Protest Site in India: प्रदर्शनों का केंद्र रहा जंतर-मंतर अब खाली हो गया है. अब बगावत की आवाज जंतर-मंतर से नई आएगी. वहां पोस्टर नहीं दिखेंगे और न ही नारे लगेंगे. सरकार ने विरोध प्रदर्शन की लहर को जंतर से मोड़कर कहीं और भेज दिया है. दिल्ली पुलिस ने धरना-प्रदर्शन के निर्धारित स्थलों में बड़ा बदलाव किया है. जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटा दिया गया है. गृह मंत्रालय ने इसकी जगह तीन नए प्रदर्शन स्थलों को तय किया है. यानी जंतर मंतर पुरना जंतर-मंतर नहीं रहा.
इतिहास और वर्तमान को देखें तो लगभग हर शहर में विरोध-प्रदर्शन के लिए एक खास जगह होती है, चाहे वह कोलकाता, मुंबई और चेन्नई जैसे बड़े शहर हों या जयपुर और पणजी जैसे छोटे शहर. समय के साथ, इनमें से कई जगहों को लोगों की सुविधा के नाम पर विरोध-प्रदर्शन के लिए बंद कर दिया गया, जबकि कुछ जगहें आज भी ‘फ्री स्पीच जोन’ (जहां लोग अपनी बात कह सकें) या विरोध-प्रदर्शन के केंद्रों के तौर पर बनी हुई हैं. इनमें से कुछ जगहें ब्रिटिश दमन का गवाह रही हैं, तो कई जगहें महात्मा गांधी से जुड़े होने के कारण खास पहचान रखती हैं. जब सोमवार को दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर को विरोध-प्रदर्शन की जगह के तौर पर बंद कर दिया, तो देश भर के दूसरे “जंतर-मंतरों” पर लोगों का ध्यान गया; इनमें से ज्यादातर सत्ता के केंद्रों के पास ही स्थित हैं. आइए इनमें से कुछ जगहों पर नजर डालते हैं, जिनके नाम ही इतिहास की याद दिलाते हैं.
जंतर मंतर
जंतर-मंतर का इतिहास 300 साल पुराना है. इसे महाराजा सवाई जय सिंह द्वितीय ने मुगल सम्राट मोहम्मद शाह के शासनकाल में 1724 बनवाया था. महाराजा ने दिल्ली में जंतर-मंतर का निर्माण खगोलीय अध्ययन के लिए कराया था. delhitourism.gov.in के अनुसार, ‘जंतर मंतर’ नाम ‘यंत्र’ (जिसका अर्थ है उपकरण) और ‘मंत्र’ (जिसका अर्थ है सूत्र या फ़ॉर्मूला) शब्दों से बना है. यह खगोलीय घटनाओं को मापने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले उपकरण है. आज जंतर मंतर एक ऐतिहासिक स्मारक और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है. यहां मौजूद उपकरण यह दिखाते हैं कि आधुनिक तकनीक के आने से बहुत पहले ही भारत में खगोल विज्ञान और गणित का व्यवस्थित अध्ययन किया जाता था.
यह एक ऐसी जगह भी है जहां विरोध-प्रदर्शनों के जरिए देश की लोकतांत्रिक आवाज गूंजती है. यहां अलग-अलग संगठनों और नागरिकों ने अपनी मांगें रखी हैं. 1993 से यह राजधानी में धरने और प्रदर्शनों की मुख्य जगह बन गया है. जंतर मंतर कई महत्वपूर्ण आंदोलनों और प्रदर्शनों का गवाह रहा है, जिनमें अन्ना हजारे का जन लोकपाल आंदोलन (2011), निर्भया न्याय आंदोलन (2012), निडो तानियम की मौत पर विरोध (2014), पूर्व सैनिकों का ‘वन रैंक, वन पेंशन’ (OROP) के लिए आंदोलन, CAA-NRC विरोधी प्रदर्शन (2019-20) और पहलवानों का विरोध-प्रदर्शन (2023) शामिल हैं. सबसे ताजा प्रदर्शन जुलाई 2026 में हुआ जब कॉकरोच जनता पार्टी करीब एक महीने तक वहां धरने पर बैठी रही.

दिल्ली में अब यहां होंगे विरोध प्रदर्शन
भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने मौजूदा “तय जगह” के बजाय विरोध-प्रदर्शन करने के नागरिकों के अधिकार के लिए वैकल्पिक और उपयुक्त जगहों की जांच करने के लिए एक समिति बनाई थी. समिति की सिफारिशों के आधार पर, जंतर-मंतर को विरोध-प्रदर्शन की जगह के तौर पर हटा दिया गया है. विरोध-प्रदर्शन आयोजित करने के लिए तीन नई जगहों- रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और CBD मैदान (पूर्वी दिल्ली) को तय किया गया है. नए स्थलों पर प्रदर्शन के लिए नियम और शर्तें अलग से जारी की जाएंगी. नए नियमों का मकसद विरोध-प्रदर्शन के लिए तय जगहों और उनसे जुड़ी व्यवस्थाओं को बदलना है. हालांकि, पूरी प्रक्रिया तभी साफ हो पाएगी जब विरोध-प्रदर्शन की मंजूरी, भीड़ की सीमा और दूसरी शर्तों के बारे में अलग से विस्तृत नियम जारी किए जाएंगे.
क्यों बदले गए प्रदर्शन स्थल
पिछले कुछ महीनों से राजधानी दिल्ली में प्रदर्शनों की लहर चल रही है. सबसे पहले कॉकरोच जनता पार्टी ने जून-जुलाई में जंतर-मंतर पर आंदोलन खड़ा कर दिया, जो करीब एक महीने तक चला. इसके बाद अब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सीजेपी और विपक्षी इंडिया गठबंधन ने मोर्चा खोल दिया है. कभी इंडिया ब्लॉक जंतर मंतर तक मार्च निकालने की कोशिश करता है, तो कभी सीजेपी नए आंदोलन का आगाज कर देती है. ऐसे में यह फैसला जंतर-मंतर और कनॉट प्लेस के पास हाल ही में हुए विरोध-प्रदर्शनों और सुरक्षा संबंधी चिंताओं को ध्यान में रखते हुए लिया गया है.
देश के अन्य धरना स्थल
बोट क्लब और रामलीला मैदान दिल्ली
जंतर-मंतर से बहुत पहले बोट क्लब का विशाल लॉन रैलियों, प्रदर्शनों और आंदोलनों के लिए मुख्य जगह हुआ करता था. यह संसद और राष्ट्रपति भवन के पास है. 1988 में महेंद्र सिंह टिकैत के नेतृत्व में हुए किसान आंदोलन में ट्रैक्टरों और मवेशियों के साथ पांच लाख से ज्यादा लोगों की भारी भीड़ जुटी थी, जिसके बाद बोट क्लब में विरोध-प्रदर्शनों पर रोक लगाने की शुरुआत हुई. 1993 में बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद बोट क्लब में विरोध-प्रदर्शनों पर प्रतिबंध लगा दिया गया, हालांकि 2018 में अदालत के एक आदेश ने जंतर-मंतर के साथ-साथ इसे कुछ समय के लिए फिर से विरोध-प्रदर्शन की जगह बनने की इजाजत दी.
लुटियंस दिल्ली की इन दो जगहों से कुछ ही दूर रामलीला मैदान विरोध-प्रदर्शन के लिए तय जगह बना हुआ है. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने 1952 में रामलीला मैदान से ही जम्मू-कश्मीर को भारतीय संघ में पूरी तरह शामिल करने की मांग को लेकर सत्याग्रह शुरू किया था. समाजवादी नेता जयप्रकाश नारायण ने 25 जून 1975 को – जिस दिन इमरजेंसी लागू हुई थी – यहां एक विशाल रैली को संबोधित किया था. यह 2011 के भ्रष्टाचार-विरोधी आंदोलन का भी केंद्र रहा था.
आजाद मैदान, मुंबई
आजादी के बाद से ही आजाद मैदान मराठा आरक्षण के कई आंदोलनों, किसानों के विरोध-प्रदर्शनों और कपड़ा मिल कर्मचारियों की हड़तालों का मुख्य गवाह रहा है. इन आंदोलनों ने महाराष्ट्र में एक के बाद एक कई सरकारों को हिलाकर रख दिया है. 1857 के विद्रोह के दौरान यहां लोगों को सरेआम फांसी दी जाती थी और बाद में आजादी की लड़ाई के दौरान यह राष्ट्रवादी विरोध-प्रदर्शनों का एक अहम केंद्र बन गया. महात्मा गांधी ने 1931 में यहां एक बड़ी रैली की थी. यहां से कुछ ही किलोमीटर दूर मुंबई का एक और विरोध-प्रदर्शन स्थल है-अगस्त क्रांति मैदान, जहां से गांधीजी ने 1942 में ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ शुरू किया था. पास ही शिवाजी पार्क भी है, जो बड़ी राजनीतिक सभाओं और जन-रैलियों के लिए एक और अहम जगह है.

फ्रीडम पार्क, बेंगलुरु
फ्रीडम पार्क लंदन के हाइड पार्क की तर्ज़ पर बनाया गया है. यहां जन-रैलियों और विरोध-प्रदर्शनों के लिए एक खास जगह है. असल में यहां अंग्रेजों ने एक सेंट्रल जेल बनाई थी, जहां कई आजादी के दीवानों को कैद किया गया और फांसी दी गई. आजादी के बाद, इमरजेंसी के दौरान अटल बिहारी वाजपेयी और एल.के. आडवाणी समेत विपक्ष के कई नेताओं को यहां कैद रखा गया था. बाद में 2008 में इसे ‘फ्रीडम पार्क’ में बदल दिया गया, जहां अब एक जेल म्यूजियम भी है.
ब्रिगेड परेड ग्राउंड, कोलकाता
ब्रिगेड परेड ग्राउंड को प्लासी की लड़ाई में जीत के बाद ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की सेनाओं के लिए परेड ग्राउंड के तौर पर बनाया गया था. यह जगह आज़ादी की लड़ाई के दौरान विरोध-प्रदर्शनों का मुख्य केंद्र बन गई. यहां देशबंधु चित्तरंजन दास ने रॉलेट एक्ट के विरोध में रैली भी आयोजित की थी. भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने यहां सोवियत नेताओं के सम्मान में एक सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित किया था. इसके अलावा, पाकिस्तान के खिलाफ भारत की जीत और बांग्लादेश बनने के बाद इंदिरा गांधी ने यहां मुजीबुर रहमान को एक कार्यक्रम के लिए आमंत्रित किया था. यहां अलग-अलग राज्य सरकारों – लेफ्ट, टीएमसी और अब बीजेपी – की बड़ी-बड़ी रैलियां भी हुई हैं. कोलकाता में विरोध-प्रदर्शन के लिए और भी जगहें हैं, जैसे रानी राशमोनी एवेन्यू, शहीद मीनार मैदान और कॉलेज स्क्वायर.
गांधी मैदान, पटना
पहले पटना लॉन्स और बांकीपुर मैदान के नाम से जाना जाने वाला यह विशाल मैदान गंगा नदी के किनारे स्थित है. यहां कई ऐतिहासिक विरोध-प्रदर्शन और रैलियां हुई हैं. अंग्रेजों ने इस मैदान को मिलिट्री ड्रिल, घुड़दौड़, पोलो और गोल्फ कोर्स के लिए विकसित किया था. बाद में यह आजादी की लड़ाई के दौरान रैलियों का मुख्य केंद्र बन गया, जिसमें चंपारण आंदोलन और भारत छोड़ो आंदोलन भी शामिल थे.

1938 में मुहम्मद अली जिन्ना ने यहां मुस्लिम लीग का एक अहम अधिवेशन आयोजित किया था, जबकि 1939 में सुभाष चंद्र बोस ने फॉरवर्ड ब्लॉक की बैठक की थी. आजादी के बाद, यह जेपी आंदोलन का केंद्र बना, जब जयप्रकाश नारायण ने इमरजेंसी के खिलाफ ‘संपूर्ण क्रांति’ का आह्वान किया था.
तिलक घाट, चेन्नई
मरीना बीच पर स्थित और बाल गंगाधर तिलक के नाम पर बना यह घाट आजादी की लड़ाई के दौरान विरोध-प्रदर्शन का एक अहम केंद्र था. यहां महात्मा गांधी, सुभाष चंद्र बोस और एनी बेसेंट जैसे कई बड़े नेता आए थे. हालांकि, अब यह विरोध-प्रदर्शन के लिए तय की गई जगह नहीं है. चेन्नई में विरोध-प्रदर्शन के लिए अन्य जगहों में वल्लुवर कोट्टम और स्वामी शिवानंद सलाई शामिल हैं. मार्च 2025 में, वल्लुवर कोट्टम में प्रदर्शन की अनुमति बंद करने के बाद पुलिस ने स्वामी शिवानंद सलाई को विरोध-प्रदर्शन के लिए वैकल्पिक जगह के तौर पर तय किया.
देश के अन्य धरना स्थल
इन ऐतिहासिक केंद्रों के अलावा भी कई धरना स्थल हैं. जैसे- लखनऊ में इको गार्डन, पणजी में आजाद मैदान और कैम्पल परेड ग्राउंड, हैदराबाद में धरना चौक, गन पार्क और लिवरी सर्कल हैं. वहीं जयपुर में शहीद स्मारक है.
अब जंतर-मंतर पर नहीं होगा धरना! गृह मंत्रालय ने तय किए 3 नए प्रदर्शन स्थल, रामलीला मैदान…
News Source: ANI
