरक्षण और रखरखाव का कार्य भी करेगी. पर्यावरणविदों ने भोपाल नगर निगम की इस त्वरित और अनुसरणीय कार्रवाई की जमकर तारीफ की है.
शहर भर में चलेगा अभियान
बता दें विजय स्तंभ आवासीय प्रांगण के सामने से शुरू हुआ यह जनभागीदारी और सरकारी तंत्र का साझा प्रयास वाकई काबिले तारीफ है. उम्मीद है कि भोपाल नगर निगम की यह कार्रवाई सिर्फ एमपी नगर तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पूरे शहर के उन पेड़ों को कंक्रीट के इस जाल से मुक्ति मिलेगी जो घुट-घुट कर जीने को मजबूर हैं. दिल्ली- मुंबई जैसे शहरों में भी ऐसे अभियान की जरूरत है, जहां बढ़ती आबादी के लिए पेड़ों की कटाई तो हो ही रही है, साथ में जिंदा पेड़ों को भी कंक्रीट से ब्लॉक कर दिया जाता है. नागरिकों की पहल से उन पेड़ों को फिर से जीवन मिल सकता है.
