Sonam Wangchuk: बीते 28 जून से सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षाविद् सोनम वांगचुक नीट पेपर लीक मामले में छात्रों की मांगों को लेकर भूख हड़ताल पर थे. हालांकि, 26 दिन के इस अनशन को उन्होंने 24 जुलाई को समाप्त कर दिया है.
मेदांता अस्पताल में भर्ती वांगचुक को स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने सूप पिलाकर उनकी भूख हड़ताल को तोड़वाया. इस मौके पर केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह और वांगचुक की पत्नी गीतांजलि भी मौजूद रहीं. अनशन तोड़ने के बाद से अब कुछ लोगों ने सोनम वांगचुक पर केंद्र सरकार के साथ डील कर लेने के आरोप लगाए हैं. वहीं, समझौते के इस आरोप पर सोनम वांगचुक ने एक वीडियो शेयर किया है, इस दौरान उन्होंने बताया कि वह इस वीडियो को दुख, हैरानी, गुस्सा और गम के साथ बना रहे हैं.
AFTER 26 DAYS OF HUNGER DO I NEED TO PROVE MY SINCERITY !!!
— Sonam Wangchuk (@Wangchuk66) July 24, 2026
Do please watch and help spread the word. Find the full 22 minutes video on my YouTube Channel: Sonam Wangchuk pic.twitter.com/6CO3tjZsSD
क्या मुझे कैरेक्टर सर्टिफिकेट लेनी होगी?
सोनम वांगचुक ने एक वीडियो मैसेज में कहा, “दोस्तों मैं यह वीडियो थोड़ा दुख और थोड़ा हैरानी, थोड़ा गम और गुस्से के साथ बना रहा हूं. अपने भाइयों, बहनों, छात्रों के लिए 26 दिन भूखा रहने के बाद, जिसमें मेरा 11 केजी शरीर खत्म हो चुका है, मसल्स चले गए हैं, ऑर्गन और दिमाग पर इरिवर्सिबल डैमेज लगभग होने के कगार पर पहुंचा है और वो भी लद्दाख की कड़कती ठंड से दिल्ली की तपती धूप में बैठकर ये सब करने बाद क्या मुझे किसी से कैरेक्टर सर्टिफिकेट लेनी होगी कि मेरा अनशन कितना पवित्र था?”
उन्होंने आगे कहा कि मैंने तोड़ा तो क्यों तोड़ा, उसके हाथों तोड़ा, तो इसके हाथों क्यों नहीं तोड़ा, क्या डील हुई है? क्या सौदा हुआ? ये सब मुझे जवाब देना होगा? वांगचुक ने आगे कहा, “धिक्कार है ऐसे देश पर, जहां ऐसे दिमागों की उपज होती है, जिसमें से ऐसे नीच ख्यालात निकलते हैं.”
वांगचुक का क्या था मुख्य उद्देश्य?
केंद्रीय मंत्रियों की उपस्थिति में अपना अनशन समाप्त करने को लेकर हो रही आलोचना का जवाब देते हुए वांगचुक ने कहा कि उनके फैसले पर सवाल उठाने वाले लोग उन परिस्थितियों से अनभिज्ञ थे जिनका सामना उन्हें विरोध स्थल से हटाए जाने के बाद करना पड़ा. उन्होंने पूछा, “अगर मुझे कोई समझौता करना होता, तो क्या मैं 26 दिनों तक भूखा रहता? क्या मैं दिल्ली की भीषण गर्मी में उपवास करने के बजाय एसी कमरे में बैठकर कोई समझौता नहीं कर सकता था?”
वांगचुक ने कहा, “मेरा मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि छात्रों को कोई परेशानी न हो. मेरी सबसे बड़ी चिंता कानूनी कार्रवाई और एफआईआर दर्ज करवाना था. मुझे व्यक्तिगत रूप से मंत्री का इस्तीफा दिलवाना जरूरी नहीं लगा.”
मुझे डर था कि कहीं ऐसा ही न हो जाए- सोनम
न्यूज रिपोर्ट के अनुसार, सोनम वांगचुक ने केंद्र के साथ “समझौता” करने के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उन्होंने अपनी 26 दिवसीय भूख हड़ताल तभी समाप्त की जब उन्हें लिखित आश्वासन मिला. उन्होंने बताया क्योंकि उन्हें दिल्ली में प्रदर्शनकारियों पर संभावित कार्रवाई का डर था, जो लद्दाख में 2025 में युवाओं पर हुई गोलीबारी की याद दिलाता है, और वे छात्रों के खिलाफ किसी भी हिंसा को रोकना चाहते थे.
वांगचुक ने कहा, “मैं खबरें देख रहा था और मुझे 24 सितंबर, 2025 की घटना याद आ गई, जब पुलिस और सीआरपीएफ कर्मियों ने लद्दाख के युवाओं पर बेरहमी से गोलियां चलाई थीं. मुझे डर था कि कहीं कुछ ऐसा ही यहां भी न हो जाए. मुझे लगा कि अगर मैं अपना अनशन खत्म कर दूं और शांति की अपील करूं, तो शायद स्थिति शांत हो सकती है.”
News Source: PTI
