Delhi Airport Transit System: दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर आने-जाने वाले यात्रियों के लिए बड़ी राहत की तैयारी है. एयरपोर्ट प्रशासन 2030 तक ऐसा ऑटोमेटेड पीपल मूवर यानी APM सिस्टम शुरू करने की योजना बना रहा है, जो एयरपोर्ट के अलग-अलग टर्मिनलों को आपस में जोड़ेगा. इस पूरे प्रोजेक्ट पर करीब 3,500 करोड़ रुपये का निवेश होने की उम्मीद है. इसके शुरू होने के बाद यात्रियों को एक टर्मिनल से दूसरे टर्मिनल तक पहुंचने के लिए बार-बार सड़क के रास्ते सफर करने की परेशानी कम हो सकती है.
7.3 किलोमीटर लंबा होगा APM
दिल्ली एयरपोर्ट का प्रस्तावित APM करीब 7.3 किलोमीटर लंबा होगा. इसमें 6 स्टेशन बनाए जाएंगे. अधिकारियों के मुताबिक T1 से T3 तक पहुंचने में करीब 13 मिनट का समय लगेगा. APM आमतौर पर ड्राइवरलेस ट्रांजिट सिस्टम होता है, जो यात्रियों को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने के लिए बनाया जाता है. फिलहाल T2 और T3 एक दूसरे के काफी करीब हैं. हालांकि, T1 कुछ दूरी पर है. ऐसे में T3 पर उतरने वाले यात्रियों को अगर T1 से दूसरी फ्लाइट पकड़नी हो, तो उन्हें सड़क के रास्ते दूसरे टर्मिनल तक जाना पड़ता है. APM शुरू होने के बाद ये प्रोसेस काफी आसान हो सकता है.
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कार्गो और एयरोसिटी भी जुड़ेगी
खास बात ये है कि APM सिर्फ तीन यात्री टर्मिनलों को ही नहीं जोड़ेगा. इसके नेटवर्क में कार्गो टर्मिनल और एयरोसिटी को भी शामिल किया जाएगा. इसके अलावा एक स्टेशन के जरिए यात्रियों को दिल्ली मेट्रो की लाइनों से कनेक्टिविटी मिल सकेगी. यानी एयरपोर्ट से बाहर निकलने और आगे का सफर शुरू करने में भी यात्रियों को सुविधा मिलने की उम्मीद है. अधिकारियों का अनुमान है कि APM शुरू होने के पहले साल में ही रोजाना करीब 55 हजार लोग इसका इस्तेमाल कर सकते हैं. हालांकि, जो लोग फ्लाइट यात्री नहीं हैं, उनके लिए APM इस्तेमाल करने पर कोई शुल्क लगेगा या नहीं, इस पर अभी फैसला नहीं हुआ है.
2036 तक के लिए प्लान
APM दिल्ली एयरपोर्ट के 2036 तक के दस साल के मास्टर प्लान का हिस्सा है. इस योजना के तहत एयरपोर्ट की सालाना यात्री संभालने की क्षमता को मौजूदा 106 मिलियन से बढ़ाकर करीब 125 मिलियन किया जाएगा. जरूरत पड़ने पर ये क्षमता 129 मिलियन तक भी पहुंच सकती है. नई क्षमता में करीब 86 मिलियन घरेलू और 39 मिलियन अंतरराष्ट्रीय यात्रियों को संभालने की प्लानिंग है. एयरपोर्ट पर फिलहाल T1 की क्षमता 42 मिलियन, T2 की 14 मिलियन और T3 की 50 मिलियन यात्रियों की है. T3 पर अप्रैल 2030 तक एक नया Pier E बनाने की भी योजना है. कुल मिलाकर दिल्ली एयरपोर्ट आने वाले सालों में सिर्फ बड़ा ही नहीं, बल्कि ज्यादा कनेक्टेड और ट्रेवल फ्रेंडली बनने की तरफ तेजी से आगे बढ़ रहा है.
News Source: ANI
