Tiranga March: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर महाराष्ट्र की सियासत गर्म हो गई है. उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे ने छात्रों के समर्थन में तिरंगा मार्च निकालने का फैसला किया है. ठाकरे बंधु का कहना है कि वह हर वक्त छात्रों के साथ हैं. कहा कि उनकी मांगें जायज हैं. केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और छात्रों के समर्थन में रविवार (26 जुलाई) को शिवसेना (UBT) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) संयुक्त तिरंगा मार्च निकालेंगे. मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने साफ किया है कि उद्धव ठाकरे और उनकी अगुवाई में होने वाला यह मार्च पूरी तरह गैर राजनीतिक होगा. प्रदर्शन के दौरान किसी भी राजनीतिक दल के झंडे का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा.
केवल गूंजेंगे छात्रों के अधिकार के नारे
राज ठाकरे ने कहा कि मार्च में केवल सरकार के कामकाज की आलोचना करने वाले और छात्रों के अधिकार से जुड़े नारे ही लगाए जाएंगे. राज ठाकरे ने शनिवार को एक फ़ेसबुक पोस्ट में कहा कि यह एक तिरंगा मार्च है. यह पूरी तरह से गैर-राजनीतिक है. इसमें किसी पार्टी का झंडा नहीं होगा और न ही किसी पार्टी के नेताओं के समर्थन में नारे लगाए जाएंगे. नारे सरकार के कामों की आलोचना करने और देश भर के छात्रों और युवाओं के प्रति हमारा समर्थन ज़ाहिर करने के लिए होंगे. उन्होंने कहा कि यह मार्च NEET परीक्षा में गड़बड़ियों और छात्रों के आंदोलन को दबाने की सरकार की कोशिशों के विरोध में आयोजित किया जा रहा है.
गैर-राजनीतिक होगा प्रदर्शन
MNS प्रमुख ने कहा कि यह एक तिरंगा मार्च है. यह पूरी तरह से गैर-राजनीतिक है. इसमें किसी पार्टी का झंडा नहीं होगा और न ही किसी पार्टी के नेताओं के समर्थन में नारे लगाए जाएंगे. नारे सरकार के कामों की आलोचना करने और देश भर के छात्रों और युवाओं के प्रति हमारा समर्थन ज़ाहिर करने के लिए होंगे. उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि ठाकरे बंधुओं (जो इस मार्च के संयोजक हैं) के नाम पर नारे नहीं लगाए जाने चाहिए. उन्होंने कहा कि हालांकि उद्धव (ठाकरे) और मैं इस मार्च के संयोजक हैं, लेकिन हमारे नाम पर कोई नारा नहीं लगाया जाना चाहिए. यह छात्रों का मार्च है और हमें इस बात का ध्यान रखना चाहिए. MNS प्रमुख ने ज़ोर देकर कहा कि इस मार्च का मकसद दिल्ली में सरकार की मनमानी और उसके निर्देशों पर काम करने वाली दिल्ली पुलिस के रवैये की निंदा करना है.
छात्रों की मांगें जायज, हम उनके साथ
उन्होंने कहा कि साथ ही, इसका मकसद उन छात्रों के साथ एकजुटता दिखाना है जो सरकार के सामने झुके बिना अपने परिवारों के साथ डटे रहे हैं, और उन लोगों के साथ भी जो अपना विरोध दर्ज कराने के लिए दिल्ली या मुंबई नहीं आ सकते. उन्होंने कहा कि इस मार्च के ज़रिए हम उन्हें दिखाना चाहते हैं कि पूरा महाराष्ट्र राज्य मज़बूती से उनके साथ खड़ा है. उद्धव ठाकरे ने शुक्रवार को कहा कि सरकार के पास भले ही लाठियों की ताक़त हो, लेकिन प्रदर्शनकारियों के हाथों में तिरंगे हैं. मुंबई के दादर इलाके में हज़ारों प्रदर्शनकारियों के इकट्ठा होने पर उन्होंने कहा कि यह ‘जन की बात’ है और दिल्ली को इसे सुनना ही होगा. जिस तरह से छात्रों पर हमले किए गए और आंसू गैस छोड़ी गई, उसे देखते हुए मैं सरकार को चेतावनी दे रहा हूं कि आपके पास लाठियां हो सकती हैं, लेकिन हमारे पास तिरंगे हैं. देखते हैं कौन जीतता है.
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News Source: PTI
