Gen Z: 21 जुलाई को जंतर-मंतर पर छात्रों और युवाओं की ताकत दिखने के बाद अब देश की राजनीति का फोकस साफ तौर पर Gen Z पर आ गया है. आने वाले दिनों में दो बड़े वैचारिक ध्रुव कांग्रेस और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) युवाओं से सीधे संवाद करने जा रहे हैं. एक तरफ राहुल गांधी छात्रों के बीच पहुंच रहे हैं, तो दूसरी ओर संघ प्रमुख मोहन भागवत युवाओं से बातचीत करेंगे. सवाल यही है कि देश की सबसे बड़ी राजनीतिक लड़ाई अब क्या युवा मतदाताओं के दिल और दिमाग जीतने की लड़ाई बन चुकी है?
8 अगस्त को प्रयागराज में रहेंगे राहुल
21 जुलाई को जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन ने यह संदेश दिया कि युवा अब केवल सोशल मीडिया तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सड़क पर उतरकर भी अपनी बात रखने को तैयार है. इसी के बाद राजनीतिक दलों और वैचारिक संगठनों ने युवाओं तक सीधे पहुंचने की रणनीति तेज कर दी है. कांग्रेस नेता राहुल गांधी 8 अगस्त को प्रयागराज में छात्रों के साथ संवाद करेंगे. इसे पार्टी युवाओं के बीच अपनी पहुंच बढ़ाने और शिक्षा, रोजगार, परीक्षा प्रणाली तथा भविष्य से जुड़े मुद्दों पर सीधा संवाद स्थापित करने के प्रयास के रूप में देख रही है. कार्यक्रम के दौरान महंगी शिक्षा, पेपर लीक, भर्ती घोटाले और बेरोजगारी पर बातचीत होगी. इस दौरान राहुल गांधी युवाओं से सीधा संवाद करेंगे.
6 अगस्त को भागवत करेंगे युवाओं से संवाद
उधर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) भी युवाओं के बीच अपनी सक्रियता बढ़ा रहा है. संघ प्रमुख मोहन भागवत मुंबई में युवाओं और Gen Z के साथ संवाद करेंगे. संघ का उद्देश्य नई पीढ़ी के सामने अपने विचार, राष्ट्र निर्माण की अवधारणा और सामाजिक भागीदारी का संदेश रखना माना जा रहा है. संघ प्रमुख मोहन भागवत 6 अगस्त को मुंबई के नीता मुकेश अंबानी कल्चरल सेंटर में ‘जेन-जी’ और ‘जेन-अल्फा के 2,000 से अधिक युवाओं से संवाद करेंगे. यह कार्यक्रम India’s International Movement to Unite Nations (IIMUN) के 15वें वार्षिक सम्मेलन के उद्घाटन अवसर पर आयोजित किया गया है. संबोधन के मुख्य बिंदु और उद्देश्य है ‘The Role of Youth in Uniting the World, the Indian Way’. यह पारंपरिक भाषण न होकर एक सीधी बातचीत है, जिसमें 100 से अधिक शहरों से आए 15 से 19 वर्ष के छात्र-छात्राएं हिस्सा ले रहे हैं.
युवाओं को साधने की वैचारिक होड़
राजनीति दलों की नजर भारत के उन करोड़ों युवा मतदाताओं पर है जो आने वाले चुनावों की दिशा तय करने में बड़ी भूमिका निभाएंगे. यही कारण है कि अब केवल चुनावी रैलियां नहीं, बल्कि डायरेक्ट यूथ एंगेजमेंट राजनीतिक रणनीति का अहम हिस्सा बनता जा रहा है. जंतर-मंतर के प्रदर्शन ने यह साफ कर दिया कि युवा अब राजनीतिक विमर्श के केंद्र में हैं. इसलिए चाहे राहुल गांधी हों या मोहन भागवत, दोनों सीधे Gen Z से संवाद कर रहे हैं. आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि युवाओं की आकांक्षाओं, रोजगार, शिक्षा और अवसरों के सवालों पर किसकी बात नई पीढ़ी को ज्यादा प्रभावित करती है. देश की राजनीति में अब सबसे बड़ी लड़ाई सिर्फ सत्ता की नहीं, बल्कि Gen Z के भरोसे की है. जो युवा मतदाताओं की उम्मीदों और आकांक्षाओं को बेहतर ढंग से समझ पाएगा, वही आने वाले राजनीतिक मुकाबलों में बढ़त हासिल कर सकता है.
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