Home Top News चीन के साथ तनाव की खबरों पर MEA ने तोड़ी चुप्पी, कहा- LAC पर गलतफहमी दूर करने के प्रयास जारी

चीन के साथ तनाव की खबरों पर MEA ने तोड़ी चुप्पी, कहा- LAC पर गलतफहमी दूर करने के प्रयास जारी

by Sachin Kumar 23 October 2026, 7:31 PM IST (Updated 23 October 2026, 7:39 PM IST)
23 October 2026, 7:31 PM IST (Updated 23 October 2026, 7:39 PM IST)
MEA breaks silence tension border China

India-China Tension: अरुणाचल प्रदेश में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच कथित टकराव की खबरों को लेकर सियासत तेज हो गई है. कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर सवाल उठाए हैं. पार्टी ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने चीन के सामने सरेंडर कर दिया है और सीमा सुरक्षा के मुद्दे को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है. इसी बीच, विदेश मंत्रालय का बयान सामने आया है. मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को इस मामले पर सरकार का रुख स्पष्ट किया. यह स्पष्टीकरण ऐसे समय आया है, जब भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर के हवाले से अरुणाचल प्रदेश में चीनी सेना (PLA) के साथ लगातार टकराव की खबरें सामने आईं.

राजनयिक संबंध का इस्तेमाल कर रहे

विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस मामले में जहां तक विस्तृत जानकारी की बात है तो मैं आपको रक्षा मंत्रालय की ओर निर्देशित करूंगा. हमने पहले भी बताया है कि भारत-चीन सीमावर्ती इलाकों में स्थिति तब तनावपूर्ण हो जाती है जब चीनी सेनाएं गश्त के तरीकों से हटकर काम करती हैं. दोनों पक्ष लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) पर लंबित मुद्दों को सुलझाने और गलफहमी या गलत आकलन से बचने के लिए मौजूदा राजनयिक का इस्तेमाल कर रहे हैं. दोनों पक्षों सीमा प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए कुछ खास इलाकों में LAC को लेकर आपसी समझ बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा करने के लिए भी सहमत हुए हैं.

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समग्र विकास के लिए सीमा पर शांति जरूरी

रणधीर जायसवाल ने कहा कि मैं इस बात जोर देना चाहूंगा कि दोनों देशों के आपसी संबंधों के समग्र विकास के लिए सीमावर्ती इलाकों में शांति और स्थिरता बनाए रखना जरूरी है. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस विषय पर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है. खरगे ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश में PLA के साथ लगातार हो रहे टकराव की ITBP के DG द्वारा पुष्टि करना बेहद चिंताजनक है. डोकलाम और गलवान के बाद क्या एक और गंभीर टकराव की स्थिति बन रही है? अगस्त में तक्सिंग के पास चीनी घुसपैठ की खबरें सामने आई थीं. फिर भी वाचा-दमाई में कोर कमांडर स्तर की बातचीत के 47 दिन बाद टकराव जारी है. क्या भारत की पेट्रोलिंग की पहुंच प्रभावित हुई है? उन्होंने आगे कहा कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न अंग है. देश को अंधेरे में क्यों रखा जा रहा है? कांग्रेस अध्यक्ष ने कूटनीतिक मोर्चे पर जवाबदेही की भी मांग की और प्रधानमंत्री मोदी से इस मुद्दे पर संसद में बयान देने को कहा है.

दोनों देशों के बीच में हुईं कई दौर की बातचीत

मालूम हो कि पीएम मोदी और राष्ट्रपति शी के बीच कम से कम 23 मुलाकातें हुईं. इसके अलावा, NSA अजीत डोभाल के साथ विशेष प्रतिनिधियों के 25 दौर की वार्ता, WMCC की 36 बैठकें और लगातार हुए SCO और BRICS शिखर सम्मेलन हुए हैं. खरगे ने कहा कि इन मुलाकातों और बातचीत से क्या ठोस नतीजे निकले हैं? क्या मई 2020 से पहले भारत को हासिल गश्त (Patrolling) करने के अधिकार पूरी तरह से बहाल हो गए हैं? राष्ट्रीय सुरक्षा के मामले में जवाबदेही जरूरी है, न कि केवल कूटनीतिक फोटो खिंचवाने के मौके या ‘गले मिलने वाली कूटनीति’ (Hugplomacy)! विपक्ष पर हमला करने के बजाय प्रधानमंत्री मोदी को संसद और पूरे देश को विश्वास में लेना चाहिए. इस साल 25 अगस्त को सीमा विवाद पर भारत और चीन के विशेष प्रतिनिधियों (SR) के बीच बातचीत का 25वां दौर बीजिंग में आयोजित हुआ. दोनों पक्षों ने दोहराया कि वे अपने-अपने देशों के नेताओं से मिले निर्देशों का पालन करेंगे, सीमावर्ती इलाकों में शांति और स्थिरता बनाए रखेंगे और द्विपक्षीय संबंधों के स्वस्थ और स्थिर विकास के लिए एक अनुकूल माहौल तैयार करेंगे.

दोनों पक्षों को स्वीकार्य समाधान खोजना होगा

दोनों पक्षों ने सीमा विवाद के समाधान के लिए एक रूपरेखा पर बातचीत को आगे बढ़ाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई. यह बातचीत 2005 में हस्ताक्षरित ‘भारत-चीन सीमा विवाद के समाधान के लिए राजनीतिक मापदंडों और मार्गदर्शक सिद्धांतों पर समझौते’ तथा उसके बाद हुई विशेष प्रतिनिधि (SR) वार्ता में बनी सहमति के अनुरूप होगी. इसका उद्देश्य एक निष्पक्ष, तर्कसंगत और दोनों पक्षों को स्वीकार्य समाधान खोजना है. दोनों पक्षों ने इस बात पर भी सहमति जताई कि जमीनी स्तर पर उत्पन्न किसी भी स्थिति का समाधान मौजूदा राजनयिक और सैन्य माध्यमों के जरिए तुरंत किया जाएगा. इसका मकसद लंबित मुद्दों को सुलझाया जा सके और LAC पर किसी भी तरह की गलतफहमी या गलत आकलन से बचा जा सके.

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News Source: ANI

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