BSP Chief: उत्तर प्रदेश में कई दलित कांग्रेस नेताओं द्वारा बसपा प्रमुख मायावती के लखनऊ आवास पर की गई भेंट ने बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है. इस अनुशासनहीनता का संज्ञान लेते हुए कांग्रेस नेतृत्व ने संबंधित नेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया है. इस संबंध में नेताओं से स्पष्टीकरण भी मांगा गया है. यह घटना तब हुई जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी 19 मई को रायबरेली दौरे पर थे. पार्टी के लिए अधिक शर्मिंदगी की बात यह रही कि यह प्रतिनिधिमंडल मायावती से मुलाकात करने में भी असफल रहा. यह यात्रा समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के उस बयान के कुछ ही घंटों बाद हुई, जिसमें उन्होंने 2027 के यूपी विधानसभा चुनावों के लिए कांग्रेस के साथ गठबंधन जारी रखने का संकेत दिया था.
पार्टी ने कोई अनुमति नहीं दीः अजय राय
मायावती से मुलाकात करने पहुंचे नेताओं में कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेंद्र पाल गौतम और उत्तर प्रदेश इकाई के अध्यक्ष व सांसद तनुज पुनिया शामिल थे. बाद में पुनिया ने इस निजी दौरे को महज एक सद्भावना संकेत करार दिया. पुनिया ने कहा कि राजेंद्र पाल के नेतृत्व में पार्टी के एससी विंग की एक बैठक मंगलवार शाम को लखनऊ में हुई. चूंकि हमारी पार्टी का कार्यालय बसपा प्रमुख के आवास के करीब है. बैठक के बाद जब हम मायावती जी के आवास के पास से गुजरे, तो हमने उनसे अचानक शिष्टाचार मुलाकात करने के बारे में सोचा, क्योंकि वह भी हमारे ही समुदाय से हैं और एक वरिष्ठ नेता हैं. कांग्रेस के उत्तर प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडे ने पीटीआई-भाषा को बताया कि पार्टी ने उनके दौरे का संज्ञान लिया है. ये उनका व्यक्तिगत मामला है न कि पार्टी का. उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने भी कहा कि पार्टी ने यात्रा के लिए कोई अनुमति नहीं दी है.
मुद्दा सीटों का नहीं, जीत काः अखिलेश
उन्होंने कहा कि इस तरह की यात्राएं पहले से तय होती हैं और शीर्ष नेतृत्व द्वारा पहले ही मंजूरी दे दी जाती है. बसपा के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल ने कहा कि उन्हें इस यात्रा के बारे में कोई जानकारी नहीं है. उन्होंने पीटीआई-भाषा से कहा कि मुझे नहीं पता कि बहन जी से मिलने कौन गया था. मुझे ऐसी किसी यात्रा की जानकारी नहीं है. अखिलेश यादव ने मंगलवार को इस बात पर जोर दिया कि भविष्य के चुनावों में उनकी पार्टी के सहयोगियों के साथ गठबंधन जारी रहेगा. यादव ने कहा कि समाजवादी पार्टी के पास गठबंधन बनाने का व्यापक अनुभव है और उसने हमेशा अपने सहयोगियों के लिए लाभ सुनिश्चित किया है. उन्होंने कहा कि गठबंधन में सीटों का सवाल नहीं होगा, यहां तक कि लोकसभा चुनाव के दौरान भी. कहा कि मुद्दा सीटों का नहीं है, मुद्दा जीत का है.
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News Source: PTI
