Home Latest News & Updates 1424 खाते फ्रीज, 17 करोड़ की संपत्ति जब्त…, पूर्वोत्तर भारत में ड्रग्स-हवाला नेटवर्क पर ‘ऑपरेशन ट्राइडेंट’ का वार

1424 खाते फ्रीज, 17 करोड़ की संपत्ति जब्त…, पूर्वोत्तर भारत में ड्रग्स-हवाला नेटवर्क पर ‘ऑपरेशन ट्राइडेंट’ का वार

by Neha Singh 25 October 2026, 4:30 PM IST (Updated 25 October 2026, 4:31 PM IST)
25 October 2026, 4:30 PM IST (Updated 25 October 2026, 4:31 PM IST)
Operation Trident

Operation Trident: भारत में ड्रग्स के सिंडिकेट का खात्मा करने के लिए गृह मंत्रालय ‘ऑपरेशन ट्राइडेंट’ चला रहा है. गृह मंत्री अमित शाह ने इसकी जानकारी साझा की है. ‘ऑपरेशन ट्राइडेंट’ सुरक्षा एजेंसियों द्वारा चलाया गया एक बड़ा संयुक्त अभियान है, जिसका उद्देश्य पूर्वोत्तर भारत में अंतरराष्ट्रीय नार्को-कार्टेल और उसके वित्तीय नेटवर्क को खत्म करना है. इस ऑपरेशन में मिली बड़ी सफलता के बारे में बताते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने घोषणा की कि 23 अक्टूबर को केंद्रीय एजेंसियों जैसे कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने पूर्वोत्तर के तीन राज्यों असम, मिजोरम और मणिपुर की पुलिस के साथ मिलकर, 38 जगहों पर एक साथ कई छापे मारे. इस छापेमारी में भारी मात्रा में ड्रग्स बरामद किए गए हैं और करीब 100 करोड़ के हवाला लेनदेन का भंडाफोड़ हुआ है. अब तक इस ऑपरेशन में 18 लोगों की गिरफ्तारी हुई है.

मिजोरम और मणिपुर में 1,424 बैंक खाते फ्रीज

‘ऑपरेशन ट्राइडेंट’ के तहत, प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मिजोरम और मणिपुर में नार्को-ट्रेड और नार्को-हवाला ऑपरेटरों से जुड़े 1,424 बैंक खातों को फ्रीज कर दिया है. साथ ही मिजोरम स्थित नार्को-हवाला ऑपरेटरों की 17.82 करोड़ रुपये की संपत्ति को अस्थायी रूप से जब्त कर लिया गया है. ED के अलावा, उसी दिन NCB और राज्य पुलिस बलों ने भी असम, मिजोरम और मणिपुर में 38 जगहों पर अंतरराष्ट्रीय नशीले पदार्थों की तस्करी करने वाले नेटवर्क के खिलाफ संयुक्त रूप से कार्रवाई की. इस दौरान 500 डेटोनेटर और 12 लाख रुपए कैश बरामद हुआ है. यह कार्रवाई 23 अक्टूबर को नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) और मिजोरम पुलिस के साथ मिलकर ED के आइजोल और इंफाल सब-जोनल कार्यालयों द्वारा चलाए गए एक संयुक्त अभियान का हिस्सा थी.

ED का यह सर्च ऑपरेशन ‘प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट, 2002’ (PMLA) की धारा 17 के तहत चलाया गया. यह कार्रवाई आइजोल, चम्फाई और लॉंगत्लाई (मिजोरम) तथा चूड़ाचांदपुर (मणिपुर) में कई जगहों पर की गई. यह मनी लॉन्ड्रिंग के 3 मामलों से जुड़ी थी, जो म्यांमार से हेरोइन, ब्राउन शुगर और मेथामफेटामाइन टैबलेट की तस्करी और नशीले पदार्थों की बिक्री से मिली रकम के हवाला के जरिए लेन-देन से संबंधित हैं.

तलाशी के दौरान PMLA की धारा 19 के तहत 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया. इनमें 3 मिजोरम से और 3 मणिपुर से हैं. ED ने बताया कि नशीले पदार्थों से जुड़े मामलों में फिलहाल न्यायिक हिरासत में बंद 4 अन्य आरोपियों को गिरफ्तार करने के लिए मिजोरम की विशेष अदालत में आवेदन प्रक्रियाधीन हैं. सुरक्षा एजेंसियों और तीनों राज्यों की पुलिस ने 12 अन्य को गिरफ्तार किया है. इससे पहले भी ED ने बैंक खातों को फ्रीज करके 8.19 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की थी. इस तरह, अब तक जब्त की गई कुल संपत्ति 26 करोड़ रुपये से अधिक हो गई है.

म्यांमार से मिजोरम आ रही थी ड्रेग्स की खेप

ED ने ‘नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (NDPS) एक्ट, 1985’ के तहत दर्ज FIR के आधार पर तीन मामलों में जांच शुरू की. एक ‘एनफोर्समेंट केस इंफॉर्मेशन रिपोर्ट’ (ECIR) 14 मार्च, 2025 को चम्फाई की जोखावथर पुलिस द्वारा 4.722 किलोग्राम हेरोइन (440 साबुन की टिकिया के पैकेट) जब्त किए जाने से जुड़ी है. यह खेप म्यांमार के एक सप्लायर के लिए जोखावथर से आइजोल ले जाई जा रही थी. एक और ECIR 21 अगस्त, 2025 को मिजोरम में सेलिंग के पास NH-06A पर NCB, अगरतला द्वारा वाहनों के एक काफिले से 49.101 किलोग्राम मेथामफेटामाइन टैबलेट और 40 ग्राम हेरोइन जब्त किए जाने से जुड़ी है. यह खेप म्यांमार के चिंटुआंग से आई थी और इसे दमचेरा-कानहमून बॉर्डर पर पहुंचाया जाना था. वहीं तीसरी ECIR इस साल 2 जुलाई को मणिपुर में चूड़ाचंदपुर पुलिस द्वारा 2.413 किलोग्राम ब्राउन शुगर और 31.43 लाख रुपये नकद जब्त किए जाने से जुड़ी है. इस मामले में जब्त की गई नकदी म्यांमार से सप्लाई किए गए नशीले पदार्थों की बिक्री से मिली थी, जिसे सप्लायर्स को भेजने के लिए चूड़ाचंदपुर में इकट्ठा किया गया था.

‘डेथ ट्राएंगल’ से सीमा पार जाते हैं ड्रग्स

ED ने बताया कि इन तीन मामलों की जांच से एक आपस में जुड़े ‘नारको-हवाला इकोसिस्टम’ का खुलासा हुआ है. इसमें चम्फाई, आइजोल और लॉंग्टलाई के कुछ खास बैंक खातों का इस्तेमाल किया जाता है. इन खातों में मणिपुर, मिजोरम, असम और त्रिपुरा से नशीले पदार्थों की बिक्री से आया पैसा जमा होता है, जिसे बाद में म्यांमार में बैठे सप्लायर्स तक पहुंचा दिया जाता है. पूर्वोत्तर भारत म्यांमार के साथ 1,643 किलोमीटर लंबी खुली सीमा साझा करता है. यह रास्ता ‘गोल्डन ट्राएंगल’ (म्यांमार, लाओस और थाईलैंड) में बनने वाले नशीले पदार्थों के लिए मुख्य जमीनी रास्ता बन गया है. भारत अब इस इलाके को ‘डेथ ट्राएंगल’ (मौत का त्रिकोण) कहता है. अधिकारियों ने बताया कि मिजोरम और मणिपुर में आने वाली हेरोइन और मेथामफेटामाइन की गोलियां स्थानीय स्तर पर इस्तेमाल होती हैं और फिर असम के रास्ते भारत के बाकी हिस्सों और बांग्लादेश भेज दी जाती हैं. इस पूरी चेन से मिलने वाला पैसा वापस मिजोरम के सीमावर्ती कस्बों में आता है, जहां से म्यांमार के सप्लायरों को भुगतान किया जाता है.

ऐसे होती है सप्लाई

दूसरी तरफ, केंद्रीय एजेंसी ने बताया कि म्यांमार में तैयार हेरोइन, ब्राउन शुगर और मेथामफेटामाइन की गोलियां, म्यांमार के खावमावी के सामने स्थित जोखावथर में ‘तियाउ नदी’ पार करके भारत लाई जाती हैं. इन्हें पहले चम्फाई में इकट्ठा किया जाता है और फिर चम्फाई-आइजोल रोड और NH-06A के रास्ते आइजोल, वैरेन्गटे और असम-त्रिपुरा की सीमाओं तक पहुंचाया जाता है. म्यांमार में बैठे सरगना, जैसे कि रुनथानचुंगी और चिंटुआंग, जोखावथर और चम्फाई में स्थानीय लोगों को काम पर रखते हैं. ये लोग साबुन के डिब्बों, टैक्सियों, मोटरसाइकिलों और ट्रकों के काफिले (जिनके साथ एस्कॉर्ट गाड़ियां भी होती हैं) में ड्रग्स छिपाकर ले जाते हैं. इन्हें भुगतान उसी ‘हवाला’ खाते से किया जाता है, जिसमें पूरे पूर्वोत्तर भारत से ड्रग्स की बिक्री का पैसा आता है. इस तरह, केमिकल की सप्लाई, ड्रग्स का आना-जाना और पैसों का लेन-देन, ये सब चम्फाई-जोखावथर कॉरिडोर पर आकर मिल जाते हैं.”

ड्रग्स की बिक्री से हवाला नेटवर्क तक पहुंचता था पैसा

प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच के अनुसार, यह पूरा नेटवर्क भारत के अलग-अलग हिस्सों में नशीले पदार्थों (ड्रग्स) की बिक्री से शुरू हुआ था. म्यांमार से आने वाले नशीले पदार्थ मणिपुर, असम, त्रिपुरा और देश के अन्य इलाकों में बेचे जाते थे. बिक्री से मिलने वाला नकद पैसा ‘हवाला’ सिस्टम के जरिए भेजा जाता था. यह पैसा अलग-अलग माध्यमों से इकट्ठा किया जाता था और अंत में म्यांमार में बैठे सप्लायरों तक पहुंचा दिया जाता था. जांच एजेंसी ने खुलासा किया कि इस सिंडिकेट के सदस्य मणिपुर के चूड़ाचांदपुर इलाके में नकद इकट्ठा करने का काम करते थे. इसके बाद यह पैसा ‘कैश हैंडलर्स’ को सौंप दिया जाता था. ये लोग मिनी-ATM और कस्टमर सर्विस पॉइंट (CSP) काउंटरों का इस्तेमाल करके इस नकदी को बैंकिंग सिस्टम में जमा कर देते थे. इस तरह, वे नशीले पदार्थों की बिक्री से मिली रकम को वैध बैंकिंग लेनदेन के रूप में दिखाने की कोशिश करते थे.

रोजाना 1 करोड़ रुपये की नकदी आती थी

ED का कहना है कि तानियांग रोजाना 1 करोड़ रुपये तक की रकम चूड़ाचांदपुर के ‘गो अल्फा ट्रिप’ (Go Alpha Trip) नाम के एक काउंटर पर पहुंचाती थी, जिसे एच. गौजलाल (H. Gaujlal) चलाता था. नकदी के साथ-साथ उन बैंक खातों की एक लिस्ट भी दी जाती थी, जिनमें यह पैसा ट्रांसफर किया जाना था. इस काउंटर के रिकॉर्ड में तानियांग की पहचान ‘नुनियांग’ (Nuniyang) कोडनेम से की गई थी. जांच में पता चला कि 2024 से जून 2026 के बीच, इस काउंटर के जरिए 2,947 लेनदेन हुए, जिनकी कुल रकम 175.03 करोड़ रुपये थी. यह पैसा जोखावथर, चम्फाई, लॉंगत्लाई और आइजोल में व्यापारियों, फार्मेसियों और अन्य लोगों को बांटा गया. ED के अनुसार, लेनदेन के असली स्रोत को छिपाने के लिए पैसे का कुछ हिस्सा अन्य खातों और ‘शेल कंपनियों’ के जरिए घुमाया गया था.

किराए पर लिए जाते थे बैंक खाते

कमीशन के बदले बैंक खाते किराए पर दिए जाते थे. ED के अनुसार, मिजोरम के कुछ लोगों ने कथित तौर पर ऑपरेटरों को अपने बैंक खातों का इस्तेमाल करने दिया था. इसके बदले में, उन्हें हर 1 लाख रुपये जमा करने पर 500 रुपये तक का कमीशन मिलता था. एक बार जब पैसे इन खातों में आ जाते थे, तो कुछ ही दिनों के भीतर उन्हें RTGS, NEFT और IMPS के जरिए दूसरे खातों में ट्रांसफर कर दिया जाता था. जांच एजेंसी ने ऐसे कई खातों की पहचान की, जिनमें बड़ी रकम जमा की गई थी, जबकि खाताधारकों की आय बहुत कम थी. जांच के दायरे में आए सात खातों में कुल 11.98 करोड़ रुपये जमा किए गए थे, लेकिन इनमें से केवल 17 लाख रुपये ही नकद निकाले गए.

रियल एस्टेट में लगाया जाता हवाला का पैसा

ED की जांच के अनुसार, इस नेटवर्क से जुड़े लोग म्यांमार में बैठे व्यक्तियों के निर्देश पर अलग-अलग भारतीय बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर करते थे. इसके बदले में, सीमा पार मौजूद आपूर्तिकर्ताओं का बकाया भुगतान म्यांमार की मुद्रा ‘क्यात’ (Kyat) में किया जाता था. इन लेन-देन को अंजाम देने के लिए, कथित ऑपरेटर हर 1 लाख रुपये के ट्रांसफर पर 250 से 500 रुपये तक का कमीशन लेते थे. जांच एजेंसी का आरोप है कि इस नेटवर्क के जरिए हुई कमाई को रियल एस्टेट और अन्य व्यावसायिक उपक्रमों में निवेश किया गया. इसमें चम्फाई के ज़ियोन वेंग (Zion Veng) इलाके में स्थित पांच मंजिला कमर्शियल इमारत ‘होटल जेटीएस’ (Hotel JTS) भी शामिल है. ED के अनुसार, इस इमारत के निर्माण में हवाला के जरिए आए पैसों का इस्तेमाल किया गया था.

छह गिरफ्तारियां, कई जगहों पर छापेमारी

इस मामले में, ED ने कश्यप जी. ठक्कर, थांगखुआला (चम्फाई से), टी. चतुआना वनलालगाखा, जेंगाहेनियांग (उर्फ तानियांग), नेन्गजातुआन वाल्टे (उर्फ तुआनपी) और एच. गौजालाल को गिरफ्तार किया है. एजेंसी के मुताबिक, तानियांग और तुआनपी पहले से ही NDPS (नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस) मामलों के सिलसिले में न्यायिक हिरासत में थे. उन्हें संबंधित विशेष अदालत की अनुमति से इस मामले में औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया गया है. गिरफ्तार किए गए लोगों को संबंधित विशेष अदालतों के सामने पेश किया जा रहा है. मिजोरम की विशेष अदालत में चार अन्य संदिग्धों की गिरफ्तारी के लिए कानूनी प्रक्रिया भी चल रही है.

26 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति जब्त

23 अक्टूबर को ED ने ‘होटल JTS’ के लिए एक प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर (अस्थायी कुर्की आदेश) जारी किया. 571.11 वर्ग मीटर के प्लॉट पर बनी इस इमारत की कीमत 17.82 करोड़ रुपये है. यह संपत्ति लाललियानसांगा के नाम पर रजिस्टर्ड है. इसके अलावा, संदिग्ध नार्को-हवाला गतिविधियों से जुड़े बैंक खातों में मौजूद 8.19 करोड़ रुपये को भी इसमें शामिल करने पर, इस मामले में जब्त की गई कुल संपत्ति का मूल्य 26 करोड़ रुपये से अधिक हो गया है. साथ ही 12 लाख रुपए कैश बरामद किए गया है. फिलहाल, ED इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लाभार्थियों, म्यांमार में मौजूद लोगों, मिनी-ATM और कस्टमर सर्विस पॉइंट (CSP) चलाने वालों तथा संबंधित बैंक अधिकारियों की भूमिका की जांच कर रही है.

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News Source: ANI

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