Rahul Gandhi Birthday: राहुल गांधी लोकसभा में विपक्ष के नेता है. बहुत कम लोग जानते हैं कि नेता विपक्ष भारत में सातवां सबसे ऊंचा पद होता है. राहुल गांधी का नाम भारतीय राजनीति की गहराई से जुड़ा है. वे देश के सबसे प्रमुख सियासी परिवार से हैं, इसलिए उन्हें ‘युवराज’ का तंज भी मिलते आया है. भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू से लेकर इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और सोनिया गांधी तक, उनके परिवार का इतिहास भारतीय राजनीति का एक अहम हिस्सा रहा है. ऐसे माहौल में पले-बढ़े राहुल का बचपन आम बच्चों से बहुत अलग था. उनकी पर्सनैलिटी सुरक्षा घेरे और राजनीतिक फेरबदल के बीच बनी.
राहुल गांधी ने अपनी शुरुआती पढ़ाई दिल्ली में की, हालांकि परिवार से जुड़ी सुरक्षा चिंताओं की वजह से उनकी पढ़ाई में अक्सर रुकावटें आती रहीं. शुरुआत में वह लंबे समय तक सक्रिय राजनीति से दूर रहे, लेकिन आखिरकार उन्होंने अपने परिवार की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने का फैसला किया. राहुल गांधी का जीवन सिर्फ राजनीति तक ही सीमित नहीं रहा है. उनके बारे में कई ऐसी अनसुनी और दिलचस्प बातें हैं, जो लोगों को नहीं पता. इस लेख में हम राहुल गांधी की लाइफ के अलग-अलग पहलुओं के बारे जानेंगे कि उनका बचपन कैसा बीता, वे राजनीति में कैसे आए और उनकी निजी जिंदगी कैसी रही।
नाम बदलने के बाद विदेश में की पढ़ाई
राहुल गांधी का जन्म 19 जून, 1970 को हुआ, जब उनकी दादी इंदिरा गांधी देश की प्रधानमंत्री थी. प्रधानमंत्री के पोते होने की वजह से उनका जीवन बाकी बच्चों से काफी अलग था. वे हमेशा सुरक्षा घेरे में रहते थे. उन्हें आम बच्चों के साथ खेलने की अनुमति नहीं थी, इसलिए सुरक्षाकर्मियों के साथ ही खेला करते थे.
उन्होंने शुरुआती पढ़ाई दिल्ली के मॉडर्न स्कूल से की. 1982 में आगे की स्कूलिंग के लिए देहरादन चले गए और दून स्कूल में पढ़ाई की. लेकिन दो ही साल बाद 1984 में उनकी दादी इंदिरा गांधी की हत्या के बाद देश का माहौल खराब हो गया. राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को सुरक्षा कारणों से उन्हें वापस दिल्ली बुला लिया गया. उनके आधिकारिक आवास पर ही दोनों की होम स्कूलिंग हुई.
अपने घर से बाहर निकलने का मौका उन्हें 1989 में मिला, जब उन्होंने दिल्ली के सेंट स्टीफंस में ए़डमिशन लिया. एक साल बाद, वह आगे की पढ़ाई के लिए अमेरिका की मशहूर हार्वर्ड यूनिवर्सिटी चले गए, जहां उन्होंने इंटरनेशनल रिलेशन और पॉलिटिक्स की पढ़ाई शुरू की. 1991 में अपने पिता राजीव गांधी की हत्या के बाद, उन्हें सुरक्षा कारणों से हार्वर्ड छोड़ना पड़ा. इसके बाद उन्होंने फ्लोरिडा के रोलिंस कॉलेज में एडमिशन लिया. उन्होंने वहां अपनी पहचान छिपाने के लिए “रॉल विंसी” नाम से पढ़ाई की और 1994 में बैचलर ऑफ आर्ट्स की डिग्री हासिल की. ग्रेजुएशन के बाद राहुल गांधी इंग्लैंड चले गए. वहां उन्होंने 1995 में कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के ट्रिनिटी कॉलेज से डेवलपमेंट स्टडीज में M.Phil. (मास्टर ऑफ फिलॉसफी) की डिग्री ली.

कर्पोरेट कंपनी में किया काम
पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने अपने करियर की शुरुआत नेता के तौर पर नहीं, बल्कि एक कॉर्पोरेट कर्मचारी के रूप में की थी. उन्होंने लंदन की मैनेजमेंट कंसल्टिंग फर्म मॉनिटर ग्रुप में काम किया. राहुल ने यहां लगभग तीन सालों तक बतौर मैनेजमेंट कंसल्टेंट काम किया. इतना ही नहीं उन्होंने भारत में अपनी खुद की कंपनी भी खोली. 2002 में भारत लौटने के बाद उन्होंने मुंबई में अपनी खुद की टेक्नोलॉजी और आउटसोर्सिंग कंसल्टेंसी कंपनी, बैकऑप्स सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड शुरू की.
राहुल ने खुद बताया गर्लफ्रेंड का नाम
आज हर कोई राहुल गांधी की लव लाइफ के बारे में जानना चाहता है. आज भी लोग उनकी शादी और गर्लफ्रेंड के बारे में सवाल पूछते हैं और हर बार राहुल हंसकर बात पलट देते हैं. हालांकि 22 साल पहले राहुल ने खुद अपनी गर्लफ्रेंड के बारे में बताया था. राजनीति में आने से पहले उनकी एक गर्लफ्रेंड थीं, जिसका जिक्र उन्होंने खुद एक इंटरव्यू में किया था. उन्होंने बताया था कि उसका नाम वेरोनिका था, जो एक स्पैनिश आर्किटेक्ट थी. उसे अक्सर राहुल के साथ छुट्टियां मनाते देखा जाता था, लेकिन जब से वह पॉलिटिक्स में आए हैं, वह भी गायब हो गईं. गांधी परिवार के करीबी लोगों का कहना है कि 2004 तक सोनिया गांधी के विदेशी मूल का मुद्दा गरमाया हुआ था. इसलिए वह नहीं चाहती थीं कि राहुल अपनी विदेशी गर्लफ्रेंड या पार्टनर की वजह से ऐसे किसी विवाद में पड़ें. इसी वजह से उन्होंने राहुल को यह रिश्ता खत्म करने की सलाह दी थी. तब से राहुल ने शादी नहीं की है.
राजनीति में एंट्री और बंपर जीत
राहुल गांधी पहली बार जनवरी 2004 में अमेठी आए थे. उन्होंने अपनी पारिवारिक सीट अमेठी से चुनाव लड़ने का ऐलान किया, जहां से पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी और सोनिया गांधी भी सांसद चुने गए हैं. राहुल गांधी ने अपना पहला ही चुनाव रिकॉर्ड बहुमत से जीता था. उन्होंने अमेठी लोकसभा सीट करीब तीन लाख वोटों से जीती थी. 2004 में UPA सरकार बनने के बाद, जनवरी 2006 में हैदराबाद में कांग्रेस का एक कन्वेंशन हुआ था. हजारों कांग्रेस कार्यकर्ता और नेता चाहते थे कि राहुल गांधी पार्टी में कोई पद संभालें, लेकिन राहुल गांधी ने मना कर दिया. 2007 में उन्हें कांग्रेस पार्टी का जनरल सेक्रेटरी बनाया गया. उन्हें यूथ कांग्रेस और नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) का चार्ज दिया गया. राहुल गांधी ने यूथ कांग्रेस में बड़े बदलाव किए. पूरे देश में यूथ कांग्रेस के ऑर्गेनाइजेशनल इलेक्शन हुए.
विवादित बयान
राहुल गांधी भारतीय राजनीति के उन नेताओं में से एक हैं जो अपने पॉलिटिकल कैंपेन और भाषणों के लिए जितने चर्चा में रहे हैं, उतने ही विवादों और आलोचनाओं के लिए भी. अब तक के अपने पॉलिटिकल करियर में, उन्होंने कई ऐसे बयान दिए हैं जिनसे देश भर में बहस छिड़ गई और बीजेपी ने उन मुद्दों को जमकर भुनाया. ऐसी ही एक घटना 2007 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान सामने आई थी. चुनाव प्रचार के दौरान, राहुल गांधी ने कहा था कि अगर बाबरी मस्जिद गिराए जाने के समय गांधी परिवार का कोई सदस्य राजनीति में एक्टिव होता, तो यह घटना नहीं होती. फिर क्या था, बीजेपी ने राहुल गांधी पर हिंदू विरोधी होने का आरोप लगाया. इस बयान से बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया. इस घटना के बाद राहुल गांधी लंबे समय तक राजनीतिक चर्चाओं में रहे.
2019 में उन्होंने कर्नाटक में चुनावी रैली में प्रचार करते हुए कहा था कि “सभी चोरों का उपनाम मोदी ही क्यों होता है”. इस बयान को बीजेपी ने एक समुदाय के खिलाफ बताया. राहुल गांधी पर आपराधिक मुकदमा दर्ज हुआ. इसके चलते उनकी सदस्यता भी कुछ समय के लिए रद्द कर दी गई थी. इसके अलावा भी वे जब भी विदेश जाते हैं तो बीजेपी, आरएसएस या भारतीय लोकतंत्र के बारे में कोई न कोई विवादित टिप्पणी कर देते हैं. भाजपा उनके बयानों को जोर-शोर से उठाती है और उन पर विदेशी धरती पर भारत को बदनाम करने का आरोप लगाती है.

“सत्ता जहर है”
2013 में राहुल गांधी कांग्रेस पार्टी के वाइस प्रेसिडेंट बने. इस मौके पर अपने पहले बड़े भाषण में एक पर्सनल बातचीत का जिक्र किया जो काफी चर्चा में रही और उन्हें अपने ही नेताओं की नाराजगी का सामना करना पड़ा. राहुल ने कहा कि उनकी मां सोनिया गांधी ने उन्हें समझाया था कि “सत्ता जहर है, जो अपने साथ कई खतरे लाती है.” यह बात उस समय मीडिया और राजनीतिक गलियारे में काफी चर्चा का विषय बन गई थी. इसी दौर में भारतीय राजनीति में नरेंद्र मोदी का तेजी से उदय हो रहा था.
सोशल मीडिया पर मजाक
सोशल मीडिया और डिजिटल कैंपेनिंग भी राजनीति में जगह बना रही थी. राहुल गांधी के भाषणों के कुछ हिस्से सोशल मीडिया पर वायरल होने लगे, जिससे सटायर और मीम्स बने. बीजेपी ने उनकी राजनीतिक काबिलियत पर सवाल उठाया. धीरे-धीरे, “पप्पू” शब्द का इस्तेमाल उनके लिए एक तंज के तौर पर किया जाने लगा, जिससे उनकी पब्लिक इमेज खराब हुई. 2013 में केदारनाथ आपदा के दौरान भी राहुल गांधी पब्लिक में ज्यादा एक्टिव नहीं थे. विपक्ष ने इसे मुद्दा बनाया और उनकी गैरमौजूदगी पर सवाल उठाए. इसके बाद, उनके विरोधियों ने उन्हें “छुट्टी पर गए नेता” के तौर पर दिखाने की कोशिश की. आज भी उनके कई मीम्स सोशल मीडिया पर वायरल होते हैं, हालांकि अब सिर्फ राहुल गांधी नहीं, हर नेता पॉलिटिकल सटायर के घेरे में आता है.
मार्शल आर्ट्स के शौकीन हैं राहुल गांधी
राहुल गांधी मार्शल आर्ट्स के शौकीन हैं. वे ‘एकिडो’ में ब्लैक बेल्ट हैं. कई बार उनकी प्रैक्टिस करते हुए वीडियोज सोशल मीडिया पर वायरल हुई हैं. राहुल गांधी ने अपनी फिटनेस का राज बताते हुए कहा कि वह रेगुलर एक्सरसाइज, रनिंग और स्विमिंग करते हैं. इसके अलावा वह जापानी मार्शल आर्ट एकिडो की प्रैक्टिस करते हैं, जिसमें उनके पास ब्लैक बेल्ट डिग्री है. उन्होंने लंदन से ब्राजीलियन मार्शल आर्ट और फेंसिंग की भी ट्रेनिंग ली है. अपनी ‘भारत जोड़ो यात्रा’ और ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ के दौरान राहुल गांधी अक्सर शाम को अपने कैंप में लोकल युवाओं के साथ मार्शल आर्ट की प्रैक्टिस करते थे. उन्होंने इन एक्सरसाइज के वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी शेयर किए हैं, जिसमें वह बच्चों और युवाओं को मार्शल आर्ट की बेसिक टेक्नीक सिखाते हुए दिखे.

मकैनिक से लेकर मोची तक से मिले राहुल
हाल के सालों में उनकी भारत जोड़ो यात्रा और भारत जोड़ो न्याय यात्रा ने उनकी राजनीतिक इमेज को एक नया आयाम दिया. इस दौरान, उन्होंने किसानों, युवाओं, महिलाओं और छोटे बिजनेस के मुद्दों को उठाते हुए आम लोगों से सीधे बात की. राहुल गांधी अक्सर मजदूरों से जाकर मिलते हैं. कभी वे टैक्सी ड्राइवर के साथ खाना खाते हैं, तो कभी किसान बन जाते हैं. मकैनिक से लेकर मोची तक उन्होंने कई छोटे रोजगार करने वाले और मजदूरों के साथ समय बिताया. उनकी तस्वीरें अक्सर सोशल मीडिया और राजनीति में चर्चा में रहती हैं. दिलचस्प बात यह है कि कई आलोचनाओं और चुनावी जीत-हार के बावजूद, राहुल गांधी भारतीय राजनीति में सबसे चर्चित नेताओं में से एक बने हुए हैं.
