Gujarat News: अहमदाबाद सिविल अस्पताल के डॉक्टरों ने जटिल जन्मजात बीमारी से जूझ रहे दो बच्चों को नई जिंदगी की सौगात दी है. जन्म से ही ईसोफेजियल एट्रेसिया यानी अन्ननली के पूरी तरह विकसित नहीं होने की समस्या से पीड़ित दोनों बच्चों की ‘गैस्ट्रिक पुल-अप’ सर्जरी सफलतापूर्वक की गई. सर्जरी के बाद दोनों बच्चे पहली बार अपने मुंह से खाना खा सके. दोनों बच्चे करीब डेढ़ और ढाई साल तक गैस्ट्रोस्टॉमी ट्यूब के जरिए भोजन लेते थे. अहमदाबाद सिविल अस्पताल के पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग की विशेषज्ञ टीम ने जटिल सर्जरी और लंबे समय तक निगरानी के बाद दोनों बच्चों को सामान्य रूप से मुंह से भोजन लेने योग्य बनाया.
मुंह से नहीं खा पाता था खाना
ईसोफेजियल एट्रेसिया एक गंभीर जन्मजात बीमारी है, जिसमें बच्चे की अन्ननली पूरी तरह विकसित नहीं होती. ऐसे में मुंह से लिया गया भोजन पेट तक नहीं पहुंच पाता. उपलब्ध जानकारी के अनुसार, करीब 25 हजार से 40 हजार नवजात बच्चों में से एक बच्चा इस तरह की जन्मजात समस्या के साथ पैदा होता है. अहमदाबाद सिविल अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक और पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग के प्रमुख डॉ. राकेश जोशी के मुताबिक, ऐसे मामलों में बच्चे के लिए सामान्य तरीके से भोजन करना संभव नहीं होता.
गैस्ट्रोस्टॉमी ट्यूब के जरिए भोजन ले रहे थे
गैस्ट्रिक पुल-अप एक बेहद जटिल सर्जरी है. इसमें बच्चे की पेट की थैली यानी होजरी को ऊपर खींचकर अन्ननली के रूप में इस्तेमाल किया जाता है, ताकि मुंह से लिया गया भोजन पेट तक पहुंच सके. दोनों बच्चों के लिए यह प्रक्रिया इसलिए भी चुनौतीपूर्ण थी क्योंकि वे लंबे समय से गैस्ट्रोस्टॉमी ट्यूब के जरिए भोजन ले रहे थे.
ईसोफेजियल एट्रेसिया की थी समस्या
भावनगर जिले के सिहोर निवासी मजदूर परिवार के मुकेशभाई और वर्षाबेन के ढाई साल के बेटे भव्य को जन्म के समय ही ईसोफेजियल एट्रेसिया की समस्या थी. उसे अहमदाबाद सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां पहले ईसोफेगोस्टॉमी और गैस्ट्रोस्टॉमी की गई।करीब ढाई साल तक ट्यूब के जरिए भोजन लेने के बाद पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग के प्रोफेसर एवं प्रमुख डॉ. राकेश जोशी, प्रोफेसर डॉ. जयश्री रामजी और उनकी टीम ने भव्य की गैस्ट्रिक पुल-अप सर्जरी की. एनेस्थीसिया विभाग की प्रोफेसर डॉ. अदिति, डॉ. सोनल भागवत और उनकी टीम ने भी उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।सर्जरी के बाद किसी बड़ी जटिलता के सामने नहीं आने पर 22वें दिन भव्य ने पहली बार अपने मुंह से खाना खाया. इसके बाद उसकी हालत में लगातार सुधार हुआ और पूरी तरह स्वस्थ होने पर उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई.
60 दिनों की लगातार देखभाल के बाद मिली सफलता
दूसरा मामला बिहार के नवादा का है. भारतीय रेलवे में इलेक्ट्रिशियन के रूप में काम करने वाले पिंटूभाई और नेहाबेन के डेढ़ साल के बेटे वेंदांत कुमार की भी अहमदाबाद सिविल अस्पताल में 20 जुलाई 2026 को सफल गैस्ट्रिक पुल-अप सर्जरी की गई. सर्जरी के 21वें दिन वेंदांत ने पहली बार मुंह से खाना खाया. हालांकि, बाद में गले के हिस्से में सर्जरी से जोड़े गए स्थान पर लीकेज की समस्या सामने आई. इसके बाद मुंह से खाना बंद कर NJ ट्यूब के जरिए भोजन दिया गया और बच्चे को लगातार निगरानी में रखा गया. लगातार उपचार और निगरानी के बाद 47वें दिन फिर से मुंह से खाना शुरू कराया गया. करीब 60 दिनों की सघन चिकित्सा और देखभाल के बाद वेदांत पूरी तरह स्वस्थ हुआ और उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई.
दिव्यांगता को हराकर पढ़ाई का सपना देखने वाली मासूम की पुकार पर दौड़ा प्रशासन, इलाज का भी इंतजाम
बच्चों के जन्म के बाद इलाज चुनौतीपूर्ण
ईसोफेजियल एट्रेसिया से पीड़ित बच्चों के जन्म के बाद का इलाज बेहद चुनौतीपूर्ण होता है. खासतौर पर जब बच्चा लंबे समय तक गैस्ट्रोस्टॉमी ट्यूब के जरिए भोजन करता रहा हो, तब उसे दोबारा मुंह से खाना खिलाने योग्य बनाना एक जटिल सर्जिकल और रिहैबिलिटेशन प्रक्रिया होती है. अहमदाबाद सिविल अस्पताल में हुए इन दोनों मामलों ने यह साबित किया है कि विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम, अत्याधुनिक सर्जिकल सुविधाओं और लंबे समय तक की गई सघन देखभाल के जरिए ऐसी जटिल जन्मजात बीमारी से पीड़ित बच्चों को भी सामान्य रूप से मुंह से भोजन करने योग्य बनाया जा सकता है.
यही सिविल अस्पताल का उद्देश्य
अहमदाबाद सिविल अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राकेश जोशी ने कहा कि लाखों रुपये की इस तरह की जटिल और महंगी चिकित्सा केवल आर्थिक स्थिति के कारण किसी बच्चे से दूर न रहे. यही सिविल अस्पताल का उद्देश्य है.उन्होंने बताया कि 60 दिनों तक अस्पताल में भर्ती रहना, अत्याधुनिक सर्जरी, प्री-ऑपरेटिव और पोस्ट-ऑपरेटिव केयर तथा नर्सिंग सुविधा जैसी सेवाएं जरूरतमंद परिवारों को बिना किसी खर्च के उपलब्ध कराई गईं. अहमदाबाद सिविल अस्पताल में इस तरह की जटिल और महंगी सर्जरी जरूरतमंद मरीजों को नि:शुल्क उपलब्ध कराना गुजरात की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था की मजबूत चिकित्सा सुविधाओं और सेवाभाव का उदाहरण है.
स्वास्थ्य क्षेत्र में नई क्रांति: किडनी मरीजों को अब डायलिसिस से छुटकारा, AI से होगा सटीक इलाज
