BIHAR BANDH: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर शनिवार को बिहार बंद के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच झड़प हो गई. पूरा बिहार अशांत हो गया. स्कूल-कालेज बंद कर दिए गए. पुलिस ने सड़कों पर फ्लैग मार्च किया. जब छात्रों ने पत्थर बरसाए तो पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया. बंद के चलते पटना सहित कई शहरों में सड़कें सूनी रहीं, जबकि रेलवे स्टेशनों पर सन्नाटा पसरा रहा. शनिवार को बिहार के कई ज़िलों में वामपंथी छात्र संगठनों के सदस्यों ने NEET पेपर लीक और प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस की कार्रवाई के विरोध में राज्यव्यापी बंद के समर्थन में प्रदर्शन किया. इस दौरान पुलिस के साथ उनकी झड़प हुई.
सभी जिलों में भारी पुलिस बल तैनात
पुलिस ने बताया कि राज्य भर में बंद का मिला-जुला असर देखने को मिला. पटना में पत्थरबाज़ी हुई, जबकि नालंदा, नवादा, जहानाबाद और रोहतास में इसका बहुत कम असर दिखा. राज्य के सभी ज़िलों में भारी पुलिस बल तैनात करके सुरक्षा बढ़ा दी गई है. पटना के डाक बंगला चौराहे पर प्रदर्शनकारियों ने पुलिसकर्मियों पर पत्थर और ईंटें फेंकीं, जिसके बाद पुलिस ने कई छात्रों को हिरासत में ले लिया. पटना के SSP कार्तिकेय के. शर्मा ने कहा कि प्रदर्शनकारियों ने हम पर पत्थर फेंके. उन्होंने बैरिकेडिंग तोड़ने की भी कोशिश की. हमने कई छात्रों को हिरासत में लिया है. पुलिस हाई अलर्ट पर है. हम उपद्रवियों का पता लगाएंगे और उनके ख़िलाफ़ उचित कार्रवाई करेंगे.
पुलिसकर्मियों की सभी छुट्टियां रद्द
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिसकर्मियों की सभी छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं. एहतियात के तौर पर पुलिस ने पटना के पालीगंज इलाके समेत कई जगहों पर फ्लैग मार्च किया. प्रशासन ने पटना के प्राइवेट स्कूलों को बंद के दौरान बंद रखने का आदेश दिया है. जनता जनशक्ति दल के प्रमुख तेज प्रताप यादव ने प्रदर्शनकारी छात्रों का समर्थन करने के लिए पटना के राम गुलाम चौक का दौरा किया. सिवान ज़िले में AISA, RYA और दूसरे वामपंथी संगठनों ने JP चौक पर विरोध प्रदर्शन किया. ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) और रिवोल्यूशनरी यूथ एसोसिएशन (RYA) के बैनर लिए प्रदर्शनकारियों ने टायर जलाकर समस्तीपुर-पटना मुख्य सड़क को जाम कर दिया और सरकार के ख़िलाफ़ नारे लगाए. प्रदर्शन के दौरान मौजूद पूर्व विधायक और CPI(ML) नेता अमरजीत कुशवाहा ने कहा कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले 26 दिनों से विरोध प्रदर्शन चल रहा है.
दंगारोधी बल और SWAT टीमें भी तैनात
पटना की सड़कों पर भी छात्र उतरे. हालांकि, दिल्ली और पटना, दोनों जगहों पर उन्हें पुलिस की बर्बर कार्रवाई का सामना करना पड़ा. यहां तक कि महिलाओं और लड़कियों को भी नहीं बख्शा गया. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने विरोध प्रदर्शनों से निपटने के लिए तानाशाही रवैया अपनाया है. मधेपुरा ज़िले में NSUI के राज्य उपाध्यक्ष निशांत यादव समेत एक दर्जन से ज़्यादा छात्रों को हिरासत में ले लिया गया, जब वे विरोध प्रदर्शन के लिए TP कॉलेज चौक पर इकट्ठा हुए थे. ज़िले में दुकानें बंद रहीं. नवादा में हॉस्पिटल मोड़ के पास छात्रों ने विरोध प्रदर्शन और नारेबाजी की, लेकिन भारी पुलिस तैनाती के बीच प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा. प्रदर्शन वाली जगहों के पास दंगारोधी बल और SWAT टीमें भी तैनात की गई थीं. जहानाबाद में, जहां गुरुवार को छात्रों का हिंसक आंदोलन हुआ था और DM आवास पर पत्थरबाजी की गई थी, वहां बंद के दौरान प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा.
धर्मेंद्र प्रधान के कार्यकाल में 100 पेपर लीक
पुलिस ने फ्लैग मार्च किया और पूरे जिले में भारी सुरक्षा बल तैनात किया. जहानाबाद के SP कोटा किरण कुमार ने कहा कि हम कानून-व्यवस्था बनाए रखने और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं. मैं लोगों से अपील करता हूं कि वे हमारा सहयोग करें और किसी भी गलत जानकारी या अफवाह पर विश्वास न करें. बंद के मौके पर नालंदा जिले के बिहार शरीफ में छात्र नेताओं ने भारी पुलिस तैनाती के बीच विरोध मार्च निकाला. नालंदा में RYA के जिला अध्यक्ष वीरेश कुमार ने आरोप लगाया कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के कार्यकाल में 100 पेपर लीक हुए हैं और मांग की कि उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए. उन्होंने कहा कि हमने भारत बंद का आह्वान इसलिए किया है क्योंकि धर्मेंद्र प्रधान के कार्यकाल में 100 से ज़्यादा परीक्षा के पेपर लीक हुए हैं. हमारी मांग बहुत स्पष्ट है. उन्हें जिम्मेदारी लेनी चाहिए और अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए.
तानाशाही वाला रवैया अपना रहा प्रशासन
नई दिल्ली और बिहार में पुलिस की कार्रवाई का ज़िक्र करते हुए कुमार ने कहा कि प्रशासन तानाशाही वाला रवैया अपना रहा है. इस बीच, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया (मार्क्सवादी) के छात्र संगठन, स्टूडेंट्स फ़ेडरेशन ऑफ़ इंडिया (SFI) ने शुक्रवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के संघर्ष के समर्थन में ‘रात जागो, देश जागो’ नाम से रात भर चलने वाला एक कार्यक्रम आयोजित किया. SFI नेताओं ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को खत्म करने, नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP) 2020 को वापस लेने, प्रभावित उम्मीदवारों को 20-20 लाख रुपये का मुआवज़ा देने और NEET पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को 1 करोड़ रुपये का मुआवज़ा देने की मांग की. शुरुआत में यह कार्यक्रम पटना जंक्शन पर होना था, लेकिन बारिश की वजह से इसे जमाल रोड पर शिफ्ट कर दिया गया, जहां CPI का मुख्यालय है.
News Source: PTI
