Home Latest News & Updates एयरक्राफ्ट मैन्युफैक्चरिंग से लेकर योग चैंपियनशिप तक, PM मोदी ने ‘मन की बात’ में गिनाई देश की उपलब्धियां

एयरक्राफ्ट मैन्युफैक्चरिंग से लेकर योग चैंपियनशिप तक, PM मोदी ने ‘मन की बात’ में गिनाई देश की उपलब्धियां

by Neha Singh 28 June 2026, 1:22 PM IST
28 June 2026, 1:22 PM IST
Mann Ki Baat

Mann Ki Baat: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को आत्मनिर्भर बनने के लिए देश द्वारा हासिल की गई कई उपलब्धियों पर जोर दिया. अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में पीएम ने बताया कि जून में ही देश ने एविएशन सेक्टर में एक बड़ी सफलता हासिल की. उन्होंने भारत में बने C-295 एयरक्राफ्ट की पहली उड़ान का जिक्र किया, जिससे एयरोस्पेस मैन्युफैक्चरिंग क्षमताओं को बढ़ावा मिलेगा. पीएम ने कहा, भारत में 40 C-295 एयरक्राफ्ट बनाए जा रहे हैं और इससे MSMEs और एयरोस्पेस सेक्टर को नई ताकत मिल रही है इससे रोजगार के मौके भी बढ़ेंगे.”

C-295 की पहली उड़ान

पहले भारत में बने C-295 मिलिट्री ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट ने 10 जून को अपनी पहली उड़ान सफलतापूर्वक पूरी की. IAF लगभग 21,935 करोड़ रुपये की लागत से 56 C-295 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट खरीद रहा है. इनमें से चालीस एयरक्राफ्ट टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड, एयरबस के साथ मिलकर वडोदरा में एक प्रोडक्शन फैसिलिटी में असेंबल करेगा. मोदी ने कहा कि जून में भी देश ने कुछ ऐसी उपलब्धियां हासिल की हैं जिनसे हर नागरिक को गर्व होता है. उन्होंने कहा, “हाल ही में, मुझे कोलकाता में नेवी से जुड़े एक प्रोग्राम में हिस्सा लेने का मौका मिला. वहां, INS दुनागिरी, INS शंशाक और INS अग्रय  को इंडियन नेवी के बेड़े में शामिल किया गया. इन जहाजों के डिजाइन से लेकर मैन्युफैक्चरिंग तक, सब कुछ स्वदेशी है.”

योग चैंपियनशिप में भारत ने जीते 114 मेडल

प्रधानमंत्री ने 21 जून को मनाए जाने वाले इंटरनेशनल योग दिवस का भी जिक्र किया और कहा कि दुनिया भर में 2,500 से ज़्यादा जगहों पर अलग-अलग योग प्रोग्राम हुए, जिनमें करोड़ों लोगों ने हिस्सा लिया. उन्होंने अहमदाबाद में हुई ‘वर्ल्ड योग आसन चैंपियनशिप’ के बारे में भी काफी चर्चा की, जहां भारत ने 102 गोल्ड मेडल समेत कुल 114 मेडल जीते. उन्होंने कहा कि इस चैंपियनशिप में भारत मेडल टैली में टॉप पर रहा.

‘शास्त्रार्थ’ शुरू करने पर जोर

पीएम मोदी ने नालंदा यूनिवर्सिटी द्वारा एक पुरानी परंपरा, ‘शास्त्रार्थ’ की परंपरा को फिर से शुरू करने के बारे में भी बात की. उन्होंने कहा कि ‘शास्त्रार्थ’ सिर्फ अपने विचार बताने का जरिया नहीं है, यह बहस, बातचीत और विचार-विमर्श की एक अनुशासित प्रक्रिया है. इसमें, अपनी बात को लॉजिक के साथ, फैक्ट्स के साथ पेश करना बहुत जरूरी है और इसमें महारत हासिल होनी चाहिए. दूसरों के विचारों को सब्र से सुनने और समझने की प्रैक्टिस भी इसी शास्त्रार्थ प्रक्रिया से आती है. मुझे खुशी है कि नालंदा यूनिवर्सिटी ने इसे अपने कॉन्वोकेशन सेरेमनी का हिस्सा बनाया है.”

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News Source: PTI

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