Hanuman Ansh Kainchi Dham Ashram: भक्ति, सुकून और आध्यात्मिकता से जुड़ी जगहों की अपनी ही एक अलग दुनिया होती है. ऐसी ही एक जगह है उत्तराखंड का कैंची धाम, जो नीम करोली बाबा यानी महाराज जी से जुड़ा हुआ है. हाल ही में रिलीज हुई फिल्म ‘हनुमान अंश’ की सफलता के बाद एक बार फिर लोगों की दिलचस्पी नीम करोली बाबा, उनकी शिक्षाओं और उनसे जुड़े आश्रमों में बढ़ गई है. यही वजह है कि लोग ज्य़ादा से ज्यादा कैंची धाम और बाबा से जुड़ी लीलाओं के बारे में जानना चाह रहे हैं. 7 अगस्त, 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई ‘हनुमान अंश’ नीम करोली बाबा की जिंदगी पर आधारित एक भक्ति-प्रधान ड्रामा फिल्म है. फिल्म की कहानी विशाल चतुर्वेदी ने लिखी है. उन्होंने ही इस फिल्म को डायरेक्ट भी किया है. शुरुआत में फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर अच्छा रिस्पॉन्स नहीं मिला था. हालांकि, धीरे-धीरे सकारात्मक चर्चा ने इसकी कमाई की रफ्तार बढ़ा दी.

छोटा बजट, बड़ी कमाई
करीब 2 करोड़ रुपये के छोटे से बजट में बनी ‘हनुमान अंश’ ने दुनियाभर में 50 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई कर ली है. फिल्म की कहानी 20वीं सदी के आध्यात्मिक संत लक्ष्मण दास की जिंदगी पर आधारित है. बताया जाता है कि मां के निधन के बाद उन्होंने सिर्फ 13 साल की उम्र में ही अपना घर छोड़ दिया था. आगे चलकर उनकी आध्यात्मिक यात्रा और भगवान के लिए उनकी गहरी भक्ति ने उन्हें नीम करोली बाबा के नाम से मशहूर कर दिया. सितंबर 1973 में वृंदावन में उनका निधन हुआ, लेकिन उनकी आध्यात्मिक विरासत आज भी कई आश्रमों और मंदिरों के जरिए जिंदा है. हर साल लाखों लोग कैंची धाम में उन्हीं चमत्कारों को महसूस करने पहुंचते हैं, जिनके लिए नीम करोली बाबा मशहूर थे.
पहाड़ों के बीच भक्ति की शक्ति
नैनीताल से लगभग 40 किलोमीटर की दूरी पर कैंची धाम है. ये जगह नीम करोली बाबा से जुड़े सबसे मशहूर आध्यात्मिक स्थलों में से एक है. यहां रोजाना बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं और धाम की शक्ति को महसूस करते हैं. कैंची धाम में पहला मंदिर जून 1964 में स्थापित किया गया था. पहाड़ों और हरियाली से घिरी ये जगह उन लोगों को अपनी तरफ कुछ ज्यादा ही आकर्षित करती है जो कुछ समय के लिए शहर की भागदौड़ से दूर शांति चाहते हैं. इसके अलावा आश्रम की दिनचर्या काफी अनुशासित है. यहां रहने वाले लोग आश्रम की गतिविधियों और नियमों का संचालन करते हैं. आने वाले श्रद्धालुओं से सुबह और शाम की आरती में शामिल होने के लिए भी कहा जाता है. हालांकि, यहां घूमने और रहने में काफी अंतर है. आश्रम में रुकने के लिए खास परमिशन जरूरी होती है. श्री कैंची मंदिर ट्रस्ट की परमिशन के बिना यहां ठहरने की सुविधा नहीं मिलती. इसके अलावा यहां ठहरने के लिए कोई ऑनलाइन बुकिंग पोर्टल भी नहीं है. वहीं, अनुमति मिलने पर आप यहां ज्यादा से ज्यादा 3 दिन तक रुक सकते हैं. सर्दियों में बहुत ज्यादा ठंडा मौसम होनी की वजह से आश्रम साल के काफी हिस्सों में बंद भी रहता है. इसलिए यहां जाने से पहले मौसम और आश्रम से जुड़ी ताजा जानकारी देखना ज्यादा बेहतर रहता है.

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वृंदावन में भी है आश्रम
वैसे कम ही लोग जानते हैं कि, नीम करोली बाबा से जुड़ा एक खास और बड़ा आश्रम वृंदावन में भी है. वृंदावन वाले आश्रम को उनका महासमाधि मंदिर माना जाता है. यहां ठहरने की प्रक्रिया कैंची धाम से काफी अलग भी है. जो लोग यहां रुकना चाहते हैं, उन्हें आश्रम के मैनेजर को पत्र लिखकर रहने की अनुमति मांगनी होती है. यहां भी ठहरने की अवधि ज्यादा से ज्यादा 3 दिन तक ही सीमित है. यहां रहने के लिए ऐसे श्रद्धालु का रेफरेंस भी देना होता है, जो पहले इस आश्रम में रह चुका हो. नैनीताल के कैंची धाम और उत्तर प्रदेश के वृंदावन के अलावा नीम करोली बाबा से जुड़े केंद्र भारत के कई शहरों में मौजूद हैं. इनमें लखनऊ, दिल्ली, ऋषिकेश और नीम करोली गांव भी शामिल हैं. वैसे, नीम करोली बाबा की विरासत भारत तक ही नहीं रही, बल्कि अमेरिका और जर्मनी तक भी पहुंची. यानी बाबा की लोकप्रियता भारत से बाहर भी गई. विदेशों में भी उनके भक्तों ने आश्रम और आध्यात्मिक केंद्र स्थापित किए हैं.
विदेश में भी बाबा की विरासत
अमेरिका के ताओस, न्यू मैक्सिको में ताओस आश्रम को भक्ति गीत, ध्यान और आध्यात्मिक चर्चाओं के लिए जाना जाता है. यहां हर साल हज़ारों श्रद्धालु आते हैं और आश्रम परिसर में समय बिताते हैं. ताओस आश्रम रोजाना सुबह 6:45 बजे से लेकर रात 8 बजे तक खुला रहता है. श्रद्धालु चाहें तो मैनेजर से बात करके सेवा यानी ‘सेवा कार्य’ में भी हिस्सा ले सकते हैं. इसमें परिसर की सफाई, प्रसाद तैयार करने और बांटने से लेकर बाकी दैनिक कामों में सहयोग करना भी शामिल रहता है. अमेरिका के अलावा जर्मनी में भी नीम करोली बाबा से जुड़े कई आध्यात्मिक केंद्र मौजूद हैं. यानी ‘हनुमान अंश’ ने भले ही एक फिल्म के तौर पर लोगों का ध्यान खींचा हो, लेकिन इसके साथ नीम करोली बाबा की आध्यात्मिक विरासत को लेकर भी नई जिज्ञासा पैदा हुई है. कैंची धाम हो, वृंदावन हो या विदेशों में बने आश्रम, इन जगहों पर पहुंचने वाले लोगों के लिए ये सिर्फ एक यात्रा नहीं, बल्कि भक्ति, सेवा और कुछ पल अपने अंदर की शांति ढूंढ़ने का भी अनुभव है.

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संदेश जिसने दुनिया को छुआ
आज की दुनिया में सफलता का पैमाना पैसा, पावर और पहचान बन चुका है. वहीं, कुछ लोग ऐसे भी हैं जिनकी तलाश इन सब चीजों से आगे जाकर सुकून और आत्मिक शांति की होती है. नीम करोली बाबा, जिन्हें उनके भक्त महाराज जी के नाम से भी जानते हैं, ऐसी ही आध्यात्मिक शख्सियतों में गिने जाते हैं. बाबा की खासियत ये थी कि उनकी बातें बहुत सिंपल थीं, लेकिन उनका असर बहुत गहरा होता था. प्रेम, सेवा, करुणा और अहंकार छोड़कर ईश्वर पर भरोसा करने की उनकी सीख आज भी लाखों लोगों को अपनी तरफ खींचती है. उनके नाम से जुड़ी मशहूर लाइन ‘मैं भक्त बनाता हूं, शिष्य नहीं’ उनकी सिंपल आध्यात्मिक सोच को दिखाती है. दिलचस्प बात ये है कि बाबा की लोकप्रियता सिर्फ धार्मिक या आध्यात्मिक दुनिया तक नहीं रही. टेक्नोलॉजी, बिजनेस, खेल और मनोरंजन की दुनिया से जुड़े कई फेमस लोगों का नाम भी उनकी शिक्षाओं या कैंची धाम से जुड़ता रहा है.
स्टीव जॉब्स
नीम करोली बाबा से जुड़ी सबसे मशहूर कहानियों में एप्पल के को-फाउंडर स्टीव जॉब्स का नाम आता है. 1974 में स्टीव जॉब्स अपने दोस्त डैन कॉटके
के साथ भारत आए थे. वो नीम करोली बाबा से मिलना और आध्यात्मिक अनुभव हासिल करना चाहते थे. लेकिन जब वो भारत पहुंचे, तब तक बाबा का निधन हो चुका था. नीम करोली बाबा का निधन साल 1973 में हो चुका था. यानी स्टीव जॉब्स की बाबा से आमने-सामने मुलाकात नहीं हो सकी. इसके बावजूद बाबा की शिक्षाओं और आश्रम के माहौल का उन पर प्रभाव पड़ने की बात कही जाती है. स्टीव के भारत आने की ये कहानी आज भी टेक्नोलॉजी और आध्यात्मिकता के बीच एक दिलचस्प कड़ी के तौर पर चर्चा में रहती है. सादगी, ध्यान और अंदर की स्पष्टता जैसी बातें स्टीव के काम करने और सोचने के तरीके में हमेशा रही.
मार्क ज़ुकेरबर्ग भी पहुंचे कैंची धाम
स्टीव जॉब्स की भारत यात्रा की कहानी ने बाद में सिलिकॉन वैली की दूसरी बड़ी हस्तियों की दिलचस्पी भी बढ़ाई. फेसबुक के को-फाउंडर मार्क ज़ुकेरबर्ग ने साल 2015 में उत्तराखंड के कैंची धाम का दौरा किया. ये यात्रा ऐसे समय में हुई जब वो व्यक्तिगत और व्यावसायिक स्तर पर बड़े फैसले ले रहे थे. कैंची धाम में उनका पहुंचना सोशल मीडिया और टेक्नोलॉजी की दुनिया में काफी चर्चा में रहा. इससे दुनिया के सामने ये भी आया कि आधुनिक टेक इंडस्ट्री के बड़े नाम भी कभी-कभी जवाब और शांति की तलाश में आध्यात्मिक जगहों पर जाते हैं.

लेरी पेज
नीम करोली बाबा से जुड़े श्रद्धालुओं में गूगल के लेरी पेज और eBay के को-फाउंडर जेफ़री स्कॉल जैसे नामों का भी जिक्र होता है. लंबे समय से बाबा के भक्त रहे लैरी ब्रिलियंट ने कुछ टेक्नोलॉजी दिग्गजों को कैंची धाम से परिचित कराया था.
विराट कोहली और अनुष्का शर्मा
भारत में नीम करोली बाबा की लोकप्रियता को नई चर्चा तब मिली जब क्रिकेटर विराट कोहली और उनकी पत्नी अनुष्का शर्मा कैंची धाम पहुंचे. दोनों की आध्यात्मिक यात्रा की तस्वीरें सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर बाबा और कैंची धाम को लेकर लोगों की दिलचस्पी और बढ़ी. खास तौर पर विराट कोहली के फोन स्क्रीनसेवर पर नीम करोली बाबा की तस्वीर ने लोगों का खूब ध्यान खींचा. विराट कोहली को क्रिकेट में उनकी अनुशासन, मेहनत और मानसिक मजबूती के लिए जाना जाता है. वैसे, यहां ये समझना जरूरी है कि किसी खिलाड़ी या सेलिब्रिटी की आध्यात्मिक आस्था को उसकी सफलता की सीधी वजह मानना व्यक्तिगत विश्वास की बात है. लेकिन इतना जरूर है कि इन मशहूर हस्तियों की वजह से नई पीढ़ी के बीच नीम करोली बाबा और कैंची धाम को लेकर एक्साइटमेंट बढ़ी है. अब ‘हनुमान अंश’ फिल्म की सफलता के बाद एक बार फिर लोग नीम करोली बाबा, कैंची धाम और उनसे जुड़े चमत्कारों के बारे में बात कर रहे हैं. 2 करोड़ रुपये के बजट में बनी इस फिल्म ने लोगों के दिलों को छू लिया है. उम्मीद है कि ये फिल्म बॉक्स ऑफिस पर अभी और धमाल मचाएगी.
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