President Murmu: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शुक्रवार को आदिवासी समुदायों से आग्रह किया कि वे अपने बच्चों को शिक्षित करें और अपनी सांस्कृतिक पहचान को छोड़े बिना प्रगति के नए अवसरों को अपनाएं. राष्ट्रपति ने छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले के मुख्यालय जगदलपुर में आयोजित प्रसिद्ध ‘बस्तर दशहरा’ उत्सव को संबोधित किया. मुर्मू ने कहा कि समाज को बदलते समय के साथ आगे बढ़ना चाहिए. यह सुनिश्चित करें कि बच्चों को अच्छी शिक्षा मिले और उन्हें जीवन में पढ़ने, सीखने और आगे बढ़ने के अवसर मिलें.
अपनाएं सकारात्मक सोच और विकास के रास्ते
उन्होंने कहा कि सोच में सकारात्मक बदलाव लाना और विकास के नए रास्तों को अपनाना जरूरी है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि कोई अपनी संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक पहचान को छोड़ दे. राष्ट्रपति ने कहा कि आधुनिक शिक्षा, नए विचारों और अवसरों को अपनाते समय अपनी सांस्कृतिक विरासत, रीति-रिवाजों और सामाजिक मूल्यों की रक्षा करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है. उन्होंने आदिवासी समुदायों से आग्रह किया कि वे अपनी जड़ों से जुड़े रहें, पारंपरिक संस्थाओं का सम्मान करें और आने वाली पीढ़ियों को अपनी सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराएं. आदिवासी समुदायों की सामूहिक निर्णय लेने की प्रणाली की सराहना करते हुए मुर्मू ने कहा कि उनकी पारंपरिक संस्थाएं सामाजिक एकता, न्याय, आपसी सहयोग और सुशासन का एक बेहतरीन उदाहरण पेश करती हैं.
आदिवासी परंपराओं के साथ अपने निजी जुड़ाव का भी किया जिक्र
मुर्मू ने बताया कि समय के साथ शासन प्रणालियों, नीतियों और कानूनों में बदलाव आया है, लेकिन आदिवासी समुदायों ने अपनी परंपराओं और सामाजिक नियमों को पीढ़ियों तक संजोकर रखा है. उन्होंने कहा कि इससे शांति, सद्भाव, आपसी सम्मान और सामुदायिक भावना को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. राष्ट्रपति ने आदिवासी परंपराओं के साथ अपने निजी जुड़ाव का भी जिक्र किया और बताया कि उनके दादा, पिता और भाई ‘मांझी’ (पारंपरिक ग्राम प्रमुख) के रूप में सेवा दे चुके हैं. मुर्मू ने कहा कि भारत ने राजाओं के शासन से लेकर ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन और फिर लोकतंत्र तक, कई तरह की शासन प्रणालियां देखी हैं. इसके बावजूद आदिवासी समुदायों की पारंपरिक व्यवस्थाएं आज भी कायम हैं.
समाधान में बुजुर्गों की भूमिका महत्वपूर्ण
पारंपरिक विवाद-समाधान प्रणालियों का जिक्र करते हुए उन्होंने पारिवारिक झगड़ों, जमीन से जुड़े मुद्दों और अन्य विवादों को सुलझाने में ‘मांझी’ और समुदाय के बुजुर्गों की भूमिका पर प्रकाश डाला. उन्होंने बताया कि ग्रामीण ‘मांझी’ के पास जाते थे, जो दोनों पक्षों को एक साथ लाते, उनकी बातें सुनते और आपसी सहमति से विवादों को सुलझाने का प्रयास करते थे. राष्ट्रपति ने ‘मुरिया दरबार’ की ऐतिहासिक परंपरा को संरक्षित करने और इसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया. इस कार्यक्रम में राज्यपाल रमेन डेका और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय भी मौजूद थे.
