Delhi-Kanpur Train: रेलवे मंत्रालय ने गुरुवार को कानपुर सेंट्रल और आनंद विहार टर्मिनल के बीच रोज़ाना ट्रेन सेवा शुरू करने को मंज़ूरी दे दी. इसके नियमित रूप से शुरू होने की आधिकारिक तारीख की घोषणा अभी नहीं की गई है. इस ट्रेन के शुरू होने से इस रूट के हजारों यात्रियों को काफी राहत मिलेगी. नई रोज़ाना ट्रेन सेवा शुरू होने से कानपुर सेंट्रल और आनंद विहार (T) के बीच रेल कनेक्टिविटी मज़बूत होगी. साथ ही यात्रियों को रात भर यात्रा करने का विकल्प और रास्ते में पड़ने वाले अहम स्टेशनों तक कनेक्टिविटी भी मिलेगी.
- ट्रेन नंबर 14153 (कानपुर से आनंद विहार): यह कानपुर सेंट्रल से रोजाना रात 08:40 बजे प्रस्थान करेगी और अगली सुबह 04:50 बजे आनंद विहार पहुंचेगी.
- ट्रेन नंबर 14154 (आनंद विहार से कानपुर): यह आनंद विहार टर्मिनल से रोजाना रात 11:25 बजे रवाना होगी और सुबह 07:25 बजे कानपुर सेंट्रल पहुंचेगी.
428 किमी का सफर आठ घंटे में
यह सेवा दोनों दिशाओं में 428 किलोमीटर की दूरी तय करेगी. कानपुर सेंट्रल से आनंद विहार तक यात्रा का समय आठ घंटे 10 मिनट होगा और वापसी की दिशा में आठ घंटे लगेगा. मंत्रालय के अनुसार, नई ट्रेन के आठ स्टॉपेज फफूंद, इटावा, टूंडला, हाथरस, अलीगढ़, खुर्जा, दादरी और गाज़ियाबाद होंगे. यह रोज़ाना चलने वाली ट्रेन यात्रियों को कानपुर और दिल्ली के बीच रेल यात्रा का एक और विकल्प देगी, जिसमें दोनों तरफ़ रात में यात्रा करने का सुविधाजनक समय होगा. इस ट्रेन से लोगों को कानपुर, इटावा, अलीगढ़, गाजियाबाद और दिल्ली क्षेत्र के बीच आसानी से आने-जाने में मदद मिलेगी. इस अहम रेल कॉरिडोर पर यात्रियों की आवाजाही और आसान हो जाएगी.
अलकापुरी में ROB को भी मंजूरी
इसके अलावा मंत्रालय ने गुजरात सरकार के साथ लागत साझा करने के आधार पर वेस्टर्न रेलवे के वडोदरा डिवीज़न में अलकापुरी में 166.5 करोड़ रुपये की लागत से चार-लेन वाले रोड ओवर ब्रिज (ROB) के निर्माण को भी मंज़ूरी दी है. मंत्रालय ने कहा कि प्रोजेक्ट की कुल लागत भारतीय रेलवे और राज्य सरकार के बीच बराबर-बराबर बांटी जाएगी. रेलवे का हिस्सा लगभग 83.2769 करोड़ रुपये होगा, जबकि राज्य सरकार का हिस्सा भी लगभग 83.2769 करोड़ रुपये होगा. वडोदरा रेलवे स्टेशन के पास मौजूद अलकापुरी रोड अंडर ब्रिज (RUB) शहर के अलकापुरी और कालाघोड़ा इलाकों के बीच पूरब-पश्चिम सड़क संपर्क का एक अहम ज़रिया है.
हालांकि, मौजूदा RUB की वर्टिकल क्लीयरेंस (ऊंचाई) सिर्फ़ तीन मीटर के आसपास है, जिससे बड़े वाहनों की आवाजाही पर रोक लगती है और मॉनसून में बार-बार जलभराव की समस्या होती है. मंत्रालय ने कहा कि इन सीमाओं की वजह से ट्रैफिक जाम, कामकाज में दिक्कतें और सड़क इस्तेमाल करने वालों को परेशानी होती है. चार-लेन वाली ग्रेड-सेपरेटेड सड़क सुविधा मौजूदा सड़क क्रॉसिंग व्यवस्था की क्षमता और कार्यक्षमता को भी बढ़ाएगी.
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